By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Sep 04, 2026
(सुदीप्तो चौधरी) कोलकाता, चार सितंबर सिंगापुर स्थित एक कैंसर उपचार केंद्र में 2025 में भारत से आने वाले मरीजों की संख्या में करीब 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इनमें से ज्यादातर मरीज बीमारी के ज्यादा बढ़ने के चरण में इलाज के लिए पहुंचे, जब उन्हें पूरी तरह ठीक करने के उपचार के विकल्प काफी सीमित रह गए थे। पार्कवे कैंसर सेंटर के चिकित्सा निदेशक और वरिष्ठ कैंसर विशेषज्ञ डॉ. आंग पेंग तियाम ने कहा कि भारत में उपलब्ध उपचार के विकल्प समाप्त हो जाने के बाद कई मरीज विदेश का रुख करते हैं।
डॉ. तियाम ने ‘पीटीआई-भाषा’ से बातचीत में कहा कि पार्कवे कैंसर सेंटर आने वाले करीब 60 से 70 प्रतिशत भारतीय मरीजों में कैंसर बढ़ी हुई अवस्था में होता है या उपचार का कोई असर नहीं हो रहा होता है। वहीं करीब 30 प्रतिशत मरीज ऐसे होते हैं जिनके ठीक होने की संभावना रहती है। उन्होंने कहा, “2025 में भारत हमारे सबसे तेजी से बढ़ने वाले बाजारों में शामिल रहा और यहां से आने वाले मरीजों की संख्या सालाना आधार पर करीब 20 प्रतिशत बढ़ी।” उन्होंने कहा, “कैंसर के इलाज में सबसे महत्वपूर्ण बात सही पहचान करना है जिसमे ऊतक की जांच से बीमारी की सटीक पहचान, कैंसर की अवस्था का सही निर्धारण और आणविक प्रोफाइलिंग शामिल है।” उन्होंने कहा कि पार्कवे कैंसर सेंटर में भारत से अलग-अलग अवस्थाओं के मरीज आते हैं।
इनमें कैंसर होने की आशंका वाले मरीजों से लेकर ऐसे मरीज भी शामिल हैं, जो पहले ही कई तरह के उपचार करा चुके हैं। उन्होंने कहा, “हमारे पास हर तरह के मरीज आते हैं। कुछ मरीज बीमारी की शुरुआती अवस्था में आते हैं, जबकि कुछ उपचार विफल होने के बाद बेहद गंभीर स्थिति में पहुंचते हैं और इस उम्मीद में आते हैं कि शायद अब भी उनके लिए कोई उपचार उपलब्ध हो।” डॉ. तियाम ने कहा कि भारत में उपलब्ध उपचार के विकल्प समाप्त होने के बाद कई मरीज विदेश जाते हैं।
उन्होंने कहा कि कई मामलों में भारत में डॉक्टर मरीज के लिए जो संभव होता है, वह कर चुके होते हैं और मरीज यह सोच कर सिंगापुर आते हैं कि शायद दूसरी चिकित्सा टीम के पास कोई अन्य उपचार हो। इलाज में आने वाले खर्च के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि कैंसर का उपचार हर मरीज की बीमारी के अनुसार अलग-अलग होता है। उन्होंने कहा, “कैंसर का इलाज अलग-अलग होता है और इसकी लागत में काफी अंतर हो सकता है।
अनुमान बताना बहुत मुश्किल है, क्योंकि हर मरीज की बीमारी अलग होती है।” उन्होंने कहा कि दुनिया भर में कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं। इसके पीछे बढ़ती उम्र वाली आबादी, जागरूकता में वृद्धि और बेहतर जांच जैसे कारण हैं। उन्होंने कहा कि भारत के सामने कैंसर के बढ़ते बोझ से निपटने के लिए पर्याप्त स्वास्थ्य ढांचे की कमी एक चुनौती है।
उन्होंने कैंसर की रोकथाम और शुरुआती पहचान पर जोर देते हुए कहा कि तंबाकू और सुपारी के इस्तेमाल के दुष्प्रभावों के बारे में अधिक जागरुकता तथा अधिक जोखिम वाले लोगों के लिए कम मात्रा में विकिरण वाली सीटी जांच जैसे कार्यक्रम कैंसर के मामलों को कम करने और उपचार के परिणाम बेहतर करने में मदद कर सकते हैं।