Meta को भारत सरकार की अंतिम चेतावनी: Indian Laws का पालन न करने पर छिनेगा Safe Harbour Protection

By Ankit Jaiswal | Aug 18, 2026

सोशल मीडिया मंचों पर गैरकानूनी सामग्री को लेकर सरकार और मेटा के बीच बातचीत अब और गंभीर हो गई है। मौजूद जानकारी के अनुसार, केंद्र सरकार ने मेटा को साफ संदेश दिया है कि अगर कंपनी भारत के कानूनों का उल्लंघन करती है तो उसे सुरक्षित कानूनी संरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा। हाल की बैठकों में खास तौर पर बाल यौन शोषण से जुड़ी सामग्री और दूसरी हानिकारक सामग्री को लेकर चर्चा हुई है।

बता दें कि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79 के तहत कुछ शर्तों के साथ डिजिटल मध्यस्थों को तीसरे पक्ष की ओर से डाली गई सामग्री के लिए कानूनी जिम्मेदारी से सुरक्षा मिलती है। इसे सुरक्षित संरक्षण कहा जाता है। सरकार पहले भी सवाल उठा चुकी है कि अगर कोई मंच तय कानूनी शर्तों का पालन नहीं करता है तो उसे इस सुरक्षा का लाभ मिलना चाहिए या नहीं।

मौजूद जानकारी के अनुसार, सरकार और मेटा के बीच हुई बातचीत में बाल यौन शोषण से जुड़ी सामग्री के अलावा आर्टिफिशियल तरीके से तैयार सामग्री, नकली वीडियो, स्वचालित खातों और सामग्री की सिफारिश करने वाली व्यवस्था पर भी चर्चा हुई है। सरकारी अधिकारियों ने मेटा से यह सुनिश्चित करने को कहा है कि जिस सामग्री को गैरकानूनी या खतरनाक माना गया है, वह बार-बार लोगों तक न पहुंचे और उसे सिफारिश के जरिए आगे न बढ़ाया जाए।

गौरतलब है कि सरकार की एक बड़ी चिंता नकली वीडियो और एआई से तैयार सामग्री को लेकर भी है। अधिकारियों का मानना है कि लोगों को यह जानने का अधिकार है कि वे जो सामग्री देख रहे हैं वह वास्तविक है या मशीन की मदद से तैयार की गई है। इसलिए सरकार चाहती है कि ऐसी सामग्री की साफ पहचान हो और उपयोगकर्ताओं को इसकी जानकारी दी जाए।

सरकार ने मेटा की सामग्री की निगरानी व्यवस्था में भारत की भाषाई और सांस्कृतिक विविधता को पर्याप्त महत्व देने पर भी जोर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि केवल वैश्विक मानकों के आधार पर भारतीय सामग्री का फैसला करना पर्याप्त नहीं है। निगरानी करने वाली टीमों को भारतीय भाषाओं, स्थानीय संदर्भ और सामाजिक परिस्थितियों की बेहतर समझ होनी चाहिए।

इससे पहले सरकार मेटा की सामग्री की सिफारिश और तेजी से फैलाने वाली व्यवस्था पर भी सवाल उठा चुकी है। खास तौर पर यह जानने की कोशिश की गई कि आपत्तिजनक या चिह्नित आर्टिफिशियल सामग्री को हटाने के बाद भी वह दोबारा लोगों तक कैसे पहुंच जाती है।

व्हाट्सऐप पर उपयोगकर्ता नाम की व्यवस्था का मुद्दा भी सरकार की निगरानी में है। हालांकि, इसे केवल मेटा से जुड़ा मामला नहीं माना जा रहा है। केंद्र इसे सभी संदेश भेजने वाले मंचों के स्तर पर देख रहा है।

मेटा और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के बीच बाल यौन शोषण सामग्री, नकली वीडियो, स्वचालित खाते, कृत्रिम सामग्री, सामग्री की सिफारिश और भारतीय कानूनों के पालन को लेकर कई दौर की बातचीत हो चुकी है। सरकार का कहना है कि वह मेटा की पूरी तकनीकी व्यवस्था बदलने की मांग नहीं कर रही है, बल्कि यह चाहती है कि भारत में काम करने वाले उसके मंच कानून, भाषा और सामाजिक परिस्थितियों के अनुरूप जिम्मेदारी से काम करें।

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