Prabhasakshi NewsRoom: Saudi Arabia में हालात बिगड़ते ही भारतीय जायरीनों को सुरक्षित निकालने के लिए एक्शन में आई मोदी सरकार, अब तक 13 हजार से ज्यादा लौटे

By नीरज कुमार दुबे | Oct 23, 2026

विदेश की धरती पर संकट कितना भी विकराल क्यों न हो, अपने नागरिकों की सुरक्षा और उन्हें सुरक्षित स्वदेश वापस लाने के लिए मोदी सरकार हमेशा सबसे आगे खड़ी नजर आती है। सऊदी अरब में हवाई अड्डों और तेल प्रतिष्ठानों पर हो रहे हमलों, बिगड़ते सुरक्षा हालात और उड़ानों में व्यवधान के बीच उमरा करने गए भारतीय जायरीनों की मदद के लिए भारत सरकार ने तत्काल मोर्चा संभाल लिया है। रियाद स्थित भारतीय दूतावास और जेद्दा स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास एयरलाइंस, टूर ऑपरेटरों और स्थानीय स्वयंसेवकों के साथ समन्वय बनाकर भारतीयों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने में जुटे हैं।

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हालांकि, चुनौती अभी समाप्त नहीं हुई है। हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने लगभग 4,000 भारतीय जायरीनों के मक्का और मदीना में फंसे होने की बात कही है। उन्होंने सरकार से बड़े विमानों के संचालन की अनुमति देने अथवा विशेष उड़ानों की व्यवस्था करने और वापसी की प्रतीक्षा कर रहे लोगों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है। वहीं विदेश मंत्रालय ने कहा है कि शेष जायरीनों की जल्द वापसी के लिए व्यवस्थाओं पर चर्चा जारी है। भारतीय मिशन चौबीसों घंटे चलने वाले नियंत्रण कक्षों के जरिए नागरिकों की मदद कर रहे हैं और नियमित सुरक्षा परामर्श जारी किए जा रहे हैं।

डम्माम हवाई अड्डे पर हमला, भारतीय नागरिक की मौत

हम आपको बता दें कि सऊदी अरब में भारतीयों की सुरक्षा को लेकर चिंता उस समय और गहरा गई, जब किंग फहद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हुए हमले में एक भारतीय नागरिक और एक सऊदी नागरिक की मौत हो गई। हमले में दो भारतीयों समेत आठ लोग घायल हुए हैं। घायलों में यमन, बांग्लादेश, नेपाल और सऊदी अरब के नागरिक भी शामिल हैं। उनकी चोटों की गंभीरता अलग-अलग बताई गई है और उन्हें अस्पतालों में उपचार दिया जा रहा है।

भारतीय दूतावास ने मृतक के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की है। दूतावास के अधिकारी अस्पतालों में भर्ती भारतीय नागरिकों से संपर्क बनाए हुए हैं और उनके परिजनों को सहायता उपलब्ध कराने में जुटे हैं। सऊदी नागरिक उड्डयन प्राधिकरण के अनुसार, डम्माम हवाई अड्डे का संचालन दोबारा शुरू हो चुका है और हवाई यातायात सामान्य हो गया है। हालांकि, हमले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि क्षेत्र में नागरिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा अब एक बड़ी चुनौती बन चुकी है।

अरामको के ठिकाने पर खतरा, क्षेत्रीय संघर्ष के व्यापक होने की आशंका

साथ ही संकट का दायरा केवल हवाई यात्रा तक सीमित नहीं है। सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी अरामको ने धहरान स्थित अपने मुख्यालय के शेष कर्मचारियों को अगली सूचना तक घर से काम करने के निर्देश दिए हैं। इससे पहले भी सुरक्षा चिंताओं के कारण गैर-जरूरी कर्मचारियों को कार्यालय से दूर रहने को कहा गया था। हम आपको यह भी बता दें कि शायबह तेल क्षेत्र को निशाना बनाकर किए गए ड्रोन हमले से जुड़े एक अन्य घटनाक्रम में अवरोधित ड्रोन का मलबा गिरने से एक फिलिपीनी और एक नेपाली नागरिक की मौत हुई, जबकि एक भारतीय और एक पाकिस्तानी नागरिक घायल हुए। सऊदी अधिकारियों के मुताबिक, इस घटना से तेल क्षेत्र के संचालन पर असर नहीं पड़ा।

उधर, यमन के हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच बढ़ते टकराव ने क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर आशंकाएं बढ़ा दी हैं। रियाद और मदीना के आसपास ड्रोन संबंधी खतरों तथा सऊदी हवाई रक्षा प्रणालियों द्वारा ड्रोन रोकने की खबरों के बीच नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। सऊदी नागरिक सुरक्षा प्राधिकरण ने रियाद में शुरुआती चेतावनी जारी करते हुए लोगों को इमारतों के भीतर सुरक्षित स्थानों पर रहने और खिड़कियों से दूर रहने को कहा। अमेरिका ने भी बिगड़ते सुरक्षा हालात के कारण गैर-आपातकालीन सरकारी कर्मचारियों और उनके परिवारों को सऊदी अरब छोड़ने का आदेश दिया है। वहीं ब्रिटेन ने अतिरिक्त रक्षात्मक सैन्य सहायता की घोषणा की है, जबकि क्षेत्र में सैन्य तनाव बढ़ने से लाल सागर के समुद्री मार्गों और वैश्विक तेल आपूर्ति पर भी चिंता बढ़ी है।

भारत का स्पष्ट संदेश: नागरिकों और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों पर हमले अस्वीकार्य

इस बीच, भारत ने 21 अक्टूबर को डम्माम हवाई अड्डे और सऊदी अरामको के शायबह तेल क्षेत्र को निशाना बनाकर किए गए हमलों सहित नागरिक और ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमलों की कड़ी निंदा की है। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि नागरिकों की जान लेने वाले और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने वाले ऐसे हमले अस्वीकार्य हैं और इन्हें तत्काल रोका जाना चाहिए। भारत ने सऊदी अरब की संप्रभुता की रक्षा के प्रति एकजुटता जताते हुए क्षेत्र में शांति और सामान्य स्थिति बहाल होने की उम्मीद व्यक्त की है।

इसके साथ ही भारतीय दूतावास ने सऊदी अरब में रह रहे भारतीयों को हवाई हमले की स्थिति में तत्काल निकटतम सुरक्षित स्थान पर जाने, इमारत के भीतर रहने और खिड़कियों से दूर रहने की सलाह दी है। लोगों से हमलों से संबंधित तस्वीरें, वीडियो या संवेदनशील सूचनाएं रिकॉर्ड करने और साझा करने से बचने को भी कहा गया है। हम आपको यह भी बता दें कि एयर इंडिया, एयर इंडिया एक्सप्रेस और इंडिगो ने सऊदी अरब आने-जाने वाली अपनी सेवाएं 24 अक्टूबर तक, जबकि अकासा एयर ने 27 अक्टूबर तक निलंबित रखी हैं। हालांकि, सऊदिया और फ्लाइनास जैसी अन्य एयरलाइंस के जरिए वैकल्पिक उड़ानों के विकल्प उपलब्ध हैं। यात्रियों को रवाना होने से पहले अपनी उड़ान की स्थिति की पुष्टि करने की सलाह दी गई है।

देखा जाये तो संकट की इस घड़ी में सबसे अहम सवाल यही है कि मक्का-मदीना में फंसे प्रत्येक भारतीय की सुरक्षित वापसी कितनी जल्दी सुनिश्चित हो पाती है। मोदी सरकार के सामने चुनौती स्पष्ट है। एक ओर युद्ध जैसे हालात में नागरिकों की सुरक्षा करनी है, दूसरी ओर बाधित उड़ानों के बीच उनकी स्वदेश वापसी की व्यवस्था करनी है। सऊदी अरब में भारत सरकार के प्रयासों की सबसे बड़ी सफलता यही होगी कि वहां फंसा हर भारतीय जायरीन सुरक्षित अपने घर लौट सके।

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