पश्चिम एशिया तनाव के बीच भारत की तेल आपूर्ति सुरक्षित, मंत्री हरदीप सिंह पुरी का बयान

By Ankit Jaiswal | Mar 08, 2026

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत की ऊर्जा आपूर्ति को लेकर उठ रही चिंताओं पर केंद्र सरकार ने स्थिति स्पष्ट की है। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा है कि देश में तेल की आपूर्ति सामान्य रूप से जारी है और नागरिकों की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त व्यवस्था की गई है। मौजूद जानकारी के अनुसार भारत वैकल्पिक समुद्री मार्गों के माध्यम से लगातार कच्चा तेल मंगा रहा है।

मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि देश में ऊर्जा की उपलब्धता, कीमत और स्थिरता को संतुलित बनाए रखने के लिए सरकार लगातार निगरानी कर रही है। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद भारत ने अपने ऊर्जा प्रबंधन को मजबूत रखा है और तेल आयात के प्रवाह में किसी तरह की बड़ी बाधा नहीं आई है।

बता दें कि हाल ही में पश्चिम एशिया में ईरान, अमेरिका और इज़राइल के बीच बढ़े तनाव के कारण कई देशों में ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है। खासतौर पर होरमुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर संभावित खतरे को देखते हुए कई देशों ने वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर ध्यान देना शुरू किया है।

मौजूद जानकारी के अनुसार भारत ने भी पहले से ही अपनी ऊर्जा आपूर्ति के स्रोतों को विविध बनाने की दिशा में काम किया है। इसी कारण वर्तमान परिस्थितियों में देश को तेल आयात में किसी बड़ी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ रहा है। मंत्री ने भरोसा दिलाया कि देश के नागरिकों की ऊर्जा जरूरतें पूरी तरह से पूरी की जा रही हैं और घबराने या किसी तरह की अटकलों की जरूरत नहीं है।

सरकारी सूत्रों ने यह भी बताया है कि तरलीकृत प्राकृतिक गैस की आपूर्ति को लेकर भी स्थिति नियंत्रण में है। कतर की ओर से भारत को भरोसा दिलाया गया है कि जैसे ही समुद्री मार्ग पूरी तरह खुल जाएगा, गैस की आपूर्ति तुरंत फिर से शुरू कर दी जाएगी।

अधिकारियों के मुताबिक फिलहाल भारत के पास तरलीकृत प्राकृतिक गैस का पर्याप्त भंडार मौजूद है। इसके अलावा कई अन्य देशों ने भी भारत को गैस आपूर्ति के प्रस्ताव दिए हैं, जिससे भविष्य में किसी संभावित कमी की स्थिति से निपटना आसान हो सकेगा।

गौरतलब है कि कतर से गैस आपूर्ति में जो अस्थायी बाधा आई है, उसका मुख्य कारण होरमुज़ के आसपास का मौजूदा सुरक्षा माहौल बताया जा रहा है। यह समुद्री मार्ग फारस की खाड़ी को खुले समुद्र से जोड़ता है और दुनिया के तेल तथा गैस व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है।

मौजूद जानकारी के अनुसार हालिया संघर्ष के कारण इस क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई थी। हालांकि सरकारी सूत्रों का कहना है कि हालात धीरे-धीरे सामान्य होने की संभावना है और जल्द ही जहाजों की आवाजाही फिर से शुरू हो सकती है।

अधिकारियों का यह भी कहना है कि ईरान की ओर से यह संकेत दिया गया है कि वह पड़ोसी देशों को तब तक निशाना नहीं बनाएगा जब तक उसके खिलाफ उनके क्षेत्र से हमला नहीं किया जाता। ऐसे संकेतों के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति का प्रवाह जल्द सामान्य हो सकता है।

सरकार का कहना है कि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी ऊर्जा आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं। आयात के स्रोतों में विविधता लाने और वैकल्पिक मार्गों पर ध्यान देने की रणनीति के कारण वर्तमान वैश्विक तनाव के बावजूद देश की ऊर्जा सुरक्षा फिलहाल स्थिर बनी हुई है।

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