By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Nov 01, 2026
ह्यूस्टन, एक नवंबर अमेरिका में चुनाव से पहले भारतीयों के खिलाफ बढ़ती बयानबाजी और आव्रजन संबंधी प्रस्तावित पाबंदियों पर चिंता जताते हुए गैर-लाभकारी संगठन इंडियास्पोरा ने आगाह किया है कि एच-1बी वीजा धारकों को निशाना बनाने से अमेरिकी अर्थव्यवस्था को गंभीर नुकसान हो सकता है। संगठन ने 30 अक्टूबर को जारी एक बयान में भारतीय मूल के पेशेवरों को निशाना बनाने के राजनीतिक प्रयासों पर चिंता व्यक्त की। संगठन ने कहा कि भारतीय मूल के पेशेवर स्वास्थ्य सेवा, प्रौद्योगिकी एवं शिक्षा जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
प्रवासी भारतीयों के इस संगठन ने प्रस्तावित नियामकीय उपायों पर भी चिंता जताई। इनमें उच्च प्रौद्योगिकी और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के नियोक्ताओं के लिए एक लाख अमेरिकी डॉलर से अधिक का याचिका शुल्क लगाने, एच-1बी वीजा के लिए मौजूदा बिना क्रम के लॉटरी प्रणाली की जगह वेतन आधारित चयन व्यवस्था लागू करने और नौकरी गंवाने वाले विदेशी कर्मचारियों को मिलने वाली 60 दिन की रियायत अवधि समाप्त करने के प्रस्ताव शामिल हैं। इसने एच-4 वीजाधारक कर्मचारियों के जीवनसाथियों को जारी किए जाने वाले रोजगार प्राधिकरण दस्तावेज (ईएडी) पर रोक लगाने के प्रस्तावों के साथ-साथ वैकल्पिक व्यावहारिक प्रशिक्षण (ओपीटी) और विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग एवं गणित (एसटीईएम) से संबंधित कार्य अनुमति की अवधि बढ़ाने पर 70,000 अमेरिकी डॉलर तक शुल्क लगाने के प्रस्तावों पर भी चिंता जताई।
इंडियास्पोरा ने कहा कि विदेशी पेशेवर, विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत चिकित्सक और शिक्षक, अमेरिका के उन इलाकों में कार्यबल की कमी दूर करने में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं, जहां घरेलू स्तर पर तत्काल पर्याप्त कर्मचारी उपलब्ध नहीं हैं। इनमें मिसिसिपी डेल्टा जैसे संसाधनों की कमी वाले क्षेत्र भी शामिल हैं। संगठन ने सभी राजनीतिक दलों के नेताओं से भारतीयों के खिलाफ बयानबाजी का विरोध करने की अपील की।
उसने आगाह किया कि अल्पकालिक राजनीतिक लाभ के लिए विदेशी प्रतिभाओं को बलि का बकरा बनाने से अमेरिकी अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंच सकता है और भारत-अमेरिका के रणनीतिक द्विपक्षीय संबंध कमजोर भी हो सकते हैं।