NRC पर दिल्ली में भी मचा घमासान, घुसपैठियों की होगी पहचान!

By अभिनय आकाश | Aug 31, 2019

नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन यानी कि एनआरसी का मामला अब असम और पश्चिम बंगाल के बाद देश की राजधानी दिल्ली पहुंच गया है। दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष मनोज तिवारी ने एनआरसी को दिल्ली में भी लागू कराने की मांग की है। मनोज तिवारी ने कहा है कि दिल्ली में रहने वाले बाहरी लोगों के आधार कार्ड भी बने हुए हैं। असम में सरकार द्वारा जारी एनआरसी पर भारतीय जनता पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष और सांसद मनोज तिवारी ने इस कदम की तारीफ करते हुए दिल्ली में भी इसे लागू करवाने की बात कही है। बता दें कि शनिवार को असम सरकार ने एनआरसी की फाइनल लिस्ट जारी की है। इस पर बात करते हुए मनोज तिवारी ने कहा कि इसकी दिल्ली में भी जरूरत है। उन्होंने कहा, दिल्ली में भी एनआरसी की जरूरत है क्योंकि यहा स्थिति खतरनाक होती जा रही है। घुसपैठिए जो यहां बस गए हैं वे सबसे खतरनाक हैं। हम इसे यहां (दिल्ली) भी लागू करेंगे।

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बीजेपी ये मांग कर रही है कि दिल्ली में एनआरसी लागू हो, क्योंकि दिल्ली में भी बड़ी संख्या में घुसपैठिए रहते हैं। एक अनुमान के मुताबिक दिल्ली में 15 लाख बांग्लादेशी और एक बड़ी संख्या में रोहिंग्या रहते हैं। यहां तक कि समय-समय पर राजनीतिक लाभ के चक्कर में इन्हें राशनकार्ड, वोटर आईडी कार्ड, अहम दस्तावेज और मकान तक मुहैया कराए जाते हैं। असम में एनआरसी के मुद्दे के बाद अब दिल्ली में भी ये मुद्दा गर्म है। दिल्ली के शाहीन बाग के पास श्रम विहार में रोहिंग्या का सबसे बड़ा कैंप है और एक रिपोर्ट के मुताबिक यहां करीब 250 रोहिंग्या परिवार रहते हैं। 1000 से भी ज्यादा झुग्गियों वाले इस कैंप में सिर्फ रोहिंग्या ही नहीं बांग्लादेशी और अलग-अलग राज्यों के लोग भी रहते हैं। कोई चार महीने तो कोई सालों से यहां रह रहे रोहिंग्या का दूसरा बड़ा कैंप कालिंदी कुंज में है। यहां रोहिंग्या के करीब 47 परिवार रहते हैं। 

दिल्ली में बढ़ती रोहिंग्याओं और बांग्लादेशियों की संख्या

दिल्ली में डेढ़ लाख से भी ज्यादा हो सकती है बांग्लादेशियों की संख्या। दिल्ली पुलिस के लिए अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों की समस्या कोई नई समस्या नहीं है। दिल्ली पुलिस के लिए अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी सिर का दर्द बन गए हैं। कई बार दिल्ली पुलिस ने ऐसे अपराधियों को गिरफ्तार किया है जिनकी पहचान करने पर पता चला कि वो शख्स बांग्लादेशी है लेकिन हैरान करने वाली बात ये है कि दिल्ली में रह रहे बांग्लादेशियों ने आधार कार्ड तक बनवा लिया है। दिल्ली पुलिस के मुताबिक यहां अवैध रुप से रह रहे बांग्लादेशी दिल्ली में चोरी, स्नैचिंग और लूट जैसी वारदातों में शामिल रहते हैं। दिल्ली में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी फर्जी दस्तावेज बनाकर खुद को भारतीय तक कहने लगे हैं। 

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दिल्ली में कैसे पहुंचे बांग्लादेशी, किन इलाकों को बनाया ठिकाना

पुलिस आधिकारियों के मुताबिक बांग्लादेशी लोग अवैध तरीके से बार्डर क्रास करके पश्चिम बंगाल की सीमाओं में दाखिल होते हैं। कुछ समय बाद पश्चिम बंगाल में रहकर नाम और पहचान बदलकर अपना पहचान पत्र बनवा लेते हैं और काम की तलाश में दिल्ली और अलग-अलग राज्यों में चले आते हैं। दिल्ली में सीमापुरी, लोनी, आउटर दिल्ली, विकासपुरी, सनलाइट कालोनी, ओखला, मुखर्जी नगर, जैसे इलाकों में ये लोग रहते हैं।

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