Byju's Founder रवींद्रन को Singapore कोर्ट से झटका, 6 महीने की जेल, संकट में Ed-Tech Empire

By Ankit Jaiswal | May 29, 2026

एक समय ऐसा था जब देश की सबसे चर्चित शिक्षा प्रौद्योगिकी कंपनियों में गिनी जाने वाली बायजूज़ को भारत के नए दौर की सफलता की मिसाल माना जाता था। कोरोना महामारी के दौरान ऑनलाइन पढ़ाई की बढ़ती मांग ने कंपनी को आसमान तक पहुंचा दिया था। लेकिन अब वही कंपनी भारी कर्ज, कानूनी विवादों और आर्थिक संकट से जूझ रही है। हालात इतने खराब हो चुके हैं कि कभी 22 अरब डॉलर मूल्यांकन वाली कंपनी की स्थिति अब शून्य से भी नीचे बताई जा रही है।

बता दें कि यह मामला कतर निवेश प्राधिकरण से जुड़ी एक इकाई द्वारा दायर किया गया था। आरोप है कि बायजू रवींद्रन ने अपनी संपत्तियों से जुड़े जरूरी दस्तावेज अदालत के सामने पेश नहीं किए। अदालत ने उन्हें 90 हजार सिंगापुर डॉलर यानी करीब 67 लाख रुपये कानूनी खर्च के रूप में जमा करने और कंपनी से जुड़े स्वामित्व के दस्तावेज देने का आदेश भी दिया है।

हालांकि बायजू रवींद्रन ने इन आरोपों को धोखाधड़ी से जुड़ा मामला मानने से इनकार किया है। उनका कहना है कि यह केवल प्रक्रिया से जुड़ा विवाद है और उन्होंने कोई गलत काम नहीं किया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि निवेशकों और कर्जदाताओं के साथ समझौते की बातचीत अंतिम चरण में पहुंच चुकी है और वह इस फैसले के खिलाफ अपील करेंगे।

गौरतलब है कि बायजू रवींद्रन अभी भी अपनी कंपनी को दोबारा खड़ा करने का भरोसा जता रहे हैं। उनके करीबी लोगों का कहना है कि वह भारत लौटने की योजना बना रहे हैं और उन्हें विश्वास है कि एक बड़ा बदलाव कंपनी को फिर से संभाल सकता है।

मौजूद जानकारी के अनुसार वर्ष 2019 से 2022 के बीच कंपनी ने कई बड़ी कंपनियों का अधिग्रहण किया। इनमें आकाश एजुकेशनल सर्विसेज, व्हाइटहैट जूनियर, एपिक, टॉपर, ग्रेट लर्निंग और ओस्मो जैसी कंपनियां शामिल थीं। इन सौदों पर अरबों डॉलर खर्च किए गए, लेकिन कई अधिग्रहण उम्मीद के मुताबिक सफल नहीं हो सके।

गौरतलब है कि महामारी खत्म होने के बाद ऑनलाइन पढ़ाई की मांग तेजी से घट गई। स्कूल और कोचिंग संस्थान फिर से खुलने लगे, जिससे कंपनी की आमदनी पर असर पड़ा। दूसरी ओर विज्ञापन, अधिग्रहण और विस्तार पर खर्च लगातार बढ़ता गया। एक समय कंपनी को एक साल में 4588 करोड़ रुपये तक का भारी घाटा हुआ था।

कंपनी पर आक्रामक बिक्री रणनीति अपनाने के आरोप भी लगे। कई अभिभावकों ने शिकायत की कि उन्हें कोर्स खरीदने के लिए दबाव डाला गया। आसान किस्तों और भविष्य के बड़े दावों के जरिए परिवारों को महंगे पैकेज बेचने की कोशिश की गई। कई लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि कोर्स उम्मीद के मुताबिक नहीं निकले और पैसे वापसी में भी परेशानियां हुईं।

कंपनी के कई पूर्व कर्मचारियों ने भी कठिन परिस्थितियों का जिक्र किया है। बताया जाता है कि कर्मचारियों पर लगातार लक्ष्य पूरा करने का दबाव रहता था और कई लोग रोजाना 14 से 15 घंटे तक काम करने को मजबूर थे। बाद में अचानक वेतन रुकने और नौकरी जाने की घटनाएं भी सामने आईं।

गौरतलब है कि कंपनी के ऊपरी प्रबंधन और आम कर्मचारियों के बीच हालात में बड़ा अंतर दिखाई दिया। जहां वरिष्ठ अधिकारियों पर निजी संपत्ति बचाने के आरोप लगे, वहीं निचले स्तर के कर्मचारी आर्थिक संकट से जूझते रहे हैं।

बायजूज़ इस समय भारत और विदेशों में कई कानूनी मामलों का सामना कर रही है। कंपनी पर फंड के गलत इस्तेमाल और वित्तीय गड़बड़ी जैसे आरोप लगे हैं। हालांकि बायजू रवींद्रन और उनकी टीम इन आरोपों से इनकार करती रही है। उनका कहना है कि महामारी के बाद बाजार में आए बदलाव और निवेशकों के दबाव ने कंपनी की स्थिति बिगाड़ी है।

बता दें कि कभी भारत की सबसे मूल्यवान नई कंपनी मानी जाने वाली बायजूज़ का पतन अब देश के कारोबारी जगत में एक बड़ी चेतावनी के तौर पर देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि बिना मजबूत व्यवस्था और संतुलित योजना के तेज विस्तार किसी भी बड़ी कंपनी को संकट में डाल सकता है।

अब सबकी नजर इस बात पर टिकी हुई है कि क्या बायजू रवींद्रन अपनी कंपनी को दोबारा खड़ा कर पाएंगे या फिर यह कहानी भारतीय नई कंपनियों के इतिहास में सबसे बड़े पतन के रूप में याद की जाएगी।

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