बुद्धिजीवियों ने ही कहना है (व्यंग्य)

By संतोष उत्सुक | Sep 01, 2021

हमारे अड़ोस पड़ोस और दूर दराज में इतना कुछ होता रहता है और सोशल मीडिया के जागरूक जीवी अपने त्वरित उदगार, विचार मनपसंद दीवारों पर चिपका देने में देर नहीं करते। उनकी कुशाग्र बुद्धि उन्हें हर लम्हा सक्रिय रखती है। उधर अखबारों के पन्नों पर अमुक विषय पर विचार प्रकट करवाने हों तो चर्चाएं आयोजित होती हैं जिनमें आम तौर पर पारम्परिक बुद्धिजीवी ही प्रकट होते हैं। ये लोग टीवी चर्चा वाले हर विषय के वही विशेषज्ञ जैसे तो नहीं होते हां समाजजीवियों के परिचित ज़रूर होते हैं। कुछ ख़ास किस्म के लोगों को ही बुद्धिजीवी माना जाता है। शहर या क्षेत्र में छोटा मोटा गलत घट रहा हो, गर्मी के मौसम पानी न आ रहा हो, बरसात के मौसम में सड़कों में दर्जनों खड्डे पड़ चुके हों, महंगाई घट न रही हो तो बुद्धिजीवियों संग उपायउगाऊ परिचर्चा की जाती है।

इसे भी पढ़ें: खुश तो बहुत होगे तुम (व्यंग्य)

कुछ बुद्धिजीवी स्वादिष्ट ब्यान देने में माहिर होते हैं इसलिए, आम तौर पर उनको परिचर्चा में शामिल किया जाता है। समझ में नहीं आता कि हमारे विकास पसंद, सभ्य होते जा रहे समाज में और लोग भी तो हैं। क्या वे अबुद्धिजीवी हैं या उनकी बोलती बंद है। ज्यादा पढने लिखने से तो व्यक्ति ज़्यादा बुद्धिवाला माना जाता है, वह खूब कमाता है बढ़िया खाता है लेकिन वह डरपोक हो जाता है। वास्तव में उसकी बुद्धि हीनता बढ़ती जाती है। बुद्धिजीवी सलीके और समझदारी से शब्द चुन चुनकर विचार प्रकट करने में ही रह जाते हैं उधर अबुद्धिजीवी काम कर या करवाकर विजयी संतुष्ट मुद्रा में मुस्कुराते रहते हैं । 

असली बुद्धिजीवी तो वह होते हैं जिनसे किसी की भी, कुछ भी पूछने की हिम्मत नहीं होती। वही उचित बुद्धि को जन्म देते हैं पालते हैं और समाज में बांटते हैं। क्या अबुद्धिजीवी ही खालिस बुद्धिजीवी नहीं हैं।  

- संतोष उत्सुक

प्रमुख खबरें

North India Weather Alert | दिल्ली में भारी बारिश का अनुमान, IMD ने जारी किया रेड अलर्ट, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड समेत 5 राज्यों में भी भारी वर्षा की चेतावनी

Explained- US Visa Fee Hike | ट्रंप प्रशासन का H-1B वीज़ा फ़ीस $1,00,000 करने का प्रस्ताव: भारतीय पेशेवरों पर क्या होगा असर?

Women Empowerment In Defense | देश में पहली बार... NSG में महिला कर्मियों के लिए ‘कमांडो कन्वर्जन कोर्स’ की शुरुआत

Rahul Gandhi ने Devendra Fadnavis को लिखा पत्र, आदिवासी छात्रों की मांग उठाई