International Court ने सूडानी मिलिशिया नेता को 20 साल की सजा सुनाई

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Dec 10, 2025

अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय ने मंगलवार को खूंखार सूडानी जंजावीद मिलिशिया के एक नेता को 20 साल से भी अधिक समय पहले दारफुर में हुए विनाशकारी संघर्ष के दौरान किए गए युद्ध अपराधों और मानवता के विरुद्ध अपराधों के लिए 20 साल कारावास की सजा सुनाई।

अभियोजक जूलियन निकोल्स ने नवंबर में सजा पर सुनवाई के समय न्यायाधीशों से कहा, ‘‘उसने ये अपराध जानबूझकर, स्वेच्छा से और जैसा कि सबूत दिखाते हैं, पूरी बर्बरता के साथ किए।’’

इस दौरान 76 वर्षीय अली मुहम्मद अब्द-अल-रहमान खड़ा होकर दलीलें सुनता रहा, लेकिन पीठासीन न्यायाधीश जोआना कोर्नर द्वारा सजा सुनाए जाने पर उसने कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की। उसे अलग-अलग मामलों में आठ वर्ष से लेकर 20 वर्ष तक की सजा सुनाई गई, जिसके बाद अदालत ने उसे 20 वर्ष की संयुक्त सजा सुनाई।

न्यायाधीश ने कहा कि अब्द-अल-रहमान ने न केवल उन हमलों के आदेश दिए, जिनसे सीधे तौर पर अपराध हुए बल्कि उनमें मुख्य रूप से फर कबीले के सदस्यों को निशाना बनाया गया था। उनके मुताबिक, अधिकारियों को फर कबीला पर विद्रोहियों का समर्थन करने का संदेह था। उन्होंने कहा कि रहमान ने अपनी कुल्हाड़ी से कुछ कैदियों पर हमले को व्यक्तिगत रूप से भी अंजाम दिया।

अदालत के अभियोजन कार्यालय ने कहा कि उसके कर्मी सज़ा सुनाए जाने वाले फ़ैसले का अध्ययन करेंगे और यह तय करेंगे कि ‘‘आगे की कार्रवाई की जाए या नहीं।’’ कार्यालय सज़ा के ख़िलाफ़ अपील कर सकता है और आजीवन कारावास की अपनी अपील को दोहरा सकता है।

कार्यालय ने एक लिखित बयान में कहा कि उसने रहमान को दोषी ठहराए गए अपराधों की अत्यधिक गंभीरता के कारण आजीवन कारावास की सजा की मांग की है जिनमें हत्या, बलात्कार, यातना, उत्पीड़न और अन्य अपराध शामिल हैं जो उसने खुद किए थे और इन्हें करने का दूसरों को आदेश दिया था।

बयान के मुताबिक, इसने बच्चों समेत कम से कम 213 लोगों की हत्या, 16 महिलाओं के साथ बलात्कार की घटनाओं को भी संज्ञान में लिया। सूडान के दारफुर क्षेत्र में अत्याचारों के लिए आईसीसी द्वारा दोषी ठहराया गया रहमान पहला व्यक्ति है। न्यायाधीशों ने माना कि जंजावीद द्वारा किए गए अपराध विद्रोह को कुचलने की सरकार की योजना का हिस्सा था।

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