By कमलेश पांडे | Jul 01, 2026
भारत और सेशेल्स के बीच हाल के वर्षों में विकसित हुए द्विपक्षीय संबंध केवल आर्थिक और सामरिक सहयोग तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनके व्यापक अंतरराष्ट्रीय निहितार्थ भी हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया सेशेल्स दौरे से इस बात को और भी बल मिला है। अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक विश्लेषक बताते हैं कि भारत–सेशेल्स संबंध केवल द्विपक्षीय मैत्री का उदाहरण नहीं हैं, बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र की सुरक्षा, शक्ति-संतुलन, समुद्री व्यापार, जलवायु सहयोग और भारत की वैश्विक रणनीतिक भूमिका को सुदृढ़ करने वाले महत्वपूर्ण संबंध हैं।
पहला, हिंद महासागर में भारत की रणनीतिक स्थिति मजबूत: सेशेल्स हिंद महासागर में एक अत्यंत महत्वपूर्ण द्वीपीय राष्ट्र है। इसलिए भारत के साथ इसकी बढ़ती साझेदारी से भारत की समुद्री सुरक्षा, निगरानी क्षमता और समुद्री मार्गों की सुरक्षा को मजबूती मिलती है। इससे हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक उपस्थिति और प्रभाव बढ़ता है।
दूसरा, चीन के बढ़ते प्रभाव का संतुलन: हिंद महासागर क्षेत्र में चीन के बढ़ते निवेश और सामरिक विस्तार के बीच सेशेल्स के साथ भारत के मजबूत संबंध क्षेत्रीय शक्ति-संतुलन बनाए रखने में सहायक हैं। इससे छोटे द्वीपीय देशों के पास विविध साझेदारों के साथ सहयोग के विकल्प भी बने रहते हैं।
तीसरा, समुद्री सुरक्षा और आतंकवाद-रोधी सहयोग: दोनों देशों के बीच समुद्री डकैती, अवैध मछली पकड़ने, मादक पदार्थों की तस्करी और समुद्री आतंकवाद के विरुद्ध सहयोग बढ़ा है। इससे पूरे हिंद महासागर क्षेत्र की सामूहिक समुद्री सुरक्षा को लाभ मिलता है।
चौथा, SAGAR नीति को मजबूती: भारत की Security and Growth for All in the Region (SAGAR) नीति को सेशेल्स के साथ सहयोग से व्यावहारिक आधार मिलता है। यह नीति क्षेत्रीय देशों की सुरक्षा और साझा विकास पर बल देती है।
पांचवीं, ब्लू इकोनॉमी में सहयोग: सेशेल्स की अर्थव्यवस्था समुद्री संसाधनों पर आधारित है। भारत समुद्री जैव संसाधन, मत्स्य पालन, समुद्री अनुसंधान और सतत विकास के क्षेत्रों में सहयोग कर रहा है, जिससे दोनों देशों के आर्थिक संबंध मजबूत हो रहे हैं।
छठा, जलवायु परिवर्तन पर साझेदारी: समुद्र-स्तर में वृद्धि और जलवायु परिवर्तन से छोटे द्वीपीय देशों को गंभीर खतरा है। भारत और सेशेल्स इस विषय पर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सहयोग करते हैं और जलवायु न्याय तथा टिकाऊ विकास की वकालत करते हैं।
सातवां, हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) रणनीति में महत्व:
भारत का मुक्त, समावेशी और नियम-आधारित हिंद-प्रशांत दृष्टिकोण सेशेल्स जैसे साझेदार देशों के सहयोग से अधिक प्रभावी बनता है। इससे क्षेत्र में स्थिरता और नियम-आधारित समुद्री व्यवस्था को बढ़ावा मिलता है।
आठवां, भारत की वैश्विक कूटनीति को बल: सेशेल्स जैसे छोटे लेकिन रणनीतिक देशों के साथ मजबूत संबंध भारत की वैश्विक दक्षिण (Global South) में विश्वसनीय साझेदार की छवि को मजबूत करते हैं तथा संयुक्त राष्ट्र सहित विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सहयोग बढ़ाते हैं।
निष्कर्षतः यह कहा जा सकता है कि भारत–सेशेल्स संबंध केवल द्विपक्षीय मैत्री का उदाहरण नहीं हैं, बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र की सुरक्षा, शक्ति-संतुलन, समुद्री व्यापार, जलवायु सहयोग और भारत की वैश्विक रणनीतिक भूमिका को सुदृढ़ करने वाले महत्वपूर्ण संबंध हैं। भविष्य में रक्षा, डिजिटल प्रौद्योगिकी, ब्लू इकोनॉमी और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ने से इन संबंधों का अंतरराष्ट्रीय महत्व और अधिक बढ़ने की संभावना है।
- कमलेश पांडेय
वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक