By संतोष उत्सुक | Jan 20, 2022
कई तरह की मेहनत से उन्हें पुलिस में नौकरी मिली। कठोर प्रशिक्षण के बाद सौभाग्य और सुप्रयासों से पहली पोस्टिंग अपने शहर में हो गई। यार दोस्तों संग शानदार पार्टी का आयोजन हुआ। पुलिस की वर्दी पहनकर अच्छा लगने लगा था। अनुशासन भरी नई नौकरी के उत्साह में लिपटी नयी नयी वर्दी में ड्यूटी निभाने का जूनून उमड़ रहा था। कुछ दिनों बाद ट्रैफिक नाके पर ड्यूटी लगी। पहला बंदा रोककर बोले, पेपर्ज़ दिखाओ। बंदा मुस्कुराते हुए बोला, हमने आज तक नहीं दिखाए। घर पर संभाल कर रखे हैं। वर्दी ने समझाया, कागज़ आपको साथ रखने चाहिए, आप चाहें तो मोबाइल में रख सकते हो। वो तो तब हो सके जब हम रखना चाहें, जवाब मिला। आपका चालान होगा। आज तक तो हुआ नहीं, हमारी बीवी इस वार्ड की कमीशनर है। प्रदेश में सरकारजी हमारी हैं। किसी से बात करवा दूं आपकी। चालान कर सकने वाले समझ गए कि गहन प्रशिक्षण के बावजूद इनका चालान नहीं कर सकते।
व्यावसायिक प्रशिक्षण को व्यवहारिक शिक्षा मिलने लगी कि शासक वर्ग से अच्छे संबंध रखने वालों का चालान नहीं कर सकते, इनसे पैसे निकलवाना मुश्किल है। संभावित चालान करवाने वाला एक और बंदा, पुराना सा स्कूटर लेकर आ रहा था, रोका तो अचानक स्कूटर बंद हो गया और स्टार्ट नहीं हो पाया। इस बीच कमियां नोट कर उसे बताया गया कि आपके तीन चालान हैं, चार हज़ार पांच सौ रूपए। इतने पैसे उसके पास नहीं थे तो समझदार स्कूटर सवार ने अपने पापा से बात की, उन्होंने कहा कि इतनी कीमत का तो स्कूटर भी नहीं है तुम स्कूटर को वहीं छोड़ आओ। वाहन चालक ने सख्त प्रशिक्षण वाले से कहा कि आप ये स्कूटर ही रख लो और वह वहां से खिसक गया। कुछ क्षण बाद नई वर्दी वाला, गहन मुद्रा में पहुंचकर सोचने लगा कि पहला चालान अपना ही काट लेता हूं ताकि शुरुआत तो हो।
कुछ देर बाद, एक बहुत ज़्यादा आम आदमी को वहां से गुजरना ही था। उसे रुकने का इशारा हुआ। उसने बड़े सलीके से अपना पुराना स्कूटर रोका और स्टैंड पर लगा दिया। उसके कागज़ात चैक किए गए जो पूरे और दरुस्त पाए गए लेकिन चालान काटने के लिए तो छोटी सी कमी भी काफी होती है। चालान काटने से पहले आम आदमी से पूछा गया, आपके कोई जानने वाले हैं जिनसे आप बात करवाएंगे। आम आदमी ने कहा, जी नहीं। तो फिर आपका चालान होगा, आम आदमी ने कहा, कृपया ज़रूर करें मैं इसी लायक हूं।
- संतोष उत्सुक