Iran ने लिया Ali Larijani की मौत का बदला, दहल उठा पूरा Israel, बेरूत से बगदाद तक भी जमकर हो रहा युद्ध

By नीरज कुमार दुबे | Mar 18, 2026

मध्य पूर्व में युद्ध की आग अब केवल क्षेत्रीय नहीं रही, बल्कि यह पूरी दुनिया को अपनी चपेट में लेने की दिशा में तेजी से बढ़ रही है। हालात इतने भयावह हो चुके हैं कि ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने साफ चेतावनी दे दी है कि इस संघर्ष के वैश्विक प्रभाव अब शुरू हो चुके हैं और यह किसी की दौलत, धर्म या नस्ल नहीं देखेगा। यह बयान आने वाले भयंकर संकट की खुली घोषणा है।

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ईरानी सेना प्रमुख आमिर हातमी ने साफ कहा है कि यह तो केवल शुरुआत है और लारिजानी के खून का बदला ऐसा लिया जाएगा जिसे दुश्मन कभी नहीं भूल पाएगा। दूसरी ओर ईरान के शीर्ष कमांडर अली अब्दुल्लाही ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को खुली धमकी देते हुए कहा है कि उन्हें ऐसे सरप्राइज का इंतजार करना चाहिए जो उनकी कल्पना से भी ज्यादा विनाशकारी होगा।

इधर अमेरिका ने भी आक्रामक रुख अपनाते हुए ईरान के होरमुज जलडमरूमध्य के पास स्थित भूमिगत मिसाइल ठिकानों पर पांच हजार पाउंड के भारी बम गिराए। अमेरिकी सेना का दावा है कि इन ठिकानों से अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी को खतरा था। लेकिन इस हमले ने स्थिति को और विस्फोटक बना दिया है।

हम आपको बता दें कि जमीन पर हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं। इजराइल के मध्य हिस्सों पर ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल हमलों में कम से कम दो लोगों की मौत हो चुकी है और कई घायल हैं। तेल अवीव के आसपास दहशत का माहौल है।

केवल इजराइल ही नहीं, बल्कि पूरा क्षेत्र इस युद्ध की चपेट में आ चुका है। बगदाद में अमेरिकी दूतावास के आसपास रॉकेट और ड्रोन हमले फिर शुरू हो गए हैं। संयुक्त अरब अमीरात में ऑस्ट्रेलिया के सैन्य मुख्यालय के पास ईरानी मिसाइल गिरने से स्थिति और गंभीर हो गई है।

लेबनान की राजधानी बेरूत भी अब सुरक्षित नहीं रही। इजराइली हमलों में कम से कम छह लोगों की मौत और चौबीस लोग घायल हो चुके हैं। आवासीय इलाकों पर हो रहे हमले इस युद्ध को और अमानवीय बना रहे हैं।

सऊदी अरब ने भी एक बैलिस्टिक मिसाइल को मार गिराने का दावा किया है जो प्रिंस सुल्तान एयर बेस को निशाना बना रही थी। यह एयर बेस अमेरिकी सैन्य गतिविधियों का प्रमुख केंद्र है। उधर, इजराइल ने लेबनान में जबरन खाली कराने के आदेशों का दायरा और बढ़ा दिया है। अब लोगों को जाह्रानी नदी के उत्तर में जाने के लिए कहा गया है। नार्वेजियन रिफ्यूजी काउंसिल के अनुसार यह आदेश अब लेबनान के लगभग चौदह प्रतिशत क्षेत्र को कवर कर चुका है। यह बड़े पैमाने पर विस्थापन का संकेत है।

अमेरिका के भीतर भी इस युद्ध को लेकर चिंता बढ़ रही है। खुफिया अधिकारी कांग्रेस के सामने पेश होने वाले हैं जहां उनसे ईरान युद्ध और घरेलू सुरक्षा खतरों पर तीखे सवाल पूछे जाएंगे। एक अमेरिकी हमले में कथित रूप से एक प्राथमिक विद्यालय पर हमला हुआ जिसमें एक सौ पैंसठ से अधिक लोगों की मौत की खबर ने ट्रंप सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया है।

दूसरी ओर, इस युद्ध का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी साफ दिखाई देने लगा है। उर्वरक की कीमतों में भारी उछाल आया है जिससे अमेरिकी किसान परेशान हैं। होरमुज जलडमरूमध्य में बाधा के कारण तेल और गैस आपूर्ति प्रभावित हो रही है। उल्लेखनीय है कि दुनिया के लगभग बीस प्रतिशत तेल का रास्ता यही है। स्थिति इतनी विकट हो चुकी है कि अब यह कहना गलत नहीं होगा कि यह संघर्ष केवल ईरान और इजराइल तक सीमित नहीं रहेगा। यह एक ऐसा तूफान बन चुका है जो पूरी दुनिया को हिला सकता है। आने वाले दिन और भी खतरनाक संकेत दे रहे हैं, और अगर हालात नहीं संभले तो यह युद्ध वैश्विक संकट में बदल सकता है।

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