Iran ने खोल दी UN की पोल! Sholay के Thakur वाला मीम बनाकर उड़ाया संयुक्त राष्ट्र का मजाक

By नीरज कुमार दुबे | Sep 30, 2026

भारत में ईरानी दूतावास ने संयुक्त राष्ट्र की भूमिका पर तीखा तंज कसते हुए बॉलीवुड की लोकप्रिय फिल्म ‘शोले’ के ठाकुर का सहारा लिया है। दूतावास ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर साझा किए गए एक मीम में संयुक्त राष्ट्र की कागजी ताकत और वास्तविक परिस्थितियों में उसकी सीमित कार्रवाई के बीच अंतर दिखाने की कोशिश की। देखा जाये तो यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब पश्चिम एशिया में अमेरिका-ईरान तनाव और सैन्य संघर्ष के बीच संयुक्त राष्ट्र की प्रभावशीलता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

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देखा जाये तो ईरान की यह नाराजगी केवल व्यंग्य तक सीमित नहीं है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान महासचिव अंतोनियो गुतारेस से मुलाकात में अमेरिका और इजराइल के खिलाफ ईरान के आरोपों को दोहराया। ईरान ने कहा कि अमेरिका और इजराइल की कार्रवाइयां अंतरराष्ट्रीय कानून तथा संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन हैं। अराघची ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के संस्थापक सदस्यों में शामिल ईरान को उम्मीद है कि संगठन और उसके सदस्य ऐसे कथित उल्लंघनों पर चुप नहीं रहेंगे। उन्होंने अमेरिका की कथित हस्तक्षेपकारी कार्रवाइयों और ईरान के खिलाफ कथित “अवैध धमकियों” की स्पष्ट निंदा की मांग भी की।

हम आपको यह भी बता दें कि ईरानी पक्ष ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की भूमिका पर भी सवाल उठाया है। तेहरान का आरोप है कि सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य अमेरिका की कार्रवाइयों के सामने संगठन प्रभावी प्रतिक्रिया देने में असफल रहा है। दूसरी ओर, गुतारेस ने बैठक में संयुक्त राष्ट्र चार्टर के मूल सिद्धांतों के उल्लंघन, विशेषकर शक्तिशाली देशों द्वारा बल प्रयोग, पर चिंता जताई और सभी देशों से अंतरराष्ट्रीय कानून तथा कूटनीति के रास्ते विवाद सुलझाने का आग्रह किया।

देखा जाये तो इस पूरे घटनाक्रम में ईरान की सोशल मीडिया आधारित कूटनीति भी चर्चा में है। ईरानी दूतावास पहले भी अमेरिका और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों पर व्यंग्य करने के लिए मीम, लोकप्रिय संस्कृति और हास्य का इस्तेमाल करते रहे हैं। ‘शोले’ के ठाकुर का चुनाव खास तौर पर भारत के दर्शकों के लिए संदेश को अधिक परिचित और प्रभावी बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा सकता है। दिलचस्प बात यह है कि संयुक्त राष्ट्र की आलोचना केवल ईरान तक सीमित नहीं है। ट्रंप भी लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र की संघर्षों को सुलझाने की क्षमता पर सवाल उठाते रहे हैं। ऐसे में ईरान का यह मीम पश्चिम एशिया के मौजूदा संघर्ष से आगे बढ़कर उस बड़े सवाल को सामने रखता है कि जब वैश्विक शक्तियां सीधे किसी विवाद में शामिल हों, तब संयुक्त राष्ट्र अपने चार्टर में निर्धारित शांति और सुरक्षा की भूमिका को वास्तव में कितनी प्रभावी ढंग से निभा सकता है।

दूसरी ओर, ईरान-अमेरिका संघर्ष पर ताजा रिपोर्टों की बात करें तो आपको बता दें कि युद्धविराम को लेकर कूटनीतिक गतिविधियां तेज हैं, लेकिन स्थिति अभी भी अनिश्चित बनी हुई है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि तेहरान को अमेरिका की ओर से उसके सात दिन के युद्धविराम प्रस्ताव पर औपचारिक जवाब मिलने की उम्मीद है। इस प्रस्ताव में युद्धविराम के साथ चरणबद्ध तरीके से होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की योजना शामिल है। अराघची के अनुसार यह प्रस्ताव कतर के माध्यम से अमेरिका तक पहुंचाया गया है। दूसरी ओर, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने माना है कि हाल के दिनों में मध्यस्थों के जरिए अमेरिकी और ईरानी प्रतिनिधियों के बीच बातचीत हुई है, लेकिन उन्होंने कहा कि अमेरिका ने ईरान को कोई रियायत देने की पेशकश नहीं की है। वहीं ईरान के वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी मोहसिन रेजाई ने ट्रंप पर निशाना साधते हुए कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति युद्ध और बातचीत के बीच “उलझे” हुए हैं। हालांकि ट्रंप पहले ही ईरान के सात सूत्रीय प्रस्ताव को सार्वजनिक रूप से खारिज कर चुके हैं, इसलिए आगे की बातचीत पर अनिश्चितता बनी हुई है।

इसी बीच, अमेरिका ने ईरान पर आर्थिक दबाव और बढ़ा दिया है। अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने ईरानी सैन्य आपूर्ति तंत्र की कथित मदद करने वाले ईरान, चीन के बीजिंग, हांगकांग और पाकिस्तान से जुड़े दस व्यक्तियों और कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए हैं। ये कार्रवाई ट्रंप प्रशासन के “ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट” के तहत की गई है, जिसका उद्देश्य ईरान की सैन्य और आर्थिक आपूर्ति श्रृंखला को कमजोर करना है। दूसरी तरफ होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद रहने का असर अब क्षेत्रीय ऊर्जा व्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। इराक ने ईंधन की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए सीरिया के बनियास बंदरगाह के रास्ते पेट्रोल मंगाना शुरू कर दिया है। युद्ध से पहले दुनिया के व्यापारिक तेल और गैस का लगभग पांचवां हिस्सा इसी जलमार्ग से गुजरता था। जलडमरूमध्य बंद होने से ईंधन कीमतों पर दबाव बढ़ा है और कई देश वैकल्पिक आपूर्ति मार्ग तलाश रहे हैं। इस तरह एक ओर युद्धविराम के लिए पर्दे के पीछे बातचीत चल रही है, वहीं दूसरी ओर प्रतिबंध, सैन्य दबाव और ऊर्जा संकट ने अमेरिका-ईरान संघर्ष को और जटिल बना दिया है।

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