By Ankit Jaiswal | Feb 26, 2026
भारत और ईरान के रिश्ते लंबे समय से रणनीतिक सहयोग पर आधारित रहे हैं, लेकिन इस बार चाबहार पोर्ट को लेकर आई खबर ने दोनों देशों के बीच चर्चा को तेज कर दिया है। अब्बास अराघची ने कहा है कि इस साल भारत द्वारा चाबहार परियोजना के लिए बजट आवंटन न करना निराशाजनक है।
बता दें कि चाबहार पोर्ट ईरान के दक्षिण-पूर्वी सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में स्थित एक रणनीतिक बंदरगाह है, जिसे भारत के सहयोग से विकसित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक सीधा व्यापार मार्ग उपलब्ध कराना है, जिससे पाकिस्तान को बायपास किया जा सके।
मौजूद जानकारी के अनुसार 2024 में समझौता होने के बाद यह पहला अवसर है जब भारत के केंद्रीय बजट में इस परियोजना के लिए कोई राशि आवंटित नहीं की गई है। इससे पहले हर वर्ष लगभग 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया जाता रहा है।
गौरतलब है कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर भी इस परियोजना पर पड़ रहा है। पिछले वर्ष अमेरिका ने ईरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए थे, हालांकि भारत को चाबहार में अपनी भागीदारी जारी रखने के लिए छह महीने की छूट दी गई थी। यह छूट 26 अप्रैल को समाप्त होने वाली है।
ईरान के विदेश मंत्री ने कहा कि यदि इस बंदरगाह का पूर्ण विकास होता है तो यह भारत के लिए मध्य एशिया और यूरोप तक पहुंचने का सबसे प्रभावी ट्रांजिट मार्ग बन सकता है। उनके मुताबिक यह परियोजना क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को नई दिशा दे सकती है।
इस बीच भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने हाल ही में पुष्टि की थी कि चाबहार से जुड़े मुद्दों पर अमेरिका के साथ सक्रिय संवाद जारी है।
कुल मिलाकर चाबहार पोर्ट केवल एक बुनियादी ढांचा परियोजना नहीं, बल्कि भारत की क्षेत्रीय रणनीति और भू-राजनीतिक संतुलन का अहम हिस्सा है, जिस पर आने वाले महीनों में होने वाले कूटनीतिक फैसलों की नजर टिकी हुई हैं।