Minab के मासूमों की तस्वीरों के जरिये Iran ने किया US पर भावनात्मक वार, वार्ता के लिए पाक पहुँचे JD Vance

By नीरज कुमार दुबे | Apr 11, 2026

ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागर कालीबाफ की इस्लामाबाद यात्रा कोई साधारण सफर नहीं थी, यह एक उड़ान नहीं बल्कि मासूम बच्चों के खून से उठी चीखों का कारवां था। विमान की हर सीट पर रखी मिनाब में मारे गए बच्चों की तस्वीरें सिर्फ यादें नहीं थीं, वे दुनिया की खामोशी पर तमाचा थीं। हर तस्वीर जैसे सवाल कर रही थी कि आखिर इन मासूम जिंदगियों का कसूर क्या था। यह दृश्य सिर्फ भावुक नहीं बल्कि गुस्से से भरा हुआ एक खुला इल्जाम था, यह एक ऐसी पुकार थी जो बताती है कि यह वार्ता अब महज बातचीत नहीं, बल्कि इंसाफ की जंग बन चुकी है।

ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागर कालीबाफ जब इस्लामाबाद के लिए रवाना हुए, तो उनके विमान की सीटों पर मिनाब हमले में मारे गए बच्चों की तस्वीरें रखी गई थीं। उन तस्वीरों के साथ उनके बैग और गुलाब रखे गए थे। यह कोई सामान्य दृश्य नहीं था बल्कि एक तीखा संदेश था। कालीबाफ ने खुद इन तस्वीरों को अपनी यात्रा के साथी बताया। यह कदम साफ संकेत देता है कि ईरान इन वार्ताओं में भावनात्मक और राजनीतिक दबाव दोनों बनाना चाहता है।

इस्लामाबाद पहुंचते ही माहौल और भी तनावपूर्ण हो गया। पाकिस्तान की सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा, जैसे किसी आपातकाल का माहौल हो। सुरक्षा बलों ने शहर को लगभग सील कर दिया और लोगों को घरों में रहने की सलाह दी गई। यह ऐसा क्षण है जिसे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने निर्णायक बताया है। उनका कहना है कि यह वार्ता तय करेगी कि युद्ध विराम कायम रहेगा या फिर पूरी तरह ढह जाएगा।

हम आपको यह भी बता दें कि ईरान और अमेरिका के बीच अविश्वास की खाई इतनी गहरी है कि बातचीत शुरू होने से पहले ही उसकी नींव कमजोर दिखाई दे रही है। कालीबाफ ने साफ कहा है कि पिछले अनुभवों में अमेरिका ने हमेशा वादाखिलाफी की है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि ईरान के पास सद्भावना तो है लेकिन भरोसा बिल्कुल नहीं।

देखा जाये तो इस पूरे तनाव की जड़ में मिनाब हमला है, जिसने पूरे क्षेत्र को हिला कर रख दिया। यह हमला एक स्कूल पर हुआ, जिसमें एक सौ पैंसठ लोग मारे गए, जिनमें कई बच्चे शामिल थे। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि हमला जानबूझकर स्कूल को निशाना बनाकर किया गया या पास स्थित सैन्य ठिकाने पर हमले का परिणाम था, लेकिन ईरान ने सीधे तौर पर इसके लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया है।

ईरान ने यहां तक दावा किया कि अमरीकी नौसेना के अधिकारियों ने टॉमहॉक मिसाइल दागने का आदेश दिया, जिससे यह त्रासदी हुई। दूसरी ओर अमेरिका और इजराइल ने अभी तक इस पर स्पष्ट जिम्मेदारी नहीं ली है, हालांकि जांच जारी होने की बात कही गई है। यही अस्पष्टता इस पूरे मामले को और अधिक विस्फोटक बना रही है।

दूसरी ओर, हालात और जटिल तब हो गए जब खबर आई कि चीन जल्द ही ईरान को नई वायु रक्षा प्रणाली भेज सकता है। यह कदम क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को पूरी तरह बदल सकता है और अमेरिका तथा उसके सहयोगियों के लिए नई चुनौती खड़ी कर सकता है।

इसी बीच लेबनान में भी तनाव चरम पर है। हिजबुल्लाह ने दावा किया है कि उसने इजराइली सैनिकों पर हमला किया और कई इलाकों में राकेट दागे। जवाब में इजराइल ने दक्षिणी लेबनान के शहरों पर हवाई हमले किए। यह घटनाएं साफ संकेत देती हैं कि युद्ध भले ही औपचारिक रूप से रुका हुआ हो, लेकिन जमीनी स्तर पर आग अभी भी धधक रही है।

वहीं, इस्लामाबाद में हो रही वार्ता के सामने कई बड़े मुद्दे हैं। इनमें प्रतिबंध हटाना, क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचा और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे रणनीतिक मार्गों पर नियंत्रण शामिल है। इन मुद्दों पर सहमति बनना आसान नहीं है और यही कारण है कि इस वार्ता को अब तक की सबसे कठिन बातचीत माना जा रहा है।

देखा जाये तो ईरान का कड़ा रुख, अमेरिका का दबाव, चीन की संभावित भूमिका और लेबनान में जारी संघर्ष यह सब मिलकर इस पूरे संकट को और गहरा बना रहे हैं। इस्लामाबाद अब सिर्फ बातचीत का मंच नहीं बल्कि वैश्विक शक्ति संघर्ष का केंद्र बन चुका है।

बहरहाल, अब दुनिया की नजरें इसी बात पर टिकी हैं कि क्या यह वार्ता शांति का रास्ता खोलेगी या फिर एक और विनाशकारी अध्याय की शुरुआत करेगी। क्योंकि अगर यह मौका हाथ से निकल गया, तो अगली खबर शायद किसी और त्रासदी की होगी।

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