Donald Trump के 'जंग खत्म' वाले बयान के बीच ईरान की धमकी, Oil Price 200 डॉलर तक संभव

By Ankit Jaiswal | Mar 11, 2026

मध्य पूर्व में जारी सैन्य तनाव के बीच अब तेल बाजार और समुद्री व्यापार पर भी इसका असर साफ दिखाई देने लगा है। हालात को लेकर दुनिया भर में चिंता बढ़ती जा रही है और ऊर्जा बाजार में अस्थिरता तेज हो गई है।

गौरतलब है कि ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान की सैन्य कमान ने तेल की कीमतों को लेकर कड़ी चेतावनी दी है। ईरान के एक सैन्य प्रवक्ता ने कहा कि क्षेत्रीय अस्थिरता के कारण कच्चे तेल की कीमत 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है और इसके लिए अमेरिका की नीतियां जिम्मेदार होंगी।

बता दें कि तेहरान में एक बैंक के कार्यालयों पर रात में हमले की खबर के बाद ईरान ने यह भी कहा है कि वह उन बैंकों को निशाना बना सकता है जो अमेरिका या इजराइल के साथ कारोबार करते हैं। ईरानी सैन्य प्रवक्ता ने लोगों को बैंकों के आसपास सावधानी बरतने की सलाह भी दी है।

मौजूद जानकारी के अनुसार खाड़ी क्षेत्र में समुद्री गतिविधियों पर भी इसका असर दिख रहा है। ईरान की क्रांतिकारी गार्ड ने चेतावनी दी है कि होरमुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों को निशाना बनाया जा सकता है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के तेल परिवहन के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

गौरतलब है कि इसी क्षेत्र में कई व्यापारिक जहाजों पर हमले की खबरें भी सामने आई हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक थाईलैंड के झंडे वाले एक जहाज पर अज्ञात प्रक्षेपास्त्र से हमला हुआ, जिसके बाद ओमान की नौसेना ने बचाव अभियान चलाया है।

बताया जा रहा है कि खाड़ी क्षेत्र में कई भारतीय जहाज भी फंसे हुए हैं। रिपोर्ट के अनुसार होरमुज जलडमरूमध्य के दोनों ओर करीब 28 भारतीय जहाजों के अटकने की खबर सामने आई है, जिससे समुद्री व्यापार को लेकर चिंता बढ़ गई है।

दूसरी ओर वैश्विक ऊर्जा बाजार में भी हलचल तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस क्षेत्र में संघर्ष लंबा चला तो तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है और इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

गौरतलब है कि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने भी इस स्थिति को देखते हुए एक बड़ा कदम प्रस्तावित किया है। एजेंसी ने तेल की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए करीब 40 करोड़ बैरल तेल भंडार बाजार में जारी करने का सुझाव दिया है, जो उसके इतिहास में सबसे बड़ा प्रस्तावित कदम माना जा रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार यदि मध्य पूर्व में तनाव लगातार बढ़ता है तो वैश्विक ऊर्जा बाजार, समुद्री व्यापार और कई देशों की अर्थव्यवस्था पर इसका गहरा असर देखने को मिल सकता है।

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