By अभिनय आकाश | Apr 01, 2026
करीब 5 साल बाद भारत और ईरान के बीच तेल व्यापार फिर से शुरू हो चुका है। साल 2019 के बाद पहली बार ईरान का कच्चा तेल लेकर एक जहाज भारत की ओर बढ़ रहा है जो गुजरात के वाडिनार बंदरगाह पर पहुंचने वाला है। यह जहाज पिंग शून करीब 6 लाख बैरल कच्चा तेल लेकर आ रहा है। बड़ी बात यह है कि यह डील ऐसे वक्त पर हो रही है जब दुनिया भर में तेल की कीमतें ऊपर नीचे हो रही हैं और सप्लाई को लेकर चिंता बनी हुई है। स्टेट ऑफ होर्मूज पर बवाल ईरान इजराइल युद्ध और इस बीच भारत ईरान का तेल आना यह अपने आप में एक बड़ी बात है। भारत का यह कदम काफी अहम माना जा रहा है। दरअसल अमेरिका ने हाल ही में समुद्र में मौजूद ईरानी तेल की खरीद पर 30 दिनों की अस्थाई छूट दी। इसी छूट का फायदा उठाते हुए यह कारगो भारत भेजा गया। माना जा रहा है कि यह छूट वैश्विक बाजार में तेल की बढ़ती कीमतों को काबू में रखने के लिए दी गई। वहीं जानकारी के मुताबिक यह तेल ईरान के खार गार्लैंड से मार्च की शुरुआत में रवाना हुआ था और 4 अप्रैल के आसपास गुजरात पहुंच सकता है।
अमेरिका ने इस महीने की शुरुआत में ईरानी तेल की समुद्री खरीद पर 30 दिन के लिए छूट दी थी ताकि वैश्विक बाजार में बढ़ती कीमतों को काबू किया जा सके। अनुमान है कि इस समय समुद्र में करीब 95 मिलियन बैरल ईरानी तेल मौजूद है। जिसमें से लगभग 51 मिलियन बैरल भारत के लिए उपयुक्त हो सकता है। हालांकि अभी भी कुछ चुनौतियां बनी हुई है। सबसे बड़ी समस्या भुगतान की है। क्योंकि ईरान अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग सिस्टम Swift से बाहर है। पहले ईरान को यूरो में भुगतान किया जाता था और एक विदेशी बैंक इसके बीच में काम करता था। लेकिन अब यह व्यवस्था उपलब्ध नहीं है और फिलहाल यह कहना भी जल्दबाजी होगी कि यह सिर्फ एक बार की डील है या आगे भी भारत ईरान तेल व्यापार जारी रहेगा। लेकिन इतना जरूर है कि इस एक कदम ने संकेत दे दिया है कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए हर विकल्प खुला रखे हुए हैं।