By अभिनय आकाश | Oct 05, 2026
सुन हमला देश के ऊपर बंदूक उठा चल देती हूं,
देश की रक्षा की खातिर अपने जान की बाजी लगाना त्याग का सबसे बड़ा उदाहरण माना जाता है। प्राचीन धर्म ग्रंथों तक में लिखा गया है कि 'जननी, जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी' अर्थात माता और मातृभूमि का स्थान स्वर्ग से भी बढ़कर है। ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच गहराते तनाव और युद्ध की आहट के बीच तेहरान में महिलाओं ने भी मोर्चे की तैयारी शुरू कर दी है। पिछले आठ महीनों से जारी संघर्ष के बीच जब वाशिंगटन और तेहरान एक-दूसरे को सीधी चेतावनियां दे रहे हैं, तब किसी भी संभावित जमीनी हमले से निपटने के लिए ईरानी महिलाएं रविवार को हथियारों का कड़ा प्रशिक्षण लेने मैदान में उतर आईं। इमाम हुसैन स्क्वायर स्थित एक सैन्य प्रशिक्षण केंद्र पर इन महिलाओं ने पहले सैन्य अधिकारियों और प्रशिक्षकों से रणनीतिक गुर सीखे, और फिर हैंडगन समेत कई आधुनिक हथियारों को थामने, लोड करने और सटीक निशाना साधने का अभ्यास किया। हाथों में चूड़ियों की जगह बंदूकों की कमान थामे ये महिलाएं साफ संदेश दे रही हैं कि वतन की हिफाजत के लिए वे किसी भी चुनौती से टकराने को तैयार हैं।
यह ट्रेनिंग ईरान द्वारा 'हफ़्त-ए-तीर स्क्वायर' पर एक और सिविलियन मिलिट्री ट्रेनिंग सेंटर खोलने के एक दिन बाद हुई। ट्रेनिंग सेंटर्स से मिली फुटेज और रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन सुविधाओं का मकसद आम नागरिकों को अमेरिकी और इज़राइली सेनाओं का ज़मीनी हमले की स्थिति में सामना करने के लिए तैयार करना है। हिस्सा लेने वाली कुछ महिलाओं के लिए, ये ड्रिल लड़ाई-झगड़े के बजाय अपने परिवारों की सुरक्षा के लिए तैयार रहने के बारे में ज़्यादा थीं। 45 साल की प्रतिभागी राहेलेह घादिरी ने कहा कि युद्ध के समय अपने परिवार और पड़ोस की सुरक्षा करना सीखने से उनका डर कम होगा।
तेहरान से ये तस्वीरें तब सामने आईं जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी कि वे ईरान के बारे में बहुत जल्द कोई फ़ैसला ले सकते हैं। इससे संकेत मिलता है कि वॉशिंगटन अपने अगले कदम पर विचार कर रहा है, क्योंकि शांति स्थापित करने और संघर्ष खत्म करने की कोशिशें अटकी हुई हैं। ट्रंप ने ओहायो जाने के लिए व्हाइट हाउस से निकलने से पहले पत्रकारों से कहा ईरान को बुरी तरह नुकसान पहुँचाया गया है। इसलिए अब सवाल बस यह है कि यह रास्ता आसान होगा या मुश्किल। ओहायो में वे नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले रिपब्लिकन उम्मीदवारों के लिए प्रचार करने जा रहे थे। ट्रंप की इस चेतावनी का जवाब ईरान के विदेश मंत्री अरागची ने कड़े तेवर के साथ दिया। उन्होंने इस बात को खारिज कर दिया कि इस विवाद को सैन्य ताकत या और प्रतिबंध लगाकर सुलझाया जा सकता है।
विदेशी राजदूतों की एक बैठक में अरागची ने कहा अगर हमारे दुश्मन फिर से सैन्य टकराव का रास्ता चुनते हैं, तो हमारा जवाब पहले से कहीं ज़्यादा कड़ा होगा और हम और भी ज़्यादा ताकत के साथ अपना बचाव करेंगे। उन्होंने कहा इसका कोई सैन्य समाधान नहीं है और न ही नए प्रतिबंधों से कोई हल निकल सकता है। उन्होंने तर्क दिया कि केवल न्याय और निष्पक्षता पर आधारित बातचीत से ही इस विवाद को खत्म किया जा सकता है। जब कूटनीतिक कोशिशें रुकी हुई हैं और फिर से सैन्य कार्रवाई की धमकियां मिल रही हैं, तो ईरान के आम नागरिकों के लिए बने ट्रेनिंग कैंप एक साफ़ संदेश दे रहे हैं: आम लोगों को इस संभावना के लिए तैयार किया जा रहा है कि युद्ध ज़मीन तक पहुँच सकता है।