By Ankit Jaiswal | May 19, 2026
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ईरान ने एक बड़ा और चौंकाने वाला कदम उठाया हैं। ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों के लिए बिटकॉइन आधारित नई बीमा व्यवस्था शुरू करने का ऐलान किया हैं। माना जा रहा है कि यह योजना ईरान की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसके जरिए वह वैश्विक समुद्री मार्गों पर अपना आर्थिक और रणनीतिक प्रभाव बढ़ाना चाहता हैं।
बता दें कि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल हैं। दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस इसी रास्ते से गुजरती हैं। ऐसे में यहां किसी भी तरह का तनाव वैश्विक ऊर्जा बाजार को सीधे प्रभावित करता हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान को उम्मीद है कि इस नई बीमा व्यवस्था से उसे 10 अरब डॉलर से ज्यादा की कमाई हो सकती हैं। हालांकि अभी तक यह साफ नहीं किया गया है कि यह बीमा शुल्क जहाजों पर पहले से लगाए जा रहे टोल टैक्स से अलग होगा या नहीं। गौरतलब है कि हाल के हफ्तों में कुछ जहाजों पर करीब 20 लाख डॉलर तक का शुल्क लगाए जाने की खबरें सामने आई थीं।
ईरान ने यह भी संकेत दिया है कि “होर्मुज सेफ” नाम से एक आधिकारिक वेबसाइट जल्द शुरू की जाएगी, जहां इस योजना से जुड़ी पूरी जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि बिटकॉइन आधारित व्यवस्था अपनाने के पीछे ईरान की बड़ी रणनीति छिपी हुई हैं। दरअसल, पश्चिमी देशों के आर्थिक प्रतिबंधों के कारण ईरान लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग और भुगतान प्रणाली में दबाव झेल रहा हैं। ऐसे में क्रिप्टोकरेंसी आधारित भुगतान और बीमा मॉडल के जरिए ईरान पारंपरिक पश्चिमी वित्तीय व्यवस्था पर निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहा हैं।
इसी बीच अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत को लेकर भी कुछ सकारात्मक संकेत सामने आए हैं। ईरानी समाचार एजेंसी तस्नीम की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ने नई वार्ता रूपरेखा में ईरान के तेल क्षेत्र पर कुछ प्रतिबंधों में अस्थायी राहत देने पर सहमति जताई हैं। हालांकि ईरान अब भी सभी प्रतिबंध पूरी तरह हटाने की मांग पर कायम हैं।
गौरतलब है कि एक तरफ अमेरिका बातचीत के जरिए तनाव कम करने की कोशिश कर रहा हैं, वहीं दूसरी तरफ ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को आर्थिक और रणनीतिक दबाव के बड़े साधन के रूप में इस्तेमाल करने की दिशा में लगातार कदम बढ़ा रहा हैं।
वैश्विक बाजारों के लिए सबसे बड़ी चिंता अब भी समुद्री व्यापार की अनिश्चितता बनी हुई हैं। जानकारों का कहना है कि जब तक अमेरिका और ईरान के बीच स्थायी समझौता नहीं होता, तब तक तेल आपूर्ति, समुद्री सुरक्षा और वैश्विक व्यापार पर दबाव बना रह सकता हैं।