यदि सचमुच 2024 का चुनाव मोदी बनाम केजरीवाल हो गया तो क्या होगा?

By नीरज कुमार दुबे | Aug 20, 2022

अरविंद केजरीवाल को दिल्ली की जनता ने मुख्यमंत्री बनाया लेकिन वह तो प्रधानमंत्री बनने का ख्वाब देखते हैं इसलिए दिल्ली की जनता से मिली जिम्मेदारियों को निभाने के प्रति उनका पूरा ध्यान ही नहीं है। केजरीवाल से अगर आपको मिलना है तो दिल्ली की बजाय गुजरात या हिमाचल प्रदेश जाकर मिलना होगा क्योंकि आजकल वह इन्हीं राज्यों में ज्यादा पाये जाते हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि केजरीवाल ऐसे मुख्यमंत्री हैं जिन्होंने अपने पास एक भी विभाग नहीं रखा है। उन्होंने अपने डिप्टी मनीष सिसोदिया को 18 विभागों की जिम्मेदारी सौंपी हुई है। केजरीवाल ने यह सब इसलिए किया है ताकि उनका ध्यान आम आदमी पार्टी को राष्ट्रीय स्तर पर खड़ा करने में लगा रहे और दिल्ली की सफलता का ढिंढोरा पीट-पीट कर वह अपने प्रधानमंत्री पद की दावेदारी को मजबूत कर सकें। आप एक बात पर ध्यान दीजिये। केजरीवाल दिल्ली की शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में सफलता का जो ढिंढोरा पीट रहे हैं यदि उसे सही मान भी लिया जाये तो शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया हैं और स्वास्थ्य मंत्री हाल तक सत्येंद्र जैन रहे हैं। केजरीवाल ने खुद किस विभाग का कायापलट किया है इसके बारे में भी उन्हें जनता को बताना चाहिए। साथ ही शिक्षा और स्वास्थ्य यदि दिल्ली सरकार की बड़ी उपलब्धियां हैं तो राज्य सरकार को यह भी बताना चाहिए कि उसके कार्यकाल में कितने स्कूल खोले गये और कितने नये अस्पताल बनाये गये। दिल्ली में शराब की दुकानों को बढ़ाने में रुचि दिखाने वाली केजरीवाल सरकार को यह भी बताना चाहिए कि उसने कितने नये शिक्षकों की भर्ती कर शिक्षा व्यवस्था को सुधारा है?

इसे भी पढ़ें: रेवड़ी कल्चर और वेलफेयर स्कीम में क्या अंतर है? Freebies वाली याचिका पर SC जज ने क्यों सुनाई अपने ससुर की कहानी

दूसरी ओर, जहां केजरीवाल खुद को प्रधानमंत्री की रेस में मान रहे हैं तो दूसरे नेता भी अपने नाम को आगे करवाने में लग गये हैं। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के विपक्ष की ओर से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में उभरने की चर्चा के बीच, उनकी पार्टी जनता दल यूनाइटेड ने कहा है कि अगर अन्य दल चाहें तो नीतीश कुमार एक विकल्प हो सकते हैं। जद (यू) अध्यक्ष ललन सिंह ने कहा कि नीतीश कुमार का मुख्य ध्यान 2024 के लोकसभा चुनावों में भाजपा से मुकाबला करने के लिए विपक्षी दलों को एकजुट करने पर है। यानि नीतीश अब पटना की बजाय दिल्ली पर पूरा ध्यान लगाना चाहते हैं। बताया जा रहा है कि अगले सप्ताह बिहार विधानसभा में विश्वास मत हासिल करने के बाद विभिन्न दलों के नेताओं से मिलने के लिए नीतीश कुमार राष्ट्रीय राजधानी का दौरा करेंगे और उसके बाद ऐसे दौरे करते रहेंगे। यानि जिस तरह से प्रधानमंत्री पद की रेस में शामिल ममता बनर्जी लगातार दिल्ली का दौरा कर आगे की संभावनाएं टटोल रहीं हैं उसी तरह अब नीतीश कुमार भी दिल्ली आ आकर अपने लिए संभावनाएं टटोलेंगे। लेकिन इन नेताओं को हम 2019 के लोकसभा चुनावों के दौरान आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे एन. चंद्रबाबू नायडू का हश्र याद दिलाना चाहेंगे। उस समय चंद्रबाबू नायडू को लग रहा था कि वह देशभर में विपक्ष को जोड़ने का माद्दा रखते हैं इसलिए अपने राज्य के विधानसभा और लोकसभा चुनावों की चिंता नहीं करते हुए वह कभी दिल्ली, कभी मुंबई, कभी कोलकाता, कभी लखनऊ तो कभी अन्य किसी स्थान के चक्कर लगाते रहे और विपक्षी नेताओं के साथ फोटो खिंचवाते रहे। इस व्यस्तता के बीच कब जनता ने चंद्रबाबू की जमीन पूरी तरह खिसका दी इसका पता उन्हें चुनाव परिणाम आने के बाद लगा।

बहरहाल, प्रधानमंत्री पद के दावेदारों की बढ़ती संख्या की बात है तो ऐसे बहुत से नेता हैं जो इस रेस में शामिल हैं। कुछ ने अपने नाम सार्वजनिक कर दिये हैं तो कुछ मौके की तलाश में हैं। लेकिन यहां गौर करने वाली बात यह है कि इस रेस में शामिल सभी विपक्षी नेताओं में एकता की कमी है। पीएम पद की रेस में शामिल नेताओं के नाम पर गौर करें तो एक के नाम पर दूसरा राजी नहीं होगा तो दूसरे के नाम पर तीसरा राजी नहीं होगा। साथ ही यह नेता देश के लिए विजन पेश करने की बजाय सिर्फ इस बात के गुणा-भाग में लगे हैं कि किस राज्य में भाजपा की कितनी सीट कम हो सकती है और फिर कैसे किसको मिलाकर अपना नंबर लग सकता है। ऐसे में देश को तय करना होगा कि वापस खिचड़ी सरकारों के दौर में जाना है या फिर 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प के साथ काम कर रहे लोगों के साथ खड़ा रहना है।

-नीरज कुमार दुबे

प्रमुख खबरें

ECI मार्च पर Delhi Police का एक्शन, Rahul Gandhi और Priyanka समेत 260 लोग हिरासत में लिए गए

Gurugram Bar Association ने कैप्टन Smit Machhar को Ashok Chakra देने की मांग की

Pakistan Cricket Board को बड़ा झटका, Broadcast Rights तय कीमत से आधी रकम पर बिके

ठाणे MACT ने मेट्रो साइट हादसे में मृतक मजदूर के परिजनों को 34.54 लाख रुपये मुआवजा देने का दिया आदेश