Taiwan पर कब्जे के लिए चीन युद्ध का ऐलान करने वाला है? धमकी देकर जिनपिंग ट्रंप को डरा रहे या फिर और भड़का रहे

By अभिनय आकाश | Jan 02, 2025

दिन बदलते हैं, साल बदलते हैं और देखते देखते दशक बीत जाते हैं। लेकिन दुनिया में कुछ ऐसे विवाद हैं जो ज्यों का त्यों ही रहते हैं। 2025 में दुनिया के सामने कई युद्धों को रोकने की चुनौती होगी। ऐसा ही एक मोर्चा रूस और यूक्रेन के बीच का है, जहां नए साल के पहले दिन भी हमलों का सिलसिला जारी रहा। रूस ने यूक्रेन की राजधानी कीव पर 100 से ज्यादा ड्रोन से हमले किए। रूस और यूक्रेन के बीच के युद्ध को फरवरी में तीन साल हो जाएंगे। अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप दावा कर चुके हैं कि वो सत्ता में आने के 24 घंटे के अंदर रूस यूक्रेन युद्ध रुकवा देंगे। वो यूक्रेन को अमेरिका की ओर से वित्तीय सहायता देने के भी पक्ष में नहीं है। ये यूक्रेन को बातचीत की मेज पर आने का दबाव बढ़ाए। इस बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति वोदमोमीर जेलेंस्की का मानना है कि अमेरिका उनका साथ नहीं छोड़ेगा। वो ये भी मानते हैं कि ट्रंप युद्ध रुकवाने की क्षमता रखते हैं। वहीं पश्चिम एशिया में सुलग रही युद्ध की आग थम नहीं रही है। हालांकि डोनाल्ड ट्रंप ये मानते रहे हैं कि रूस यूक्रेन युद्ध के मुकाबले पश्चिम एशिया की समस्या सुलझाना ज्यादा आसान है। 

7 अक्टूबर 2024 से शुरू हुआ इजरायल हमास युद्ध अब तक 47हजार से ज्यादा लोगों की जान ले चुका है। सबसे ज्यादा नुकसान आम लोगों और हमास लड़ाकों के नेटवर्क को हुआ है। हिजबुल्लाह को भी इजरायल भारी नुकसान पहुंचा चुका है। यमन से सटे हूती लड़ाकों पर हमले औऱ इजरायल के जवाबी हमले जारी है। इन सब के बीच ईरान और इजरायल एक दूसरे पर दो दौर के हमले कर चुके हैं। 2025 की एक चुनौती ये भी है कि दुनिया में युद्ध का एक और मोर्चा न खुल जाए। वन चाइना पॉलिसी के तहत चीन ताइवान को अपना अभिन्न हिस्सा मानता है। लेकिन ताइवान कहता है कि हम एक आजाद मुल्क हैं। इसी मामले को लेकर दोनों के बीच करीब सात दशक से तनातनी चली आ रही है। अगर मामले को करीब से देखें तो चीन ही इसमें 20 साबित हुआ है। कैसे वो भी आपको बता देते हैं। दुनिया में बारह मुल्क ऐसे हैं जो ताइवान को एक संप्रभु देश मानते हैं। भारत और अमेरिका भी ताइवान को संप्रभु देश नहीं मानते हैं। कुछ बरस पहले तक ये संख्या 20 थी लेकिन चीन की दबाव की वजह से ये संख्या लगातार कम होती जा रही है। 

न्यू ईयर पर जिनपिंग कुछ ऐसा बोल गए जो दुनिया में बन गई सुर्खियां

चीन ने ऐसा कोई मौका नहीं छोड़ा है कि वो ताइवान को अपने साथ एक करके रहेगा। नए साल के मौके पर शी जिनपिंग ने एक बार फिर कहा कि ताइवान को चीन में मिलने से कोई नहीं रोक सकता है। शी जिनपिंग ने सरकारी टीवी चैनल पर प्रसारित अपने नए साल-2025 के संबोधन में कहा कि ताइवान जलडमरूमध्य के दोनों किनारों पर रहने वाले हम चीनी एक ही परिवार के हैं। कोई भी हमारे बीच नातेदारी के बंधन को कभी भी खत्म नहीं कर सकता है। चीन स्व-शासित द्वीप ताइवान को अपनी मुख्य भूमि का हिस्सा होने का दावा करता है और एक अनिवार्य राजनयिक नीति के रूप में ताइवान को अपने हिस्से के रूप में मान्यता देते हुए वन चाइना पॉलिसी की बात करता है। अपने तीसरे पंचवर्षीय कार्यकाल के तहत शासन कर रहे शी ने हाल के वर्षों में ताइवान को चीन के साथ फिर से मिलाने के प्रयासों को तेज करने के लिए इसे एक प्रमुख सैन्य और राजनयिक पहल बनाया। ऐसे में ये चिंता है कि 2025 में चीन ताइवान को लेकर अपना आक्रमक रुख और बढ़ा सकता है। 

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ताइवान ने धमकी के बाद दुनिया की सुरक्षा का मुद्दा उठाया

चीन के राष्ट्रपति की धमकी के बाद ताइवान के राष्ट्रपति का भी बयान आया। उन्होंने कहा कि ताइवान जितना सुरक्षित रहेगा, ये दुनिया उतनी ही सुरक्षित रहेगी। राष्ट्रपति लाई चिंग-ते ने कहा कि ताइवान को अपनी रक्षा को मजबूत करना जारी रखना चाहिए और संभावित खतरों के लिए तैयार रहना चाहिए, यहां तक ​​कि शांतिपूर्ण समय के दौरान भी तैयार रहना है। लाई ने बताया कि चीन चीनी पर्यटकों और छात्रों को ताइवान जाने से रोककर नागरिक समाज के आदान-प्रदान को सक्रिय रूप से प्रतिबंधित कर रहा है। 

अमेरिका की सुपर दीवार को भेद पाएगा चीन

चीन के अचानक इस तरह ताइवान को लेकर बयान देने के पीछे माना जा रहा है कि  20 दिन बाद अमेरिका के नए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प अपना कार्यभार संभालेंगे और अमेरिका ताइवान को सपोर्ट करता है। ऐसे वक्त में शी जिनपिंग ने चेतावनी दी है कि ताइवान के मुद्दे पर कोई बीच में न आए। शी के लिए मुख्य चुनौती ट्रंप की वापसी से है।चीन के खिलाफ सख्त नीतियां अपनाने की धमकी देने वाले ट्रंप 20 जनवरी को अमेरिका का राष्ट्रपति पद दोबारा संभालेंगे। अपने पहले कार्यकाल में ट्रंप ने 2018-19 में चीनी आयात पर 380 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक का आयात शुल्क लगाकर चीन के खिलाफ व्यापार युद्ध शुरू कर दिया और कहा कि अमेरिका को चीन धोखा दे रहा है। उनके उत्तराधिकारी जो बाइडन ने भी आयात शुल्क को जारी रखा, जिससे चीन के मुनाफे पर असर पड़ा है। अपने चुनाव अभियान के दौरान भी ट्रंप ने चीनी आयात पर 60 प्रतिशत से अधिक शुल्क लगाने की धमकी दी, जो पिछले साल 427.2 अरब अमेरिकी डॉलर था। 

भारत का क्या रुख रहने वाला है?

भारत के नजरिए से देखें तो हाल ही में चीन के साथ रिश्ते सुधरे हैं और सीमा विवाद पर समझौते हुए हैं। साथ ही भारत में ताइवान का दूतावास तक नहीं है यानी भारत ने उन्हें रिकॉग्नाइज ही नहीं किया है। ऐसे में भारत चीन का विरोध करते हुए ताइवान को कितना सपोर्ट करता है ये देखना दिलचस्प रहेगा। 

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