By नीरज कुमार दुबे | Jan 30, 2025
प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क के खास कार्यक्रम शौर्य पथ में इस सप्ताह हमने ब्रिगेडियर श्री डीएस त्रिपाठी जी (सेवानिवृत्त) से जानना चाहा कि भारतीय विदेश सचिव की चीन यात्रा के दौरान संबंधों में सुधार की दिशा में और कदम उठाये गये हैं। इसे कैसे देखते हैं आप? इसके जवाब में उन्होंने कहा कि संबंध सुधर तो रहे हैं लेकिन भारत को अब भी चीन पर पूरी तरह भरोसा नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जहां तक हालिया वार्ता की बात है तो भारत और चीन ने संबंधों के ‘पुनर्निर्माण’ के लिए कई उपायों की घोषणा की है जिसमें इस साल गर्मियों में कैलाश मानसरोवर यात्रा फिर से शुरू करना और सीधी उड़ानें बहाल करने पर सैद्धांतिक रूप से सहमत होना शामिल है। उन्होंने कहा कि विदेश सचिव विक्रम मिसरी की चीन के उप विदेश मंत्री सुन वेइदोंग के साथ बीजिंग में व्यापक वार्ता के बाद इन निर्णयों की घोषणा की गई। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों ने सीमापार नदियों से संबंधित आंकड़ों और अन्य सहयोग का प्रावधान पुनः शुरू करने को लेकर चर्चा के लिए भारत-चीन विशेषज्ञ स्तरीय तंत्र की बैठक शीघ्र बुलाने पर भी सहमति व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि विदेश सचिव ने विदेश मंत्री वांग यी और चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के अंतरराष्ट्रीय विभाग के मंत्री लियू जियानचाओ से भी मुलाकात की।
ब्रिगेडियर श्री डीएस त्रिपाठी जी (सेवानिवृत्त) ने कहा कि दोनों पक्षों का मानना है कि 2025 जो भारत और चीन के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना की 75वीं वर्षगांठ है, का उपयोग एक-दूसरे के बारे में बेहतर जागरूकता पैदा करने और जनता के बीच आपसी विश्वास और भरोसा बहाल करने के लिए सार्वजनिक कूटनीति प्रयासों को दोगुना करने के लिए किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पिछले महीने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने बीजिंग का दौरा किया था और सीमा विवाद पर विशेष प्रतिनिधि (एसआर) वार्ता के ढांचे के तहत चीनी विदेश मंत्री वांग यी के साथ बातचीत की थी।