CAFE-3 मानकों पर सस्पेंस खत्म? PMO को भेजा गया संशोधित प्रस्ताव, Maruti-Tata के बीच खिंची मतभेदों की लकीर

By रेनू तिवारी | Feb 25, 2026

केंद्र सरकार ने देश में वाहनों से होने वाले कार्बन उत्सर्जन को कम करने और ईंधन दक्षता (Fuel Efficiency) बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम बढ़ाया है। केंद्रीय भारी उद्योग मंत्री एच डी कुमारस्वामी ने बुधवार को जानकारी दी कि 'कैफे-3' (CAFE-3) मानकों का संशोधित प्रस्ताव प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को भेज दिया गया है।

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कुमारस्वामी ने कैफे-3 मानकों को लेकर वाहन उद्योग के भीतर उपजे मतभेदों के बारे में पूछे जाने पर कहा, ‘‘इस बारे में वाहन उद्योग के प्रतिनिधियों और ऊर्जा मंत्रालय के साथ एक बैठक हो चुकी है। मेरी जानकारी के मुताबिक, बैठक के बाद मंत्रालय ने संशोधित प्रस्ताव पीएमओ को भेज दिया है।’’

खासकर छोटी कारों को कैफे-3 मानकों के क्रियान्वयन से संभावित रियायत दिए जाने और तकनीकी परिभाषाओं में बदलाव को लेकर वाहन उद्योग के भीतर मतभेद खुलकर सामने आए हैं। टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी शैलेश चंद्रा ने नवंबर में कहा था कि वजन और वहनीयता के आधार पर छोटी कारों को इन मानकों से छूट नहीं दी जानी चाहिए। उनका तर्क था कि इससे सुरक्षा मानकों से समझौता हो सकता है और टिकाऊ परिवहन की दिशा में ठोस प्रयास प्रभावित होंगे।

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दूसरी तरफ, देश की अग्रणी वाहन कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया ने छोटी कारों के लिए रियायत देने की मांग रखी है। कंपनी के चेयरमैन आर सी भार्गव कह चुके हैं कि कैफे मानकों का मूल उद्देश्य बड़ी कारों की ईंधन दक्षता सुधारना और उत्सर्जन कम करना है। देश में 2017 से लागू कैफे मानक किसी वाहन विनिर्माता के कुल बेड़े की औसत ईंधन खपत और कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन की सीमा तय करते हैं।

कैफे-2 मानक 2022 में लागू किए गए थे जबकि कैफे-3 मानकों के अप्रैल, 2027 से लागू होने की संभावना है। ऊर्जा मंत्रालय के तहत संचालित ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (बीईई) ने इस वर्ष सितंबर में मसौदा विनियम जारी कर सुझाव आमंत्रित किए थे। अब अंतिम मानकों पर निर्णय के लिए प्रस्ताव पीएमओ के विचाराधीन है।

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