By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Aug 28, 2026
शिरीष बी प्रधान काठमांडू, 27 अगस्त चीन-नेपाल सीमा के पास के इलाकों में आई भीषण बाढ़ के बाद ईशा फाउंडेशन के 77 तीर्थयात्री अब भी लापता हैं। इस बाढ़ में सैकड़ों लोगों की मौत हो गई है, जबकि हजारों लोग लापता हैं। तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र के ग्यिरोंग टाउनशिप में बुधवार सुबह अचानक आई बाढ़ ने चीन-नेपाल सीमा क्षेत्र के पास स्थित गांवों और कस्बों में भारी तबाही मचाई।
तीर्थयात्रियों के समूह काठमांडू से नेपाल होते हुए तिब्बत जाते हैं, जहां यात्रा के दौरान पैदल ट्रेकिंग भी करनी होती है। सद्गुरु ने बुधवार को फेसबुक के अपने आधिकारिक पेज पर साझा किए गए संदेश में कहा कि कैलाश तीर्थयात्रा पर गया उनका एक समूह नेपाल लौटते समय अचानक आई बाढ़ में फंस गया। उन्होंने बताया कि बाढ़ आने के समय यह समूह जिरोंग स्थित आव्रजन कार्यालय में था।
बताया जा रहा है कि बाढ़ का पानी कार्यालय की इमारत और शहर के बड़े हिस्से में भर गया। उन्होंने कहा कि नेपाल के टिमुरे में तीन स्वयंसेवक फंसे हुए थे। सद्गुरु ने कहा कि आव्रजन कार्यालय में मौजूद लापता लोगों के ठिकाने के बारे में अभी कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है।
नेपाल सरकार ने कहा है कि उस आव्रजन केंद्र के सभी कर्मचारी संपर्क से बाहर हैं। लापता तीर्थयात्रियों में अमेरिका के 22, कनाडा के 12, ऑस्ट्रेलिया के 11, ब्रिटेन के नौ, जर्मनी के चार, फ्रांस और नेपाल के तीन-तीन, नीदरलैंड, न्यूजीलैंड, सिंगापुर और स्पेन के दो-दो तथा फिनलैंड, हंगरी, इजराइल, लिथुआनिया, फिलीपीन, पुर्तगाल, रूस और दक्षिण अफ्रीका का एक-एक नागरिक शामिल है। सद्गुरु ने लिखा, ‘‘हम अधिकारियों के साथ मिलकर यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या हम उस स्थान तक पहुंच सकते हैं।
जोखिम चाहे जितना भी हो, हम बचाव अभियान में शामिल होने के लिए तैयार हैं।’’ उन्होंने बताया कि तीर्थयात्रा में 21 समूह शामिल थे, जिनमें से 495 लोग सुरक्षित लौट चुके हैं, जबकि 743 लोग फिलहाल तिब्बत और 148 लोग नेपाल में हैं। सद्गुरु ने कहा कि वह इस क्षेत्र में मौजूद हैं और बचाव अभियान जारी है।