By अभिनय आकाश | Sep 29, 2026
जन-आंदोलन के बाद पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार गिरने और उनके देश छोड़कर भागने के महज दो साल बाद ही, बांग्लादेश एक और बड़े राजनीतिक संकट के मुहाने पर खड़ा नजर आ रहा है। कथित तौर पर देश के एक शीर्ष नेता ने सैन्य नेतृत्व के साथ मिलकर प्रधानमंत्री तारिक रहमान के नेतृत्व वाली बीएनपी (BNP) सरकार को उखाड़ फेंकने की साजिश रची है। ऐसे में कहा जा रहा है कि क्या बांग्लादेश में क्या एक बार फिर से तख्ता पलट होने जा रहा है? क्या तारिक रहमान का भी वही हश्र होगा जो शेख हसीना का हुआ। यह सवाल इसलिए क्योंकि बांग्लादेश में पिछले कुछ दिनों में कई हलचल देखने को मिली है। आईएसआई के आतंकी वहां पर घूम रहे हैं। आर्मी के बेस पर जा रहे हैं। इसके अलावा तुर्की के इन्वॉल्वमेंट को लेकर खबरें हैं।
सूत्रों का कहना है कि सेना और जमात-ए-इस्लामी इस योजना का समर्थन करते हैं। कहा जा रहा है कि यह योजना पाकिस्तान में तैयार की जा रही है और इसे तुर्की से फंड मिल रहा है। इसका मकसद बांग्लादेश की दो मुख्य राजनीतिक पार्टियों—तारिक रहमान की अगुवाई वाली BNP और शेख हसीना की प्रतिबंधित अवामी लीग—को राजनीतिक रूप से कमज़ोर करना है।इससे पहले, आज़मी और हसीनुर् रहमान ने अलग-अलग दावा किया था कि बांग्लादेश सेना प्रमुख जनरल वाकर-उज़-ज़मान के साथ उनका नियमित संपर्क है और उन पर उनका नियंत्रण है। उन्होंने यह भी दावा किया कि सेना की कमांड चेन पर जनरल ज़मान का नियंत्रण नहीं है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बांग्लादेश की मिलिट्री इंटेलिजेंस में कथित तौर पर इस्लामिक आतंकवाद-विरोधी गठबंधन सक्रिय और मज़बूत हो गया है, और हाल ही में ब्रिगेडियर शौकत उस्मान को इस गुप्त समूह का प्रमुख बनाया गया है।
सूत्रों का यह भी कहना है कि बांग्लादेश की सेना और नागरिक प्रशासन में मौजूद ताकतवर लोग तारिक रहमान और उनके परिवार को देश से बाहर भेजने की साज़िश रच रहे हैं, ठीक वैसे ही जैसे शेख हसीना और उनके परिवार को देश छोड़कर भारत में शरण लेने के लिए मजबूर होना पड़ा था। खबरों के मुताबिक, खुफिया एजेंसियों को पता चला है कि विदेश मंत्री खलीलुल्लाह रहमान के इस ग्रुप से करीबी संबंध हैं। उन्हीं की पहल पर न्यूयॉर्क में यूनाइटेड नेशंस जनरल असेंबली के दौरान तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ के साथ बैठकें हुईं। एर्दोगन और पेज़ेश्कियान के साथ हुई बैठकें पहले से तय नहीं थीं। माना जाता है कि खलील ने ये बैठकें इसलिए आयोजित कीं ताकि रहमान को उनकी तटस्थ विदेश नीति से भटकाकर विवादों में फंसाया जा सके।
इस बीच, खुफिया सूत्रों ने यह भी दावा किया कि पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) के दो सीनियर अधिकारी, मेजर मोहम्मद अकरम और मेजर अज़ीज़ बुट्टारी, चुपके से बांग्लादेश गए थे। खबरों के मुताबिक, अपनी 10 दिन की यात्रा के दौरान वे चट्टोग्राम समेत कई ठिकानों पर रुके और क्षेत्रीय सुरक्षा खतरों को लेकर सेना के सीनियर अधिकारियों के साथ बैठकें कीं। 25 सितंबर को बांग्लादेश से रवाना होने से पहले उन्होंने महमूदुर आज़मी और हसीनु्र से भी मुलाकात की।
माना जाता है कि बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान, जो संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के मौजूदा अध्यक्ष भी हैं, ने प्रधानमंत्री तारिक़ की बेटी ज़ाइमा रहमान को UNGA अध्यक्ष के कार्यालय में कानूनी अधिकारी के तौर पर नियुक्त किया था, ताकि प्रधानमंत्री को विवाद में घसीटा जा सके। खलीलुर UNGA के अध्यक्ष और बांग्लादेश के विदेश मंत्री भी हैं, फिर भी उन्होंने तारिक़ रहमान के भाषण के लिए महासभा सत्र का सबसे अनुपयुक्त समय चुना। यह भाषण न्यूयॉर्क में देर दोपहर को दिया गया, जब हॉल में आमतौर पर बहुत कम लोग होते हैं, और बांग्लादेश में उस समय सुबह के 4:18 बज रहे थे। इसके अलावा, ज़ाइमा की नियुक्ति एक बड़ा मुद्दा बन गई और तारिक़ के विरोधियों ने 24 सितंबर को UNGA में उनके भाषण से पहले उन्हें निशाना बनाने के लिए इसका इस्तेमाल किया।