By एकता | Nov 08, 2026
इजरायल के पूर्व सेना प्रमुख गादी आइजनकोट को राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग ने नई सरकार बनाने का न्योता दिया है। 27 अक्टूबर को हुए चुनावों में किसी भी पार्टी या गठबंधन को साफ बहुमत नहीं मिला। अपने गठबंधन के पास जरूरी सीटें न होने के कारण आइजनकोट के सामने कई बड़ी मुश्किलें खड़ी हैं।
आइजनकोट के सामने अरब दलों के बाहर से समर्थन लेकर अल्पमत सरकार बनाने, रूढ़िवादी यहूदी दलों से हाथ मिलाने या एक राष्ट्रीय एकता सरकार बनाने जैसे रास्ते खुले हैं। अगर वह तय 42 दिनों के भीतर सरकार नहीं बना पाते, तो कार्यवाहक प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को सरकार बनाने की बाजी पलटने का एक और मौका मिल सकता है।
इजरायल की 120 सीटों वाली संसद 'नेसेट' में बहुमत के लिए 61 सीटें चाहिए। अभी आइजनकोट की यशार पार्टी और उनके सहयोगियों टुगेदर पार्टी, द डेमोक्रेट्स और एविग्डोर लीबरमैन की पार्टी 'इजरायल अवर होम' के पास कुल 48 सीटें हैं।
वहीं, संसद में दो अरब दलों के पास 19 सीटें हैं। दोनों अरब दलों ने नेतन्याहू को सत्ता में आने से रोकने के लिए आइजनकोट को समर्थन देने की बात कही है। अगर ये दल बाहर से भी समर्थन देते हैं, तो गठबंधन का आंकड़ा 67 तक पहुंच जाएगा।
हालांकि, इस रास्ते में कई पेच हैं। आइजनकोट ने चुनाव प्रचार में अरब दलों के साथ सरकार न बनाने की बात कही थी। 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले के बाद जनता के बदले मूड के बीच इस बात से पलटना आसान नहीं होगा। उनके सहयोगी एविग्डोर लीबरमैन ने भी दो टूक कहा है कि वह अरब दलों के समर्थन से सरकार नहीं बनाएंगे। इससे पहले 2021 में नफ्ताली बेनेट ने अरब पार्टी 'राअम' के साथ सरकार बनाई थी, पर वह 18 महीने ही चल पाई थी।
आइजनकोट के पास दूसरा रास्ता दो अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स यहूदी दलों की 13 सीटों का सहारा लेने का है। इनके साथ आते ही आइजनकोट 61 सीटों का आंकड़ा आसानी से पार कर लेंगे।
पर यहां सबसे बड़ी रुकावट रूढ़िवादी यहूदी छात्रों को अनिवार्य सैन्य सेवा से मिलने वाली छूट है। देश का एक बड़ा तबका इसका विरोध करता है और आइजनकोट व लीबरमैन भी इसके खिलाफ रहे हैं। हालांकि, लीबरमैन ने रुख में थोड़ी नरमी लाते हुए कहा, "आपको राजनीति में सब कुछ मनमुताबिक नहीं मिल सकता।"
फिलहाल इन दोनों दलों की राहें भी अलग हैं। यूनाइटेड तोराह जुडाइज्म ने किसी का भी खुलकर साथ नहीं दिया है, जबकि शास पार्टी नेतन्याहू के पाले में खड़ी दिख रही है।
आइजनकोट को सरकार बनाने के लिए अधिकतम 42 दिनों की मोहलत मिली है। अगर वह इस बीच जरूरी नंबर जुटाने में नाकाम रहते हैं, तो राष्ट्रपति हर्जोग नेतन्याहू को सरकार बनाने का मौका दे सकते हैं।
नेतन्याहू के गठबंधन की सीटें 64 से घटकर 53 रह गई हैं। इसके बावजूद, नेतन्याहू विरोधी खेमे के सांसदों में सेंधमारी कर अपनी सरकार खड़ी करने की कोशिश कर सकते हैं। 2022 के चुनावों से पहले भी नेतन्याहू इसी तरह विरोधी खेमे को तोड़कर सरकार गिरा चुके हैं।
अगर अरब या रूढ़िवादी दल साथ नहीं आते हैं, तो एक रास्ता राष्ट्रीय एकता सरकार का भी बनता है। इसमें यशार, टुगेदर, इजरायल अवर होम और नेतन्याहू की लिकुड पार्टी साथ आ सकती हैं। लिकुड पार्टी 27 सीटों के साथ संसद में सबसे बड़ी पार्टी बनी है। इन सभी दलों के मिलने से आंकड़ा 67 तक पहुंच जाएगा।
इसकी उम्मीद अभी बहुत कम है, क्योंकि इसके लिए आइजनकोट को नेतन्याहू को हटाने का अपना मुख्य चुनावी एजेंडा छोड़ना होगा। वहीं नेतन्याहू को अपने पुराने सहयोगियों का साथ छोड़ना पड़ेगा। हालांकि, राजनीतिक संकट गहराने या ईरान के साथ तनाव बढ़ने की सूरत में दोनों खेमे मजबूरी में हाथ मिला सकते हैं।
अगर आइजनकोट और नेतन्याहू दोनों ही सरकार नहीं बना पाते, तो संसद किसी तीसरे चेहरे को मौका दे सकती है, जिसके लिए करीब 100 दिनों की मोहलत मिलती है। अगर तब भी बात नहीं बनी, तो देश में फिर से आम चुनाव कराने पड़ेंगे। राष्ट्रपति हर्जोग ने दलों से अपील करते हुए कहा, "सभी दल खुले दिमाग से बातचीत करें ताकि देश को बार-बार होने वाले चुनावों से बचाया जा सके।"