भारत के Chabahar पर हमला नहीं करेगा इजरायल, अमेरिका की सेना हटी पीछे !

By अभिनय आकाश | Mar 04, 2026

जिसकी चाल दूर तक सोच कर चली जाए उसे युद्ध भी रास्ता नहीं रोक पाता। दुनिया के नक्शे पर इस वक्त एक ऐसा इलाका है जहां हर तरफ तनाव, मिसाइलें और युद्ध की खबरें हैं। पश्चिम एशिया में हालात इतने नाजुक हैं कि कभी भी कुछ बड़ा हो सकता है। कई सैन्य ठिकाने निशाने पर हैं। आसमान में लड़ाकू विमान गूंज रहे हैं और समुंदर में युद्धपोतों की हलचल बढ़ गई है। लेकिन इस पूरे तनाव के बीच ईरान की जमीन पर एक ऐसा स्थान है जहां सब कुछ अलग दिखाई देता है। ऐसा लगता है मानो यहां किसी ने अदृश्य सुरक्षा कवच लगा दिया हो। दरअसल जब हम पश्चिम एशिया के हालात देखते हैं तो लगता है कि कोई भी जगह पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। लेकिन चाबहार पोर्ट के मामले में स्थिति बिल्कुल अलग है। इसका सबसे बड़ा कारण है भारत का भारी निवेश और रणनीतिक भूमिका। भारत ने पिछले कई वर्षों से इस पोर्ट को विकसित करने में जमकर निवेश किया है और इसे एक बड़े व्यापारिक गलियारे में बदलने की योजना बनाई है। यही वजह है कि यह सिर्फ ईरान का बंदरगाह नहीं रहा बल्कि कई देशों के हितों से जुड़ गया। भारत के लिए यह प्रोजेक्ट अचानक नहीं आया। इसके पीछे कई सालों की रणनीति है। असल में भारत को अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंचने में हमेशा एक बड़ी समस्या रही।

अमेरिका-इस्त्राइल की ओर से ईरान पर मिसाइले हमले किए जा रहे हैं। ये मिसाइलें गोल्डन गेट कहे जाने वाले चाबहार पोर्ट के आसपास भी गिर रही है। इस जंग में चाबहार पोर्ट पर भी खतरा मंडरा रहा है। विशेषज्ञों ने आशंका जताई है कि अगर युद्ध लंबा खिंचेगा तो चाबहार पोर्ट को भी नुकसान पहुंच सकता है, जिसमें भारत ने अरबों डॉलर का निवेश किया है। रिपटों के अनुसार, ईरान के चाबहार बंदरगाह में भारत का रणनीतिक निवेश सुरक्षित बना हुआ है। हाल ही में क्षेत्र में हुए मिसाइल हमलों के बावजूद, भारतीय स्वामित्व वाले शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। परिचालन निर्बाध रूप से जारी है, जिससे मध्य एशियाई व्यापार मार्गों के लिए महत्वपूर्ण संपर्क सुनिश्चित हो रहा है।  बता दें मई 204 में भारत और ईरान के बीच एक बड़ा समझौता हुआ था। इस समझौते के तहत भारत की कंपनी इंडिया पोs ग्लोबल लिमिटेड को चापहार के शहीद बेहस्ती टर्मिनल को 10 साल तक ऑपरेट करने का अधिकार मिला। भारत ने लगभग 120 मिलियन का निवेश करने का वादा किया और करीब 250 मिलियन की क्रेडिट लाइन भी दी।

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भारत के लिए गोल्डन गेट है चाबहार पोर्ट

चाहबर ईरान का भारत के सबसे निकट स्थित समुद्री बंदरगाह है। यह ईरान के सिस्तान और बलूचिस्तान प्रांत में मकरान तट पर स्थित है। यह ओमान की खाड़ी में पड़ता है। चाहबर बंदरगाह परियोजना में दो मुख्य बंदरगाह शामिल है-शाहिद कलंतरी बंदरगाह और शाहिद बेहेश्ती बंदरगाह। भारत बेहेश्ती को ही डिवेलप कर रहा है। आज एशिया में चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने के लिए भारत उसके लिए बेहद अहम साझदार है। इसलिए वो ऐसी कोई कार्रवाई नहीं करना चाहता है जिससे भारत के साथ उसके रिश्ते बिगड़े। अब बात करते हैं दोस्त इज़राइल की। इज़राइल और ईरान के बीच दुश्मनी किसी से छिपी नहीं है। दोनों देशों के बीच लंबे समय से तनाव है। लेकिन इसके बावजूद चाबहार पोर्ट को लेकर इज़राइल बेहद सावधानी बरतता दिखाई देता है। इसकी एक बड़ी वजह है भारत और इज़राइल की मजबूत रणनीतिक साझेदारी। दोनों देशों के बीच रक्षा, तकनीक और खुफ़िया सहयोग काफी गहरा है। ऐसे में इजराइल भी यह समझता है कि भारत के निवेश वाले इलाके को नुकसान पहुंचाना उसके लिए सही कदम नहीं होगा।

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