Space से होगा Super Scan, ISRO-NASA का NISAR Satellite बदल देगा पृथ्वी की निगरानी का तरीका, हर 12 दिन में पूरे ग्लोब की नई तस्वीरें दिया करेगा

By नीरज कुमार दुबे | Jul 30, 2025

अंतरिक्ष में अन्वेषण के क्षेत्र में भारत और अमेरिका के बीच संबंधों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से भारत ने ‘इसरो’ और ‘नासा’ द्वारा संयुक्त रूप से तैयार किए गए पृथ्वी का अवलोकन करने वाले उपग्रह को आज प्रक्षेपित किया। हम आपको बता दें कि निसार सैटेलाइट हर 12 दिन में पूरी धरती की नई तस्वीर देगा। इसके जरिये अब पूरे ग्लोब की निगरानी और तेज़ हो पायेगी। NISAR सैटेलाइट हर 12 दिन में पूरी धरती को स्कैन करने में सक्षम है यानि अब स्पेस से होगा सुपरस्कैन और ISRO-NASA का NISAR बदल कर रख देगा निगरानी का तरीका। इसके अलावा, ISRO-NASA के मिशन NISAR से धरती की हर हलचल पर रहेगी पैनी नज़र इसलिए अब दुश्मनों का बच निकलना मुश्किल होगा। हम आपको बता दें कि धरती का 3D एक्स-रे कर NISAR हर 12 दिन में सटीक डेटा देगा।

हम आपको बता दें कि निसार विश्व का पहला द्वि-आवृत्ति (Dual-frequency) रडार इमेजिंग उपग्रह है। यह उपग्रह 5 वर्षों तक कार्य करेगा और सूर्य-समकालिक कक्षा में स्थापित होगा, जिससे यह नियमित और सटीक अवलोकन करने में सक्षम होगा। इसरो के अनुसार मिशन को चार चरणों में विभाजित किया गया है- प्रक्षेपण चरण, परिनियोजन चरण, कमीशनिंग (सक्रियण) चरण और वैज्ञानिक संचालन चरण। प्रक्षेपण के बाद प्रारंभिक 90 दिनों तक उपग्रह का इन-ऑर्बिट चेकआउट किया जाएगा ताकि वैज्ञानिक कार्यों के लिए इसे पूरी तरह तैयार किया जा सके। हम आपको बता दें कि निसार का मुख्य उद्देश्य पृथ्वी की सतह का उच्च-गुणवत्ता वाला अवलोकन करना है। यह उपग्रह हिमालय एवं ध्रुवीय क्षेत्रों में हिमनदों की गति, वनों के मौसमी परिवर्तन और पारिस्थितिकी तंत्र की गतिशीलता, भूस्खलन, पर्वतीय सरकन और भूमि विकृति, कृषि उत्पादन, जल संसाधन और भूजल स्तर में होने वाले परिवर्तन तथा समुद्री तटों का कटाव और तटीय परिवर्तन से जुड़े आंकड़े उपलब्ध करवायेगा। इस उपग्रह द्वारा प्राप्त आंकड़े जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक आपदाओं की तैयारी, पर्यावरणीय नीतियों और सतत विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होंगे।

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निसार पूरे विश्व से डेटा एकत्र करेगा और इसका उपयोग व्यावसायिक तथा वैज्ञानिक उद्देश्यों के लिए किया जाएगा। इस डेटा का उपयोग दुनिया भर की सरकारों और वाणिज्यिक संस्थाओं द्वारा बड़े पैमाने पर किया जाएगा। सभी देश विभिन्न अनुप्रयोगों के लिए निसार के डेटा का लाभ उठाएंगे, जिससे भारतीय अंतरिक्ष इंजीनियरिंग की ताकत का प्रदर्शन होगा। यही इस मिशन का मुख्य महत्व है। हम आपको बता दें कि इसरो इस डेटा का प्रसंस्करण करेगा और इसका अधिकांश हिस्सा ‘ओपन-सोर्स’ के रूप में उपलब्ध कराएगा, ताकि दुनिया भर के उपयोगकर्ता इसे आसानी से प्राप्त कर सकें।

हम आपको बता दें कि निसार में दो प्रकार के सिंथेटिक अपर्चर रडार (SAR) लगाए गए हैं। इसमें एल-बैंड (L-band) रडार– नासा द्वारा विकसित है और एस-बैंड (S-band) रडार– इसरो द्वारा विकसित है। इन रडारों की विशेषता है कि ये बादलों को भेदकर दिन-रात किसी भी समय पृथ्वी की सतह की स्पष्ट तस्वीरें लेने में सक्षम हैं। इसके अतिरिक्त, इसमें 12 मीटर व्यास का विशाल तैनाती योग्य एंटीना लगाया गया है, जो इस प्रकार का पहला प्रयास है।

इसके अलावा, निसार मिशन को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष सहयोग का मील का पत्थर माना जा रहा है क्योंकि नासा ने इसमें एल-बैंड रडार के अलावा उच्च गति डाटा डाउनलिंक प्रणाली, जीपीएस रिसीवर और वैश्विक डाटा वितरण प्रणाली का विकास किया है वहीं इसरो ने उपग्रह बस (satellite bus), एस-बैंड रडार का निर्माण किया, प्रक्षेपण प्रणाली लगाई है और उपग्रह संचालन का काम भी कर रहा है। दोनों एजेंसियों की इस साझेदारी ने वैश्विक स्तर पर अंतरिक्ष विज्ञान में विश्वास और तकनीकी आदान-प्रदान का नया मानक स्थापित किया है।

भारत को होने वाले लाभ की बात करें तो आपको बता दें कि इससे कृषि उत्पादन और फसल बीमा योजनाओं की निगरानी, जल संसाधनों का सटीक प्रबंधन, बाढ़ और भूस्खलन जैसी आपदाओं की शीघ्र चेतावनी, शहरी विकास और स्मार्ट सिटी परियोजनाओं की निगरानी की जा सकेगी और पर्यावरणीय बदलावों का विश्लेषण एवं जलवायु अनुकूलन कार्यक्रमों को मजबूत किया जा सकेगा। यह उपग्रह न केवल भारत बल्कि संपूर्ण विश्व को उच्च गुणवत्ता का वैज्ञानिक डेटा उपलब्ध कराएगा।

बहरहाल, निसार का प्रक्षेपण भारत और अमेरिका के बीच विश्वसनीय अंतरिक्ष साझेदारी का प्रतीक है। यह मिशन न केवल पृथ्वी विज्ञान में नई संभावनाओं के द्वार खोलेगा, बल्कि जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं से निपटने की वैश्विक क्षमता को भी बढ़ाएगा। निसार उपग्रह के आंकड़े नीति निर्माण से लेकर आम जनजीवन तक सकारात्मक प्रभाव डालेंगे।

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