By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Sep 07, 2026
बेंगलुरु, सात सितंबर भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष वी नारायणन ने इसरो के निजीकरण को लेकर जताई जा रही चिंताओं को खारिज करते हुए सोमवार को कहा कि अंतरिक्ष एजेंसी अब भी एक सरकारी संगठन है। नारायणन ने कहा कि इसरो भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र के पारिस्थितिकी तंत्र के विस्तार के लिए निजी कंपनियों और स्टार्टअप के साथ मिलकर काम कर रहा है। नारायण की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब इसरो के नौ कर्मचारी संगठनों ने उन्हें चार सितंबर को पत्र लिखकर विनिर्माण और संचालन संबंधी कामकाज निजी संस्थाओं को सौंपे जाने के प्रस्ताव पर आधिकारिक स्पष्टीकरण मांगा है।
कुल 450 उद्योग हमारे लिए काम कर रहे हैं।” कर्मचारी संगठनों की ओर से जताई गई चिंताओं पर नारायणन ने कहा, “निश्चित तौर पर मेरे सहयोगियों की जो भी चिंताएं हैं, वे जायज हैं। उन्हें स्पष्टीकरण देना हमारी जिम्मेदारी है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि इसरो का निजीकरण नहीं किया गया है और यह अब भी एक सरकारी संगठन है। नारायणन ने कहा, “हम काम कर रहे हैं-यह एक सरकारी निवेश है और हम उसी के तहत काम कर रहे हैं।
लेकिन बात बस इतनी है कि अब हमारे पास बहुत सारी गतिविधियां हैं। देश में अंतरिक्ष क्षेत्र के पारिस्थितिकी तंत्र और अर्थव्यवस्था, दोनों का बढ़ना जरूरी है।” इसरो के भीतर अलग-अलग संगठनों की ओर से उठाई जा रही चिंताओं से जुड़े सवाल पर नारायणन ने कहा, “हमारे 20,000 कर्मचारी हैं... हम कर्मचारियों की चिंताओं का समाधान करेंगे।” उन्होंने कहा कि इसरो की एक व्यवस्था है और वह नियमित रूप से अपने कर्मचारियों से बातचीत करता है। जब नारायणन से इसरो से वैज्ञानिकों के इस्तीफे के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी में 20,000 कर्मचारी हैं, जिनमें 8,000 से ज्यादा वैज्ञानिक शामिल हैं।
उन्होंने कहा, “आंकड़ों पर गौर करें तो पिछले पांच-छह वर्षों में हर साल लगभग 150 लोगों ने इस्तीफा दिया है। किसी भी संस्था में यह सामान्य बात है।” नारायणन ने इस बात पर जोर दिया कि भारत की बढ़ती अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाओं के लिए प्रक्षेपण की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी करने की जरूरत होगी। उन्होंने कहा, “देश को हर साल लगभग 50 प्रक्षेपण यान की जरूरत है।
हमें आगे बढ़ना होगा।” हर साल 50 प्रक्षेपण का लक्ष्य निर्धारित करने की व्यवहार्यता पर नारायणन ने कहा कि जब वह 43 साल पहले इसरो से जुड़े थे, तब तीन साल में एक प्रक्षेपण होता था। उन्होंने कहा, “बहुत सारी गतिविधियां चल रही हैं। शायद बाहरी दुनिया को केवल एक-दो चीजों के बारे में पता है, लेकिन इसरो से जुड़ी हर गतिविधि की जानकारी सामने रखना हमारी जिम्मेदारी है।
हर साल 50 प्रक्षेपण की बात सच होने वाली है।” नारायणन ने कहा कि यह लक्ष्य “भारत में भारतीयों के जरिये ही हासिल किया जाएगा।” उन्होंने स्पष्ट किया कि इसरो के पास बजट की कोई कमी नहीं है और अंतरिक्ष एजेंसी को जिस चीज की जरूरत होती है, सरकार उसे उपलब्ध कराती आई है। नारायणन ने कहा, “अगर हम ज्यादा खर्च करते हैं, तो सरकार और राशि देने के लिए तैयार है। इसलिए अंतरिक्ष विभाग के सचिव के तौर पर मैं सरकार से सिर्फ बजट आवंटित करने का अनुरोध करता हूं।
हम जो भी मांगते हैं, सरकार वह उपलब्ध करा रही है। बजट की कोई कमी नहीं है।” इस बीच, भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र (इन-स्पेस) के अध्यक्ष पवन गोयनका ने यहां संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि वे जो भी काम कर रहे हैं, वह अंतरिक्ष नीति के अनुरूप है। उन्होंने इसरो प्रमुख की इस बात को दोहराया कि संगठन की परियोजनाएं बिना किसी रुकावट, देरी, बजट के अभाव या कर्मचारियों की कमी के पूरी तरह से योजना के अनुसार आगे बढ़ रही हैं।
गोयनका ने कहा कि यह इसरो बनाम उद्योग का मामला नहीं है, बल्कि इसरो और उद्योग मिलकर दुनिया का मुकाबला कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “अभी हमारी अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था करीब आठ अरब अमेरिकी डॉलर की है। हमारा लक्ष्य 2033 तक इसे 44 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाना है।
इसरो या उद्योग यह काम अकेले नहीं कर सकते। इसके लिए उद्योगों और इसरो को मिलकर काम करना होगा। इसरो पिछले कई वर्षों की तरह बड़े स्तर पर सहयोग देता रहेगा।