Prajatantra: गायब हो रहे आम जनता के मुद्दे, चुनावी प्रचार में हावी हुआ धर्म और आरक्षण

By अंकित सिंह | May 02, 2024

2024 लोकसभा चुनाव को लेकर दो चरण के मतदान हो चुके हैं। अभी भी पांच चरणों की वोटिंग बाकी है। इसके लिए चुनाव प्रचार जबरदस्त तरीके से चल रहा है। इन सब के बीच कांग्रेस और भाजपा में वार-पलटवार का दौर भी जबरदस्त तरीके से जारी है। हालांकि, आम लोगों को इस बात की उम्मीद होती है कि चुनाव के दौरान नेता मुद्दे की बात करेंगे, काम की बात करेंगे, भविष्य की रणनीति की बात करेंगे। लेकिन ऐसा लग रहा है कि अब चुनावी प्रचार में धर्म और जाति का मुद्दा हावी हो चुका है। जहां भाजपा खुले तौर पर कांग्रेस पर मुस्लिम तुष्टिकरण का आरोप लगा रही है और दावा कर रही है कि कांग्रेस ओबीसी का रिजर्वेशन कम करके मुसलमानों को दे सकती है। तो वहीं कांग्रेस की ओर से दावा किया जा रहा है कि भाजपा आरक्षण और संविधान को खत्म करने की कोशिश में है। इसको लेकर दोनों ओर से अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। 

कांग्रेस का दावा

कांग्रेस ने आरोप लगा रही है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा इस लोकसभा चुनाव में हार के डर से परेशान हैं और ऐसे में वह लगातार ध्रुवीकरण का सहारा ले रहे हैं। राहुल गांधी कह रहे हैं कि दलितों, OBC समाज, आदिवासियों और अल्पसंख्यकों समेत 90% भारत के साथ भयंकर अन्याय हो रहा है। देशभक्ति इनको न्याय दिलाना है और नरेंद्र मोदी इससे ही घबरा रहे हैं! ये मेरे लिए राजनीतिक मुद्दा नहीं है, ये मेरी लाइफ का मिशन है। वह दावा कर रहे हैं कि अगर भाजपा सत्ता में लौटी तो ‘‘संविधान को फाड़ कर फेंक देगी’’। गांधी ने आरोप लगाया, ‘‘ भाजपा कह रही हैं कि वे आरक्षण के खिलाफ नहीं हैं। यदि आप आरक्षण के खिलाफ नहीं हैं तो आप सार्वजनिक क्षेत्र, रेलवे का निजीकरण क्यों कर रहे हैं। आप अग्निवीर योजना क्यों लाए? ये सभी काम आरक्षण व्यवस्था के विरुद्ध हैं।’ कांग्रेस के चुनावी वादों पर प्रकाश डालते हुए गांधी ने कहा कि ‘इंडिया’ के सत्ता में आने के बाद 50 प्रतिशत आरक्षण की सीमा हटा दी जाएगी। ’कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मोदी की मुसलमानों पर उनकी टिप्पणी के लिए आलोचना की और पूछा कि केवल अल्पसंख्यक समुदाय को ही क्यों निशाना बनाया जा रहा है। 

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चुनावी दांव-पेंच

चुनाव को लेकर एक पुरानी कहावत है कि प्रचार के दौरान विकास के दावे तो सभी राजनीतिक दल करते हैं। लेकिन जीत उसी की होती है जो लोगों की भावनाओं को छू पाता है। यही कारण है कि इस बार के चुनाव में भी अपने-अपने तरह से लोगों के लिए भावनात्मक मुद्दे उठाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में मंगलसूत्र का भी मामला आया। इसी कड़ी में विरासत का भी मामला आया। भाजपा लगातार धर्म की राजनीति कर रही है। धर्म के काट के तौर पर कांग्रेस ने जाति का मुद्दा उठा दिया है। कांग्रेस को ऐसा लगता है कि धर्म की राजनीति को जातिवाद से काटा जा सकता है। भाजपा जहां हिंदुओं को लामबंद करने की कोशिश कर रही है। तो वहीं दूसरी ओर जातियों में बंटी हिंदुओं को कांग्रेस आरक्षण के नाम पर अपनी ओर खींचना चाहती है। 

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