कोरोना के खात्मे की प्रयोगभूमि बनेगा भारत, बस सबके साथ की जरूरत है

By ललित गर्ग | Mar 30, 2020

कोरोना वायरस अब तक के मानव इतिहास का सबसे बड़ा संकट है, क्योंकि जब भी कोई प्राकृतिक संकट आया, विश्वयुद्ध की स्थितियां बनीं या किसी महामारी ने घेरा तो कुछ देशों अथवा राज्यों तक ही वह सीमित रहा लेकिन इस बार का संकट ऐसा है, जिसने समूचे विश्व एवं पूरी मानव जाति को संकट में डाल दिया है। इस महासंकट से निजात पाने के लिए दुनिया की बड़ी-बड़ी शक्तियां धराशायी हो गईं या स्वयं को निरुपाय महसूस कर रही हैं, ऐसे समय में दुनिया की नजरें भारत की ओर लगी हैं। क्योंकि भारत की जनता एवं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपनी सुनियोजित तैयारियों, संकल्प एवं संयम के जरिये कोरोना को दूसरे चरण में बांध रखा है।

दुनिया भारत की ओर आशाभरी निगाहों से देख रही है। भारत में इस महामारी से लड़ने की तैयारी एवं जिजीविषा की दुनिया ने प्रशंसा की है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी स्वीकार किया है कि जनसंख्या के लिहाज से दुनिया के दूसरे सबसे बड़े देश भारत के पास कोरोना से निपटने की व्यापक क्षमता है, क्योंकि इसके पास चेचक और पोलियो को खत्म करने का अनुभव है। भारत की क्षमता उस कोरोना को खत्म करने में मददगार होगी, जिससे दुनिया भर में 30,000 से अधिक लोग मारे गए हैं और छह लाख से अधिक लोग संक्रमित हुए हैं। जबकि भारत में कोरोना से संक्रमित रोगियों की संख्या 933 है।

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कोरोना वायरस की स्थितियों ने जीवन में अस्थिरता एवं भय व्याप्त कर रखा है। इस जटिल माहौल में सरकार की दूरदर्शितापूर्ण नीतियां, भारत के लोगों की रोग-प्रतिरोधक क्षमता, सोशल डिस्टेंस एवं लॉकडाउन सफल उपक्रम बनकर प्रस्तुत हो रहा है, इस महासंकट को लेकर एक सकारात्मक वातावरण निर्मित हुआ है। ये प्रयोग एवं उपक्रम समूची दुनिया को कोरोना से लड़ने की शक्ति से अवगत कराते हुए बड़ी शक्तियों एवं विभिन्न राष्ट्रों को कोरोना-मुक्ति के लिए प्रेरित कर रही है। सरकारी स्तर पर हस्तक्षेप कर भारत ने चेचक और पोलियो को खत्म कर दुनिया को बड़ा उपहार दिया है। एक बार फिर दुनिया चाहती है कि कोरोना के खिलाफ लड़ाई में नेतृत्व कर भारत दुनिया को दिखाए कि क्या किया जा सकता है, कैसे इस महासंकट से सम्पूर्ण मानवता को मुक्ति दिलाई जा सकती है।

भारत के प्रति दुनिया में बदलते नजरिये एवं बढ़ती सकारात्मक सोच को एक उजाला बनाकर प्रस्तुति देना होगा, इसके लिये देश के प्रत्येक नागरिक को अब अच्छी तरह से समझ लेना होगा कि कोरोना के आसन्न खतरे को हल्के में लेना देश के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है। कुछ नासमझ लोग अभी भी इसी महामारी की गंभीरता को नहीं समझ पा रहे हैं और भूलें करने को तत्पर हैं। इन भूलों की बड़ी कीमत चुकानी पड़ सकती है। क्योंकि अभी तक विज्ञान कोरोना महामारी से बचने के लिए कोई निश्चित उपाय नहीं सुझा सका है और न ही इसकी कोई वैक्सीन बन पाई है। ऐसी स्थिति में भारत में कोरोना के गहराते खतरे को देखते हुए हर किसी की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है क्योंकि भारत जैसे लगभग डेढ़ अरब की आबादी वाले देश पर कोरोना का संकट कोई सामान्य बात नहीं है। कोरोना के इसी आसन्न खतरे को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक सप्ताह में दो बार राष्ट्र के नाम अपने संदेश में देशवासियों से बचाव के लिए संयम का संकल्प लेने का आह्वान किया और घरों से बाहर नहीं निकलने की अपील की है। कोरोना यानी कोई भी रोड पर नहीं का संकल्प लें। प्रधानमंत्री स्वयं दिन-रात इस महासंकट से मुक्ति के महासंग्राम का नेतृत्व कर रहे हैं। इस जटिल दौर में सबकी निगाहें उनके प्रयत्नों की ओर लगी हुई हैं, जिनसे इंसानी जिस्मों पर सवार कोरोना का ज्वर उतारा जा सके। ऐसा प्रतीत होता है कि नरेन्द्र मोदी का कोरोना मुक्ति का महासंकल्प इन घने अंधेरों में इंसानों को जागरूक करके कोरोना मुक्ति का आधार प्रस्तुत कर रही है।

यह समय भारत की जनता के लिये कसौटी का समय है। उन्हें इक्कीस दिन के लॉकडाउन को हर हाल में सफल बनाना चाहिए ताकि उस असाधारण संकट से, जिसने बड़े देशों तक का आत्मविश्वास डिगा दिया है, निपटने में हमारी क्षमता के प्रति दुनिया का भरोसा बढ़े। कोरोना वायरस ने अमेरिका, इटली और स्पेन जैसे अग्रणी देशों को अंधेरों में धकेल दिया है। इन देशों में कोरोना ने हजारों लोगों की जान ली है। वे मजबूर हैं और उन्हें कोई समाधान नहीं दिख रहा। इन देशों ने कुछ गलतियां की हैं, हमने उन गलतियों को सबक बनाया, यह भी हमारी इस लड़ाई को सार्थक मुकाम देने का माध्यम बनेगा। इसी लॉकडाउन से चीन ने सबसे पहले इस महामारी पर नियंत्रण स्थापित किया है। वहां लोगों को अलग-थलग करने और एक दूसरे के संपर्क में न आने देने से वायरस की मारक क्षमता घटी और इसी आधार पर भारत में हम इस महामारी को दूसरे चरण पर रोके हुए हैं।

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भारत की दूरदर्शिता एवं मानवतावादी सोच का ही परिणाम है कि हम अपने देश की सुरक्षा के साथ-साथ दुनिया को सुरक्षित देखना चाहते हैं, हमारी इसी सोच की दुनिया में प्रशंसा हो रही है। प्रशंसा इसलिये भी हो रही है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत की जनता को जीवन निर्वाह के साधनों में अवरोध न आने का आश्वासन दिया है, तरह-तरह की आर्थिक एवं नीतिगत प्रक्रियाओं में राहत दी है। प्रशंसा का एक बड़ा कारण यह भी है कि मोदी ने कोरोना के खिलाफ सार्क देशों को एकजुट होकर लड़ने के लिए प्रेरित किया। मोदी ने जी-20 देशों की विशेष वर्चुअल बैठक में सदस्य देशों को अर्थव्यवस्था की चिन्ता न करते हुए मानव जीवन को बचाने के लिये तत्पर होने को प्रेरित किया है, मोदी की इसी व्यापक एवं मानवतावादी सोच से भी भारत की छवि मजबूत हुई है।

भारत में कोरोना वायरस से महासंग्राम में सफलता के प्रति दुनिया इसलिये भी आश्वस्त है कि मोदी सरकार हर छोटी-बड़ी घटना को बड़ी गंभीरता से लेते हुए तत्परता से निर्णय ले रही है। अपनी सूझबूझपूर्ण नीतियों एवं प्रयोगों से भारत इस वायरस को सामुदायिक स्तर पर फैलने से रोक पाने में सफल होगा, इसके कुछ बड़े कारण हैं। एक बड़ा कारण है कि भारत के लोगों में इस वायरस को अन्य देशों के लोगों की तुलना में अधिक झेलने की क्षमता है। भारत सरकार चीन से अपने 400 से अधिक नागरिकों को भारत ले आई, जब वहां यह महामारी अपने चरम पर थी। उनमें से एक भी भारतीय पॉजिटिव नहीं पाया गया। इसी तरह इटली के 18 नागरिक राजस्थान लाए गये थे, जो अनेक जगहों पर गए और अनेकों लोगों के संपर्क में आए। लेकिन एक ड्राइवर को छोड़कर कोई भी वायरस से संक्रमित नहीं पाया गया। ईरान से भी 200 भारतीय नागरिकों को लाया गया और जैसलमेर में विशेष बनाये गये आपातकालीन चिकित्सालय में चौदह दिनों तक अलग-थलग रखा गया। जांच में उनमें से भी कोई पॉजिटिव नहीं पाया गया।

मेडिकल चिकित्सा के विशेषज्ञों की राय है कि भारतीयों की रोग प्रतिरोधक क्षमता तुलनात्मक रूप से चूंकि अधिक है, इसीलिए यह उम्मीद की जा रही है कि देश में इस वायरस के सामुदायिक स्तर पर प्रसार को रोक पाने की कोशिश सफल होगी। इस कार्य में डॉक्टरों एवं चिकित्सा से जुड़े हर व्यक्ति का योगदान अविस्मरणीय है, मीडिया एवं प्रशासन भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। ऐसे थोड़े भी मर-मिटने वाले लड़ाके होंगे तो वे करोड़ों की लाज रखेंगे और उनमें प्राण फूँकेंगे। नरेन्द्र मोदी एवं उनके सहयोगी भी जनजीवन में कोरोना वायरस के खिलाफ वातावरण को प्रतिस्थापित करने में बहुमूल्य योगदान दे रहे हैं, जिसकी अनुगूंज अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर भी सुनाई दी है। इस कल्याणकारी उपक्रम यानी कोरोना मुक्ति यात्रा की सफलता के लिए जरूरी है कि इस दिशा में सोचने वाले लोग इस यात्रा के साथ जुड़ें और मोदी के स्वरों में स्वर मिलाकर बोलें। भारत कोरोना मुक्ति की प्रयोग भूमि बनने जा रहा है, एक नए इतिहास का सृजन हो रहा है। इस नए बनते इतिहास को भयभीत होकर नहीं, बल्कि निडरता के साथ देखना और समझना होगा।

-ललित गर्ग

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