By अनन्या मिश्रा | Jul 03, 2026
गर्मियों और बारिश के मौसम में मिलने वाला कटहल एक पौष्टिक फल है। इसको स्वाद के साथ 'न्यूट्र्रिशन का खजाना' भी माना जाता है। कटहल में विटामिन C, फाइबर, पोटेशियम, मैग्नीशियम और कई तरह के एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं। जो इम्यूनिटी, पाचन और हार्ट हेल्थ को दुरुस्त रखते हैं। एक स्टडी के मुताबिक कटहल में विटामिन, प्रोटीन, मिनरल्स और फाइटोकेमिकल्स होते हैं। इसमें ऐसे गुण पाए जाते हैं, जो शरीर में इंफ्लेमेशन कम करने, कैंसर का खतरा कम करने और बैक्टीरिया से लड़ने में मदद करते हैं।
कटहल में विटामिन A, विटामिन C, फाइबर, मैग्नीशियम, पोटेशियम, कैल्शियम और थोड़ी मात्रा में प्रोटीन पाया जाता है। कटहल में एंटीऑक्सिडेंट और फाइटोकेमिकल्स भी होते हैं। यह शरीर को फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाते हैं।
कटहल में मौजूद विटामिन C इम्यून सिस्टम को सपोर्ट करता है और संक्रमण से बचाने में सहायता करता है।
कटहल में पोटेशियम पाया जाता है, जो बीपी को कंट्रोल करता है। इससे हार्ट संबंधी जोखिम भी कम होते हैं।
कटहल में कई एंटी-ऑक्सीडेंट्स और फाइटोकेमिकल्स पाए जाते हैं। यह सेल्स को डैमेज होने से बचाते हैं और इंफ्लेमेशन कम करते हैं।
इसमें विटामिन A और कैरोटेनॉयड्स होता है। इससे आई हेल्थ को सपोर्ट मिलता है।
इसमें मौजूद कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे मिनरल्स बोन हेल्थ को सपोर्ट करते हैं।
कटहल में पर्याप्त मात्रा में कार्बोहाइड्रेट पाया जाता है, जो आपके शरीर को एनर्जी देता है।
कटहल में मौजूद मैग्नीशियम नर्वस सिस्टम और मसल्स के सही तरह से कामकाज में मदद करता है।
कटहल के सेवन से हड्डियां मजबूत होती हैं।
इसके अलावा यह स्किन और हेयर के लिए भी फायदेमंद होता है।
बता दें कि कच्चे और पके हुए कटहल की न्यूट्रिशनल वैल्यू एक जैसी नहीं होती है। इन दोनों में विटामिन, फाइबर और मिनरल्स होते हैं। लेकिन इसकी मात्रा और शरीर पर इसका प्रभाव थोड़ा अलग हो सकता है।
कच्चे कटहल में स्टार्च और फाइबर ज्यादा होता है। इसलिए यह लंबे समय तक पेट को भरा रखता है।
इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है। जिसका मतलब है कि यह ब्लड शुगर को तेजी से नहीं बढ़ाता है।
वहीं कटहल पकने स्टार्च शुगर में चेंज हो जाता है। इसलिए इसमें नेचुरल शुगर की मात्रा अधिक होती है।
सब्जी के रूप में कच्चा कटहल खाया जाता है। वहीं पका कटहल फल के रूप में खाया जाता है।
कच्चे और पके कटहल में विटामिन C, एंटीऑक्सीडेंट और पोटेशियम पाया जाता है। इस यह दोनों ही सेहत के लिए लाभकारी होते हैं।
हालांकि कच्चे या पके कटहल में कौन सा ज्यादा फायदेमंद है, यह व्यक्ति की जरूरत पर निर्भर करता है।
कच्चा कटहल वेट और ब्लड शुगर कंट्रोल करने वालों के लिए बेहतर ऑप्शन है। वहीं पका कटहल पोषक तत्वों और एनर्जी का अच्छा सोर्स है।
भिंडी
दूध और डेयरी प्रोडक्ट्स
पपीता
राजमा-छोले
पान
शहद
कच्चे कटहल की सब्जी बनाकर खा सकते हैं।
कच्चे कटहल का इस्तेमाल बिरयानी और पुलाव आदि में कर सकते हैं।
कटहल की पकौड़ी भी काफी अच्छी लगती है।
उबले हुए कच्चे कटहल से कबाब, कटलेट या टिक्की बना सकती हैं।
इसको दाल या सांभर में डाल सकते हैं।
कट्टे कटहल का कोफ्ता और अचार डाल सकते हैं।
कटहल के बीजों को भूनकर या उबालकर खा सकती हैं।
कटहल के बीजों को करी या सब्जी में डालकर भी खा सकते हैं।
पके हुए कटहल को सीधे स्नैक्स या नाश्ते में खा सकते हैं।
वहीं पके हुए कटहल का फ्रूट सलाद बनाकर खा सकते हैं।
ज्यादा मात्रा में कटहल खाने से कुछ लोगों को समस्या हो सकती है।
कटहल में फाइबर पाया जाता है। ऐसे में इसको ज्यादा खाने से पेट फूलना, गैस, अपच या पेट में भारीपन जैसी समस्या महसूस हो सकती है।
कटहल से कुछ लोगों को एलर्जी भी हो सकती है। इसकी वजह से स्किन रैश, खुजली, सूजन या सांस लेने में समस्या हो सकती है।
पके हुए कटहल में नेचुरल शुगर होता है। ऐसे में ज्यादा इसको खाने से ब्लड शुगर बढ़ सकता है। वहीं डायबिटिक लोगों को इसका सेवन कम करना चाहिए।
ज्यादा मात्रा में पका कटहल खाने से वेट बढ़ सकता है। इसलिए संतुलित मात्रा में इसका सेवन करना चाहिए।
जिनको किडनी डिजीज है।
जिनको इससे एलर्जी है।
जिन लोगों को डाइजेस्टिव इश्यू हैं।
जिनकी हाल ही में सर्जरी हुई है।
जिनकी दवाएं रेगुलर चल रही हैं।
हालांकि इसकी कोई मात्रा तय नहीं है। लेकिन एक हेल्दी व्यक्ति को एक दिन में करीब 1-2 कप कटहल खाना सेफ माना जाता है।
अगर आप पहली बार कटहल खा रहे हैं, या जिनको पाचन संबंधी समस्या रहती है, तो कम मात्रा में इसका सेवन करें।
एक बार में कटहल खाने से ब्लोटिंग, गैस या अपच की समस्या हो सकती है।
कटहल पौष्टिक है, लेकिन किसी भी फल की तरह इसको भी हमेशा संतुलित मात्रा में खाना चाहिए।