Jagannatha Ratha Yatra 2024: हर साल बेहद धूमधाम से निकाली जाती है जगन्नाथ रथ यात्रा, जानिए इसके पीछे का कारण

By अनन्या मिश्रा | May 20, 2024

हिंदू पंचांग के मुताबिक हर साल आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को भगवान जगन्नाथ की भव्य रथ यात्रा का आयोजन किया जाता है। इस भगवान जगन्नाथ बड़े भाई बलराम और बहन सुभद्रा के साथ नगर भ्रमण पर निकलते हैं। इस रथ यात्रा को महोत्सव और गुंडिचा नाम से भी जाना जाता है। बता दें कि इस बार 07 जुलाई 2024 से रथ यात्रा की शुरूआत हो रही है। धार्मिक शास्त्रों के मुताबिक भगवान जगन्नाथ की पूजा-अर्चना करने से व्यक्ति को विशेष फल की प्राप्ति होती है।

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क्यों निकाली जाती है जगन्नाथ रथ यात्रा

पद्म पुराण के अनुसार, एक बार सुभद्रा ने भगवान जगन्नाथ से नगर देखने की इच्छा जाहिर की। तब भगवान जगन्नाथ ने देवी सुभद्रा को रथ पर बैठाकर नगर दिखाया। इसके बाद वह अपनी मौसी के घर गए और वहां पर सात दिनों तक रुके। तभी से हर साथ भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा निकालने की परंपरा शुरू हो गई।

जगन्नाथ रथ यात्रा की खासियत

भगवान जगन्नाथ के रथ में 16 पहिए लगे होते हैं और इस रथ को शंखचूड़ नामक रस्सी से खींचा जाता है। बता दें कि इस रथ को बनाने के लिए नीम की लकड़ी का इस्तेमाल किया जाता है।

भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा तीन विशालकाय और भव्य रथों पर विराजमान होते हैं। इनमें से सबसे पहला रथ बलराम जी का चलता है और बीच में सुभद्रा और सबसे पीछे भगवान जगन्नाथ का रथ चलता है।

इस रथ को बनाने में कील का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। धार्मिक शास्त्रों के मुताबिक किसी भी शुभ व आध्यात्मिक कार्य को करने के लिए कील या कांटे का उपयोग करना अशुभ माना जाता है।

बता दें कि भगवान बलराम और देवी सुभद्रा का रथ लाल रंग का होता है, तो वहीं भगवान जगन्नाथ के रथ का रंग लाल या पीला होता है।

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