By अभिनय आकाश | Sep 22, 2026
संयुक्त राष्ट्र यानी यूएन के सबसे बड़े मंच से भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने एक बार फिर दुनिया की तथाकथित महाशक्तियों को सीधा और कड़ा आईना दिखाया है। न्यूयॉर्क में चल रहे 81वें संयुक्त राष्ट्र महासभा सत्र के दौरान आयोजित पार्टनर्स फॉर मल्टीलटरलिज्म समिट में दुनिया भर के दर्जनों देशों के शीर्ष राजनयिक और वैश्विक नेता मौजूद थे। इस उच्च स्तरीय शिखर सम्मेलन को भारत ने खुद सह प्रायोजित किया था। इस मंच से जयशंकर ने साफ कर दिया कि दुनिया आज जिस दौराहे पर खड़ी है, वहां खोखली बयानबाजी नहीं बल्कि ठोस फैसलों की दरकार है। डॉक्टर जयशंकर ने अपने संबोधन की शुरुआत में ही वैश्विक व्यवस्था के संकट को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि दुनिया दशकों से एक स्वाभाविक रिबैलेंसिंग की तरफ बढ़ रही थी। लेकिन बड़े देशों के बीच की अंधी प्रतिस्पर्धा, भू-राजनीतिक तनाव और प्रत्यक्ष युद्धों ने हालात को बेहद खतरनाक बना दिया है। जयशंकर ने दो टूक चेतावनी दी कि यदि इस बेलगाम टकराव को तुरंत नहीं रोका गया तो दशकों से बनी अंतरराष्ट्रीय सहयोग की भावना पूरी तरह खत्म हो जाएगी।
एस जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र की कार्यशैली में सुधार की जरूरत पर भी जोर देते हुए रिफॉर्मड मल्टीलटरलिज्म यानी सुधारवादी बहुपक्षवाद की मांग को दोहराया। उन्होंने ज्यादा भागीदारी और पारदर्शी तरीके से फैसले लेने की जरूरत बताई ताकि वैश्विक संस्थाएं आज की बदलती दुनिया की चुनौतियों का ज्यादा प्रभावी ढंग से सामना कर सकें। उन्होंने कहा कि बंद कमरों में लिए जाने वाले फैसले अब नहीं चलेंगे। जब तक सभी अंतरराष्ट्रीय नियमों और कानूनों का पूरी ईमानदारी से पालन नहीं होगा और निर्णय प्रक्रिया पारदर्शी व समावेशी नहीं होगी तब तक संयुक्त राष्ट्र की साख बहाल नहीं हो सकती। सैकड़ों देशों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में डॉ. एस जयशंकर का यह कड़ा संदेश साबित करता है कि भारत अब केवल श्रोता नहीं है बल्कि दुनिया की दिशा तय करने वाला एक निडर और स्पष्ट नेतृत्वकर्ता बनकर उभर चुका है।