टूट गया भारत के सब्र का बांध, आधी रात फोन घुमाकर जयशंकर ने अमेरिका को डांटा

By अभिनय आकाश | Jun 13, 2026

पश्चिम एशिया आज उस ज्वालामुखी की तरह है जो फट चुका है। चारों तरफ बारूद की गंध है। आसमान से बम बरस रहे हैं और समंदर की लहरें अब लाल हो रही हैं। लेकिन इस युद्ध की आग में जब बेगुनाह भारतीयों की जान चली जाती है तो दिल्ली का सिंहासन डोल जाता है। होर्मुज के समंदर में अमेरिका ने वो कायराना हरकत की जिसने भारत के सब्र का बांध तोड़ दिया। भारत के तीन जांबाज नाविकों की जान चली गई और वजह महाशक्ति होने का अहंकार। ये  दिन इतिहास में अमेरिका की उस सशस्त्र डकैती के नाम पर दर्ज होगा जिसने तीन भारतीय परिवारों को उम्र भर का दर्द दे दिया। लेकिन कहानी यहां खत्म नहीं होती है। अमेरिका ने सोचा था कि वह झूठ बोलेगा और भारत मान लेगा। 

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डेक कैडेड आदित्य शर्मा इंजन फिटर शिवंद चौरसिया और चीफ इंजीनियर पटनाला सुरेश यह सिर्फ नाम नहीं यह भारत के वह बेटे हैं जिनके प्राण अमेरिका की गलतफहमी और अहंकार ने छीन लिए। इन तीन भारतीयों की जान जाने की खबर जैसे ही भारत पहुंची, देश का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। अब देखिए अमेरिका की चालाकी। हमला खुद किया, भारतीयों की जान खुद ली लेकिन दुनिया के सामने आकर क्या बोले। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा कर दिया कि यह हमला ईरान के ड्रोंस ने किया है। ट्रंप ने कोशिश की कि वह भारत को बरगला लिया जाए और इस पूरे कांड का ठीकरा ईरान पर फोड़ दिया जाए। अमेरिका चाहता था कि भारत इस पर ईरान से लड़ने लगे और अमेरिका पर्दे के पीछे अपनी इस बड़ी गलती को छिपा ले। लेकिन डोनाल्ड ट्रंप शायद भूल गए कि सामने मोदी का भारत है। भारत ने उनकी बातों पर भरोसा करने की बजाय अपनी खुद की हाई लेवल जांच शुरू की। 

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सेटेलाइट डाटा खंगाले गए। बचे हुए नाविकों के बयान लिए गए और वह सच सामने आया जिसने अमेरिका की पूरी प्लानिंग को मिट्टी में मिला दिया। भारत ने कंफर्म किया कि हमला किसी ईरानी ड्रोन ने नहीं बल्कि अमेरिकी नौसेना के जहाज से हुआ है। अमेरिका की चाल पकड़ी गई और अब भारत का स्टैंड क्लियर एंड लाउड था। हमला तुमने किया है और हिसाब भी तुम ही दोगे। जब पानी सिर से ऊपर चला गया तब हरकत में आए भारत के चाणक्यनी एस जयशंकर उन्होंने ना केवल अमेरिकी राजदूत को दिल्ली में तलब किया बल्कि सीधे अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो को फोन लगाया। अब बताया जा रहा है कि यह बातचीत किसी कूटनीतिक मुलाकात जैसी बिल्कुल नहीं थी। जयशंकर साहब ने रूबियो को फोन पर बुरी तरह हड़काया। 

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