जीवन की चुनौतियों से जूझते हुए बने जेम्स वाट महान वैज्ञानिक

By टीम प्रभासाक्षी | Jan 19, 2022

दुनिया में औद्योगिक क्रांति लाने वाले जेम्स वाट ने बचपन में ही भाप की शक्ति को भांप लिया था और अपनी इसी विश्लेषण शक्ति के बल पर वह आगे चलकर भाप का इंजन बनाने में सफल हुए। उन्नीस जनवरी 1736 को स्कॉटलैंड के ग्रीनॉक रेनफ्रेशाइर में जन्मे जेम्स वाट के अविष्कार से जहां रेल इंजन बनाने में सफलता मिली वहीं इससे पूरी दुनिया में औद्योगिक क्रांति आ गई। विश्व ने उनके अविष्कार को विभिन्न रूपों में इस्तेमाल कर औद्योगीकरण की राह पकड़ ली, जिसके चलते मनुष्य आज धरती से बाहर निकलकर चांद सितारों की दुनिया में भी सेंध लगा चुका है।

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आज जब भी 'इंजन' शब्द की बात आती है तो सबसे पहले जेम्स वाट का ही नाम याद आता है। उन्होंने कहा कि कोई भी औद्योगिक क्षेत्र हो वहां किसी न किसी तरह का इंजन काम कर रहा होता है। औद्योगिक योगदान के क्षेत्र में जेम्स वाट का नाम सर्वोच्च श्रेणी के वैज्ञानिकों में लिया जा सकता है।

जेम्स वाट मैकेनिकल इंजीनियर थे। भाप के इंजन पर उनसे पहले भी कई वैज्ञानिक काम कर चुके थे, लेकिन आखिर में सबसे अच्छा इंजन विकसित करने का श्रेय जेम्स के खाते में ही गया। उनके बारे में कहा जाता है कि एक बार उन्होंने आग के ऊपर रखे बर्तन के ढक्कन को बार−बार ऊपर नीचे होते देखा। जेम्स वाट ने इससे अंदाज लगाया कि भाप में शक्ति होती है जिसके चलते बर्तन का ढक्कन ऊपर नीचे हो रहा है। बचपन में उनका यह विश्लेषण उनके बड़े होने पर भाप इंजन के अविष्कार का कारण बना और जेम्स वाट का नाम विज्ञान के इतिहास में अमिट हो गया।

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भाप का इंजन न सिर्फ रेल इंजन के अविष्कार का कारण बना बल्कि इससे कृषि जगत से लेकर अंतरिक्ष क्षेत्र तक क्रांति आ गई। स्कॉटलैंड की राष्ट्रीयता वाले ब्रिटिश नागरिक जेम्स वाट ने अनुसंधान कार्य के लिए ग्लासगो यूनिवर्सिटी को अपने संस्थान के रूप में चुना। 25 अगस्त 1819 को 83 साल की उम्र में दुनिया को महान खोज देने वाले इस अविष्कारक का निधन हो गया।

जीवनकाल में उन्हें 1800 में ग्लास्को विश्वविद्यालय ने डॉक्टर और लौज की मानद उपाधि प्रदान की। 1814 में विज्ञान अकादमी में उन्हें सम्मानित किया। वृद्धावस्था में उन्हें राजनीतिक विरोधो के साथ-साथ पारिवारिक दुखों का सामना करना पड़ा।

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