J&K में आतंक पर ऐसा चौतरफा प्रहार पहले नहीं देखा होगा, मोदी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति दिखा रही है कमाल

By नीरज कुमार दुबे | Jul 15, 2026

जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ सुरक्षाबलों का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। सीमा पार से आतंक फैलाने की हर साजिश को नाकाम करने के लिए सेना, पुलिस, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल और एनआईए एक साथ मोर्चा संभाले हुए हैं। पुंछ में आतंकवादियों का ठिकाना ध्वस्त करने से लेकर राजौरी में संदिग्ध आतंकवादियों की तलाश, सांबा में संदिग्ध ड्रोन की बरामदगी और पहलगाम नरसंहार के मुख्य साजिशकर्ता हाफिज सईद के खिलाफ गैर जमानती वारंट तक, हर मोर्चे पर स्पष्ट संदेश दिया गया है कि भारत अब आतंकवाद के प्रति किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरतेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की आतंकवाद को कतई बर्दाश्त नहीं करने की नीति अब जमीन पर लगातार दिखाई दे रही है और सुरक्षाबल आतंक के हर तंत्र को जड़ से समाप्त करने के अभियान में जुटे हैं।

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उधर, राजौरी जिले के थानामंडी क्षेत्र में सीसीटीवी चित्रों में दो संदिग्ध आतंकवादियों की गतिविधियां सामने आने के बाद व्यापक तलाश अभियान शुरू कर दिया गया। सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस के विशेष अभियान समूह और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की संयुक्त टुकड़ियां भंगहाई, हस्पलोट, करयोट, कोपरा टॉप तथा आसपास के गांवों में लगातार छानबीन कर रही हैं। भारी बारिश भी इस अभियान की गति को रोक नहीं सकी। यह कार्रवाई ऐसे समय हो रही है जब मंजाकोट क्षेत्र के जंगलों में मई से चल रहे अभियान के तहत दो से तीन छिपे आतंकवादियों की तलाश पहले से जारी है। स्पष्ट है कि सुरक्षाबल आतंकवादियों को किसी भी सुरक्षित ठिकाने का अवसर देने के पक्ष में नहीं हैं।

सुरनकोट क्षेत्र के सांगला और गुंथल गांवों में भी खुफिया जानकारी के आधार पर अभियान चलाया गया और पूछताछ के लिए कई संदिग्धों को हिरासत में लिया गया। वहीं डोडा जिले के गांडोह क्षेत्र के चांटी गांव में उस स्थानीय आतंकवादी के पैतृक घर की तलाशी ली गई जो अब पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से अपनी गतिविधियां संचालित कर रहा है। हालांकि वहां से कोई आपत्तिजनक सामग्री बरामद नहीं हुई, लेकिन यह कार्रवाई इस बात का संकेत है कि आतंकवादियों के स्थानीय संपर्कों और सहायता तंत्र पर भी लगातार नजर रखी जा रही है।

इसी बीच, सांबा जिले में भी सुरक्षा एजेंसियां सतर्क नजर आईं। सुबह की सैर पर निकले एक ग्रामीण को देवक क्षेत्र के पास खेत में एक संदिग्ध ड्रोन मिला। सूचना मिलते ही सेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियां मौके पर पहुंचीं और ड्रोन को अपने कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी। अब उसके तकनीकी स्वरूप, सामान ले जाने की क्षमता और संभावित सीमा पार संबंधों की गहन जांच की जा रही है। सीमा पार से ड्रोन के जरिये हथियार, गोला बारूद और नशीले पदार्थ भेजने की कोशिशों को देखते हुए इस बरामदगी को भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

उधर, आतंकवाद के खिलाफ कानूनी मोर्चे पर भी बड़ी कार्रवाई हुई है। पहलगाम में हुए जघन्य आतंकवादी हमले की जांच से जुड़े मामले में एनआईए की विशेष अदालत ने लश्कर-ए-तैयबा के सरगना हाफिज सईद के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया है। एनआईए ने अपने पूरक आरोपपत्र में उसे आरोपी बनाया है और अदालत ने माना कि निष्पक्ष तथा प्रभावी जांच के लिए उसकी गिरफ्तारी और हिरासत में पूछताछ आवश्यक है। हाफिज सईद को पहले ही वैश्विक आतंकवादी घोषित किया जा चुका है और उसे मुंबई हमलों का मुख्य साजिशकर्ता भी माना जाता है। अब पहलगाम में 26 निर्दोष लोगों, जिनमें अधिकांश पर्यटक थे, की हत्या के मामले में भी उसके खिलाफ कानूनी शिकंजा और कस गया है।

देखा जाये तो जम्मू-कश्मीर में एक साथ चल रही ये सभी कार्रवाइयां इस बात का प्रमाण हैं कि भारत अब आतंकवाद के खिलाफ केवल जवाब नहीं दे रहा, बल्कि उसके पूरे ढांचे को ध्वस्त करने की रणनीति पर काम कर रहा है। सीमा पार बैठे आतंक के सरगनाओं से लेकर उनके स्थानीय मददगारों और छिपे ठिकानों तक, हर कड़ी पर लगातार प्रहार हो रहा है। मोदी सरकार की स्पष्ट नीति है कि आतंकवाद और उसके संरक्षकों के लिए भारत में कोई जगह नहीं है। यही कारण है कि सुरक्षा अभियान, खुफिया कार्रवाई और कानूनी प्रक्रिया एक साथ आगे बढ़ रही हैं। संदेश साफ है कि आतंक फैलाने वालों के लिए अब बच निकलने का कोई रास्ता नहीं बचेगा और देश की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाली हर साजिश का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।

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