Japan PM Sanae Takaichi विवादित यासुकुनी स्मारक नहीं गईं, चीन ने जताया कड़ा विरोध

By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Aug 15, 2026

जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने शनिवार को द्वितीय विश्व युद्ध में जापान के आत्मसमर्पण की 81वीं वर्षगांठ के अवसर पर तोक्यो स्थित विवादित यासुकुनी स्मारक जाने से परहेज किया। माना जा रहा है कि उन्होंने इस कदम के जरिए चीन और दक्षिण कोरिया के साथ जापान के राजनयिक संबंधों को प्राथमिकता देने की कोशिश की। हालांकि, अपने संबोधन में उन्होंने एशिया में अपने देश के युद्धकालीन अतीत का कोई उल्लेख नहीं किया और न ही उस अतीत को लेकर किसी तरह का पश्चाताप व्यक्त किया।

ताकाइची ने हिरोशिमा, नागासाकी और ओकिनावा में हुई भारी तबाही के पीड़ितों के साथ-साथ विदेशों में युद्ध के मोर्चों पर मारे गए लोगों के प्रति शोक व्यक्त किया। उन्होंने उनके बलिदान को ‘जापान की शांति और समृद्धि की नींव’ बताया। तोक्यो के बुडोकान हॉल में अपने संबोधन में उन्होंने कहा, ‘‘युद्ध की समाप्ति के बाद से जापान ने लगातार विश्व शांति और समृद्धि में योगदान दिया है।

हम युद्ध की त्रासदी को दोबारा कभी नहीं होने देंगे।’’ बुडोकान हॉल यासुकुनी स्मारक से कुछ ही दूरी पर है। ताकाइची ने यह भी कहा कि जापान क्षेत्र में एक ‘विश्वसनीय राष्ट्र’ के रूप में वैश्विक चुनौतियों से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी, तीन अन्य कैबिनेट मंत्री और ताकाइची की सत्तारूढ़ पार्टी के तीन वरिष्ठ अधिकारी शनिवार सुबह यासुकुनी स्मारक पहुंचे।

इसके अलावा, विभिन्न राजनीतिक दलों के दर्जनों सांसदों के एक गैर-दलीय समूह ने भी वहां प्रार्थना की। इन यात्राओं को लेकर चीन के विदेश मंत्रालय ने जापान के समक्ष कड़ा विरोध दर्ज कराया। चीन ने आरोप लगाया कि जापानी राजनेताओं का वास्तविक उद्देश्य ‘‘युद्ध अपराधियों के खिलाफ दिए गए फैसले को बदलना, जापान के युद्ध अपराधों को छिपाना, ऐतिहासिक तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करना और सैन्यीकरण को तेज करने का रास्ता तैयार करना’’ है।

चीन ने जापान से इतिहास पर ‘गंभीर आत्ममंथन’ करने और सैन्यवाद से पूरी तरह दूरी बनाने का भी आग्रह किया।

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