Japanese Companies का भारत पर बढ़ा भरोसा, Q1 में 5.71 अरब Dollar का आया FDI

By Ankit Jaiswal | Oct 11, 2026

भारत में विदेशी निवेश को लेकर जापान की दिलचस्पी तेजी से बढ़ती दिखाई दे रही है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही यानी अप्रैल से जून के दौरान जापान भारत में FDI निवेश करने वाला सबसे बड़ा देश बनकर उभरा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस अवधि में जापान से भारत को 5.71 अरब डॉलर का निवेश मिला है। यह रकम पूरे वित्त वर्ष 2025-26 में जापान से आए 3.74 अरब डॉलर के निवेश से भी काफी अधिक है।

वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने पिछले महीने जापान का दौरा कर दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा की थी। नागोया यात्रा के दौरान उन्होंने बताया कि जापानी कंपनियां घोषित लक्ष्य के तहत भारत में 1 लाख करोड़ रुपये का निवेश कर चुकी हैं।

डेलॉइट इंडिया के साझेदार अनिल तलरेजा के मुताबिक, जापान की वित्तीय संस्थाएं और बड़े निवेशक भारत में अपनी मौजूदगी बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि भू-राजनीतिक तनाव, धीमी आर्थिक वृद्धि, मजदूरी और उत्पादन लागत में बढ़ोतरी तथा आयात शुल्क से जुड़े जोखिमों के कारण जापानी कंपनियां अपनी आपूर्ति व्यवस्था में बदलाव कर रही हैं। ऐसे में भारत उनके लिए एक अहम विकल्प बन रहा है।

तलरेजा के अनुसार, भारत जापान से केवल पैसा ही नहीं, बल्कि तकनीक, उत्पादन क्षमता, आपूर्ति व्यवस्था और लंबे समय तक निवेश बनाए रखने की क्षमता भी हासिल कर सकता है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेमीकंडक्टर, जरूरी खनिज, बैटरी, ऊर्जा और नई पीढ़ी के परिवहन साधन दोनों देशों के बीच सहयोग के प्रमुख क्षेत्र बन सकते हैं। वाहन उद्योग में जापानी कंपनियों और उनके प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं ने उत्पादन बढ़ाने के लिए निवेश किया है।

हालांकि, पहली तिमाही में निवेश बढ़ने की मुख्य वजह नई फैक्ट्रियां लगाना नहीं थी। तलरेजा के मुताबिक, बड़े वित्तीय सौदों और कंपनियों के अधिग्रहण ने इसमें अहम भूमिका निभाई। बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं, तकनीक, डिजिटल ढांचे और वैश्विक क्षमता केंद्रों में जापानी निवेश का हिस्सा बढ़ रहा है। अब जापानी कंपनियां भारत को उत्पादन केंद्र के साथ-साथ बड़े ग्राहक बाजार और तकनीकी विकास के ठिकाने के रूप में भी देख रही हैं।

गौरतलब है कि अप्रैल में जापान के एमयूएफजी बैंक ने श्रीराम फाइनेंस लिमिटेड की 20% हिस्सेदारी 39,618 करोड़ रुपये यानी करीब 4.4 अरब डॉलर में खरीदी थी। यह भारत के वित्तीय सेवा क्षेत्र में सबसे बड़ा सीमा पार निवेश बताया गया। एसएमबीसी-यस बैंक और मिजुहो-अवेंडस से जुड़े सौदे भी जापानी वित्तीय संस्थाओं की बढ़ती मौजूदगी दिखाते हैं।

जापानी निवेशकों को मदद देने के लिए भारत ने 9 राज्यों में 12 जापानी औद्योगिक टाउनशिप बनाई हैं। यहां जापान से जुड़ी सुविधाएं, अनुवाद और कारोबारी सहायता, जापानी मानकों के अनुरूप सेवाएं और मंजूरियों के लिए एकल खिड़की व्यवस्था उपलब्ध है।

वहीं, निवेश के मामले में सिंगापुर 5.22 अरब डॉलर के साथ दूसरे स्थान पर रहा। मॉरीशस से 2.4 अरब डॉलर, नीदरलैंड से 1.38 अरब डॉलर और अमेरिका से 1.35 अरब डॉलर का निवेश आया है। ये आंकड़े बताते हैं कि भारत में विदेशी निवेश के लिए जापान के साथ-साथ दूसरे बड़े आर्थिक साझेदार भी अहम भूमिका निभा रहे हैं।

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