JeM Headquarters Rebuilt: ऑपरेशन सिंदूर में तबाह मरकज सुभान अल्लाह फिर हुआ तैयार

By एकता | Aug 23, 2026

भारत के ऑपरेशन सिंदूर में तबाह किए गए पाकिस्तान के बहावलपुर स्थित जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख ठिकाने 'मरकज सुभान अल्लाह' का पुनर्निर्माण पूरा होने की खबर सामने आई है। ताजा तस्वीरों और रिपोर्टों के मुताबिक, हमले के करीब 15 महीने बाद परिसर को काफी हद तक फिर से तैयार कर दिया गया है और यह दोबारा सक्रिय नजर आ रहा है।

बहावलपुर का मरकज सुभान अल्लाह भी भारतीय कार्रवाई के निशाने पर था। हमले के बाद सामने आई तस्वीरों में परिसर में बड़े पैमाने पर तबाही, मलबा और ढांचे में गंभीर नुकसान दिखाई दिया था।

नए मार्बल, पेंट और प्लास्टर से बदला परिसर

ताजा तस्वीरों के मुताबिक, मरकज सुभान अल्लाह के सेंट्रल हॉल में हुए धमाकों के निशान काफी हद तक मिटा दिए गए हैं। हॉल में नए प्लास्टर और पेंट के साथ मार्बल का काम किया गया है। हमले में क्षतिग्रस्त हुए गुंबदों को भी दोबारा बनाया गया है।

सेंट्रल हॉल में धमाकों से बने गहरे गड्ढों को भरकर ढांचे को नया रूप दिया गया है। इससे भारतीय हमले के बाद हुई तबाही के पुराने निशान काफी हद तक छिप गए हैं। ताजा रिपोर्टों में परिसर को फिर से ऑपरेशनल बताया गया है।

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पाकिस्तान से 25 करोड़ रुपये मिलने का दावा

खुफिया सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक, पाकिस्तानी प्रशासन ने जैश-ए-मोहम्मद को मरकज की मरम्मत के लिए कथित तौर पर 25 करोड़ पाकिस्तानी रुपये किश्तों में दिए। रिपोर्ट के अनुसार, इसमें से करीब 11 करोड़ पाकिस्तानी रुपये केवल सेंट्रल हॉल की मरम्मत पर खर्च किए गए। हालांकि, पाकिस्तान सरकार की ओर से इस कथित फंडिंग को लेकर कोई स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।

मदरसा और रिहायशी इमारतों का भी पुनर्निर्माण

मुख्य परिसर के आसपास मौजूद क्षतिग्रस्त ढांचों को भी हटाया गया है। इनमें मदरसा अल-साबिर और जैश कमांडरों के लिए इस्तेमाल होने वाले रिहायशी क्वार्टर शामिल बताए जा रहे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, इन पुराने क्षतिग्रस्त ढांचों को गिराने के बाद वहां नए निर्माण की तैयारी शुरू हो चुकी है। इससे संकेत मिलता है कि परिसर के पुनर्निर्माण का काम केवल मुख्य हॉल तक सीमित नहीं है।

अप्रैल और मई की सैटेलाइट तस्वीरों में दिखी थी निर्माण गतिविधि

इस साल अप्रैल में सामने आई सैटेलाइट तस्वीरों में परिसर में भारी मशीनरी और निर्माण वाहनों की मौजूदगी दिखाई दी थी। उस समय क्षतिग्रस्त गुंबदों की मरम्मत और मलबा हटाने का काम चल रहा था।

मई में हाई-रिजॉल्यूशन सैटेलाइट तस्वीरों में गुंबदों का रंग गहरा दिखाई दिया था, जिसे नए सीमेंट के काम से जोड़कर देखा गया। परिसर से मलबा हटाने के लिए भी भारी मशीनरी का इस्तेमाल किया जा रहा था। भारत टुडे की रिपोर्ट में जियो-इंटेलिजेंस रिसर्चर ने इन गतिविधियों को सुविधा को दोबारा चालू करने की कोशिश का संकेत बताया था। अब ताजा तस्वीरों में मरम्मत का काम इन शुरुआती चरणों से काफी आगे बढ़ चुका है और मुख्य ढांचा फिर से तैयार दिखाई देता है।

18 एकड़ में फैला है मरकज सुभान अल्लाह

बहावलपुर का मरकज सुभान अल्लाह अंतरराष्ट्रीय सीमा से करीब 100 किलोमीटर दूर स्थित बताया जाता है। करीब 18 एकड़ में फैले इस परिसर को उस्मान-ओ-अली कैंपस के नाम से भी जाना जाता है। यहां मस्जिद के अलावा जैश की गतिविधियों से जुड़ी अन्य सुविधाएं भी मौजूद थीं। भारत और सुरक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, इस परिसर का इस्तेमाल जैश के कैडरों की भर्ती, ट्रेनिंग और कट्टरपंथी बनाने जैसी गतिविधियों के लिए किया जाता रहा है।

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जैश का भारत विरोधी गतिविधियों से पुराना संबंध

जैश-ए-मोहम्मद भारत में कई बड़े आतंकी हमलों से जुड़ा रहा है। इनमें 2001 का संसद हमला, 2016 का पठानकोट एयरबेस हमला और 2019 का पुलवामा आत्मघाती हमला शामिल हैं। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, बहावलपुर का यह परिसर जैश की भर्ती और विचारधारा फैलाने की गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा है। संगठन के संस्थापक मसूद अजहर को संयुक्त राष्ट्र ने आतंकवादी घोषित कर रखा है।

हमले में मसूद अजहर के परिवार के लोग भी मारे गए थे

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान बहावलपुर परिसर पर हुए हमले में मसूद अजहर के परिवार के कई सदस्यों के मारे जाने की जानकारी सामने आई थी। जैश की ओर से जारी बयान के मुताबिक, हमले में मारे गए लोगों में अजहर के 10 रिश्तेदार शामिल थे।

पाकिस्तानी सैन्य प्रतिष्ठान के पास है परिसर

मरकज सुभान अल्लाह बहावलपुर में लाहौर से करीब 400 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में स्थित है। रिपोर्टों के मुताबिक, यह परिसर पाकिस्तानी सेना की एक महत्वपूर्ण छावनी के पास है, जहां सेना की 31वीं कोर का मुख्यालय भी बताया जाता है। ऐसे में ऑपरेशन सिंदूर के बाद इस आतंकी परिसर का दोबारा निर्माण सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।

2002 में प्रतिबंध के बावजूद जारी रहीं गतिविधियां

पाकिस्तान ने 2002 में जैश-ए-मोहम्मद पर प्रतिबंध लगाया था। इसके बावजूद संगठन पर पाकिस्तान से अपनी गतिविधियां संचालित करने के आरोप लगातार लगते रहे हैं। ताजा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब जैश के बुनियादी ढांचे के दोबारा निर्माण को लेकर सवाल उठ रहे हैं। एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंधित आतंकी संगठन से जुड़े परिसर का इतनी बड़ी मात्रा में पुनर्निर्माण होना भारत की सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ पाकिस्तान के दावों को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।

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