By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Nov 03, 2026
रांची, तीन नवंबर झारखंड के कृषि सचिव अबूबाकर सिद्दीकी पी ने मंगलवार को वैज्ञानिकों से फसल क्षेत्र का विस्तार करने तथा उत्पादन एवं उत्पादकता बढ़ाने के लिए कम लागत वाली, स्थानीय जरूरतों के अनुरूप और व्यावहारिक तकनीक विकसित करने का आग्रह किया। बिरसा कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू) की 46वीं रबी अनुसंधान परिषद की बैठक को ऑनलाइन संबोधित करते हुए सिद्दीकी ने कहा कि किसानों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार के लिए जिला स्तर पर स्थित कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) को फसल सुधार, मृदा प्रबंधन, पौध संरक्षण, जल संरक्षण और जलवायु परिवर्तन प्रबंधन से जुड़ी तकनीकों के प्रसार में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने कहा, राज्य के 10 लाख हेक्टेयर धान के खाली पड़े खेतों में चरणबद्ध तरीके से विविध फसलों की खेती शुरू करने के लिए प्रभावी रणनीति तैयार करने की जरूरत है।
इनका लाभ उठाने के लिए योजनाबद्ध प्रयास किए जाने चाहिए। बीएयू के कुलपति एससी दुबे ने वैज्ञानिकों से राज्य के धान के खाली पड़े खेतों के लिए खेती की समग्र कार्ययोजना विकसित करने का आग्रह किया। इसमें देर से बोई जाने वाली, कम समय में पकने वाली और जलवायु अनुकूल किस्मों से लेकर फसल प्रबंधन, संरक्षण और कटाई तक की व्यवस्था शामिल होनी चाहिए, ताकि उपज की क्षमता से समझौता किए बिना कटाई के बाद होने वाले नुकसान को न्यूनतम किया जा सके।