कोरोना वायरस के कारण हो रही आलोचना पर जिनपिंग का इमेज मेकओवर प्लान

By अभिनय आकाश | Mar 31, 2020

पूरी दुनिया के महामारी के चपेट में आ जाने के बावजूद भी जब यूएनएससी इस पर बात करने को तैयार न हो। जब विश्व स्वास्थ्य संगठन चीन के गुनाहों पर आंख मूंद कर बैठा हो। जब जी 20 में चीन की भूमिका को लेकर कोई चर्चा न हो तब ऐसे में बेखौफ चीन ने एक नया फ्रंट खोल दिया है। ये नया फ्रंट है प्रोपोगेंडा वार का 

चीन की इमेज बिल्डिंग का प्लान

  • चीन का कोरोना वायरस से कोई लेना-देना नहीं
  • दुनिया के सामने दिखाना कि पूरी दुनिया में हाहाकार मचाने वाली इस बीमारी को चीन ने कैसे कितनी आसानी से काबू में कर लिया। 
  • खुद को सुपर पावर लीडर दर्शाना और सेवियर की भूमिका में दिखाना।

कोरोना वायरस से विश्व भर में 30 हजार लोगों की मौत हो चुकी है और 6 लाख से ज्यादा लोग इस बीमारी से संक्रमित हुए हैं। कोरोना वायरस सबसे पहले चीन के वूहान में फैला और यहां अभी तक 81,439 लोग संक्रमित हुए हैं, जिनमें से 3,300 की जान गई। वहीं वायरस की वजह से चीन की दुनिया में काफी आलोचना हो रही है। ऐसे में पार्टी की प्रोपेगैंडा यूनिट इन आलोचनाओं का जवाब देने के लिए फ्रंट पर आ गई है।  ऐसा नैरेटिव सेट किया जा रहा है कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग कोई गलत काम कर ही नहीं सकते और कोई गलती कर ही नहीं सकते। पार्टी के गोल्डेन ब्वाय जिनपिंग ने देश-विदेश में चले इस कैंपेन का भरपूर लाभ मिल रहा है। ऐसा लगता है कि की परंपराओं को खत्म कर जीवनभर सत्ता संभालने वाले शी के हाथों ही चीन का उदय हो रहा है।  

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कैनबरा में स्थित एक स्वतंत्र गैर-लाभकारी अनुसंधान संगठन, चीन नीति केंद्र के निदेशक, एडम नी ने चीन के प्रोपोगेंडा यूनिट और नैरेटिव कैंपेन को लेकर बड़ा खुलाया किया है। उन्होंने बताया कि कैसे चीन ने शुरुआत में वायरस को लेकर जानकारी छुपाई। उन्होने बताया कि पिछले 12 महीनों में कई कारणों की वजह से शी जिनपिंग की लोकप्रियता में कमी आई है।

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एडम ने कहा, 'कोविड-19 के बीच शी की लोकप्रियता को लेकर मुझे लगता है कि इसके दो पक्ष हैं। चीनी अधिकारियों द्वारा पूर्व में किए गए गलत कदम और इस संकट के शुरुआती चरणों में काफी दिनों तक सार्वजनिक सुर्खियों से शी की अनुपस्थिति ने उनकी लोकप्रियता को प्रभावित किया है।'

एडम ने कहा, 'शी की राजनीतिक लोकप्रियता को पिछले 12 महीनों में कई मामलों को लेकर चुनौती दी गई है। जिसमें सुस्त अर्थव्यवस्था, हांग कांग में आंदोलन, ताइवान संबंध, चीन और अमेरिका के रिश्ते और चीन की अंतरराष्ट्रीय साथ जैसे मुद्दे शामिल हैं। वहीं कोविड-19 और अन्य चुनौतियों के कारण शी की काफी आलोचना हुई। 2019 की शुरुआत की तुलना में अब राजनीतिक कार्यशैली फीकी हुई है।

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शी और सीसीपी के प्रोपेगैंडा को रेखांकित किया जा रहा है। माओ जेदोंग के समय पर यह जुबानी जंग हुआ करती थी लेकिन अब यह ऑनलाइन और मीडिया प्लेटफॉर्म पर लड़ी जा रही है। चीनी राजनयिकों, मंत्रियों, विभाग के प्रवक्ताओं और अन्य कमियों द्वारा 'वैकल्पिक सत्य' को आगे बढ़ाने के प्रयास अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच गए हैं।

चीन ने बेशक अपने देश में ट्विटर और फेसबुक पर प्रतिबंध लगाया हुआ है लेकिन उसका सरकारी तंत्र अपने नापाक संदेशों को फैलाने के लिए इन्हीं प्लेटफॉर्म का व्यापक रूप से उपयोग कर रहे हैं। उनका विलक्षण उद्देश्य वुहान में कोरोनो वायरस के प्रकोप पर प्रतिक्रिया के लिए दोषारोपण करना है।

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चीन नीकन, एक साप्ताहिक चीनी सूचना समाचार पत्र है। जिसका प्रकाशन एडम नी और यूं जियांग करते हैं। उन्होंने संक्षेप में कहा, 'चीनी अधिकारियों ने सबसे पहले सूचना को दबाया था। जब उन्हें लगा कि वह इससे दुनिया को संतुष्ट नहीं कर सकते तो उन्होंने प्रचार को दूसरी तरफ मोड़ दिया। वे बताने लगे कि कैसे सरकार ने रिकॉर्ड समय में अस्पतालों का निर्माण किया और सभी शहरों को लॉकडाउन करके निर्णायक रूप से काम किया है।'

एडम ने आगे कहा, 'दो हफ्तों तक गैर राज्य स्वीकृत जानकारी को प्रकाशित करने की अनुमति दी। हालांकि बाद में एक बार फिर सूचनाओं पर उन्होंने दोबारा शिकंजा कसना शुरू कर दिया और सकारात्मक कहानियों को बताने पर जोर दिया। जिसमें फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं के वीरतापूर्ण प्रयासों को उजागर किया गया जबकि रोगियों को होन वाली परेशानियों की जानकारी छुपाई गई।'

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सीसीपी अब वायरस के बारे में अपनी खुद के प्रोपोगेंडा को प्लांट करने में लगा है और इस वायरस पर काबू पाने की अपनी उपल्ब्धियों को गिनाने के साथ वायरस की उत्पत्ति यूएस में होने जैसे नैरेटिव सेट करने की कोशिश में लगा है। 

चीनी विदेश मंत्रालय का दावा 

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिजियन जाओ ने ट्वीट कर ये दावा किया कि वायरस चीन से नहीं, बल्कि अमेरिका से फैला है। वूहान में कोरोना फैलाने की साजिश के पीछे अमेरिकी सेना का हाथ हो सकता है। 

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COVID-19 की प्लांटेड थ्योरी को आकार देने के लिए सीसीपी के प्रचार तंत्र के चार बिन्दुओं को रेखांकित करते हुए एडम ने  उसकी सिलसिलेवार व्याख्या की। 

ब्लेम: ऑस्ट्रेलिया स्थित शैक्षणिक द्वारा उल्लेखित पहला बिंदु दोष परिहार है। "पार्टी ने स्थानीय अधिकारियों  जिन्होंने इस खतरे के प्रति आगाह किया था को दरकिनार कर  वायरस चीन से बाहर से आया व ब्लेम गेम जैसी साजिशों का समर्थन करने के में लग गया। 

राष्ट्रवादी भावना का लाभ: बीमारी के खिलाफ एक 'पीपुल्स वार' और राष्ट्रीय संघर्ष के रूप में संकट का सामना करने के के व्याख्यानों के माध्यम से सीसीपी ने राष्ट्रवाद को हवा दी। इस प्रकार सीसीपी ने "विदेशी शत्रुतापूर्ण ताकतों द्वारा साजिश का आरोप लगाया।

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यूरोप और यूएस की स्थिति पर नजर: चीनी पार्टी ने वायरस के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया की कमियों खासकर यूरोप और यूएसए पर विशेष रूप से ध्यान केंद्रित रखा। जिसके जरिए घरेलू जनता और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को ये समझाने की कोशिश की गई कि चीन की राजनीतिक और शासन प्रणाली में बेहतर विशेषताएं हैं। 

मुख्य रूप से चीन इटली जैसे देशों के लिए चिकित्सा आपूर्ति और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की अपनी वैश्विक सहायता को हाईलाइट कर रहा है और बीजिंग वायरस रिसर्च को वैश्विक स्तर पर प्रचारित और प्रसारित कर रहा है। 

चीन के ये प्रयास प्रदर्शित करती है कि सीसीपी अपने शासन के बारे में कितना अनिश्चित है। चीनी कम्युनिस्ट को एक कमजदोर व्यव्सथा के रूप में दिखाए जाने औरअंतरराष्ट्रीय आलोचना से बहुत डरता है।

सेंसरशिप: आखिरी में एडम ने सेंसरशिप को रेखांकित करते हुए कहा कि चीन की सरकार ख़ामियाँ उजागर करने वाली रिपोर्टों को सेंसर कर रही है।

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