By रेनू तिवारी | Oct 19, 2026
भारत में इंटरनेट का इस्तेमाल अभूतपूर्व गति से बढ़ रहा है। डिजिटल परिदृश्य अब केवल स्मार्टफोन पर वीडियो देखने या कॉलिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्लाउड कंप्यूटिंग और हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड जैसी आधुनिक तकनीकें व्यापार और दैनिक जीवन का मुख्य आधार बन चुकी हैं। 'SMC ग्लोबल' के अनुसार, भारतीय टेलीकॉम और डिजिटल सेवा क्षेत्र विश्व में सबसे तेजी से बढ़ने वाले क्षेत्रों में से एक है। इस उछाल के पीछे डेटा खपत में तीव्र वृद्धि, 5G का तेजी से होता रोलआउट और फिक्स्ड फाइबर ब्रॉडबैंड का विस्तार मुख्य कारक हैं। इस बदलते परिदृश्य के बीच, रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल और टेलीकॉम इकाई Jio Platforms Limited (JPL) अपनी नई और बड़ी छलांग लगाने के लिए तैयार है।
अनुमान है कि जून 2026 तक Jio के ग्राहकों की संख्या बढ़कर 533.3 मिलियन हो जाएगी। इसके बावजूद, कंपनी के पास नए ग्राहक जोड़ने और मौजूदा ग्राहकों को बेहतर नेटवर्क पर लाने का बड़ा मौक़ा है। GEPL कैपिटल के अनुसार, जून 2026 तक लगभग 261 मिलियन मोबाइल यूज़र्स अभी भी 2G नेटवर्क पर थे। Jio इन ग्राहकों को सस्ते फोन और डिजिटल सेवाओं का बंडल देकर 4G और 5G नेटवर्क पर ला सकता है।
कंपनी के ARPU में बढ़ोतरी
कंपनी के प्रति यूज़र औसत मासिक राजस्व (ARPU) में भी वृद्धि हुई है। यह वित्त वर्ष 2024 में 181.7 रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में 215.6 रुपये हो गया है। प्रति यूज़र मासिक डेटा खपत भी 43.7 GB तक पहुँच गई है। उम्मीद है कि प्रीमियम प्लान और OTT सेवाएँ राजस्व (रेवेन्यू) बढ़ाने में मदद करेंगी। ब्रॉडबैंड कारोबार में भारी संभावनाएं
जून 2026 तक, जियो के पास जियोफाइबर (JioFiber) और जियोएयरफाइबर (JioAirFiber) के कुल 28.6 मिलियन ग्राहक थे। भारत में फिक्स्ड ब्रॉडबैंड की पहुंच अभी काफी सीमित है। GEPL कैपिटल के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में यह लगभग 21 प्रतिशत थी और वित्त वर्ष 2031 तक इसके 46 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है। इसलिए, जियोएयरफाइबर उन इलाकों में इंटरनेट पहुंचाने में मदद कर सकता है, जहां फाइबर केबल बिछाना मुश्किल या महंगा है।
AI और टेक्नोलॉजी के जरिए कमाई बढ़ाने की तैयारी
जियो अब केवल एक टेलीकॉम कंपनी बने रहने के बजाय अपने टेक्नोलॉजी कारोबार का विस्तार करना चाहती है। कंपनी ने अपना खुद का 5G स्टैंडअलोन नेटवर्क सिस्टम विकसित किया है और 4G, 5G, 6G, AI तथा डिजिटल टेक्नोलॉजी से जुड़े 7,220 पेटेंट आवेदन दाखिल किए हैं। इसके AI प्लेटफॉर्म, 'जियोब्रेन' (JioBrain) का इस्तेमाल नेटवर्क ऑपरेशंस और अन्य डिजिटल सेवाओं में किया जा रहा है।
विदेशों में भी टेक्नोलॉजी बेचने की योजना
जियो अपनी 5G, क्लाउड और AI टेक्नोलॉजी को दूसरे देशों की टेलीकॉम कंपनियों को उपलब्ध कराने की योजना बना रही है। इससे भारत के बाहर कमाई के नए रास्ते खुल सकते हैं। हालांकि, इन अवसरों का वास्तविक असर कंपनी की भविष्य की कमाई और मुनाफे पर निर्भर करेगा।
आंकड़ों के नजरिए से देखें तो जियो प्लेटफॉर्म्स (Jio Platforms) की ग्रोथ प्रोफ़ाइल बेहद मजबूत और प्रभावशाली नजर आती है। जून 2026 तक कंपनी के कुल ग्राहकों का आंकड़ा बढ़कर 533.3 मिलियन तक पहुंच चुका है, जिसमें अकेले 284.9 मिलियन 5G ग्राहक शामिल हैं। इसके अलावा, भारतीय टेलीकॉम बाजार में अभी भी लगभग 261.0 मिलियन यूज़र्स 2G नेटवर्क पर मौजूद हैं, जो कंपनी के लिए एक बड़ा अवसर प्रदान करते हैं। फिक्स्ड ब्रॉडबैंड सेगमेंट की बात करें तो जियो के पास 28.6 मिलियन सब्सक्राइबर हैं, जिसमें 14.0 मिलियन जियोएयरफाइबर (JioAirFiber) के ग्राहक भी शामिल हैं। देश में फिक्स्ड ब्रॉडबैंड की पेनिट्रेशन (पहुंच) जो वित्त वर्ष 2026 में लगभग 21% थी, उसके वित्त वर्ष 2031 तक बढ़कर करीब 46% होने का अनुमान है। कंपनी की वित्तीय स्थिति को दर्शाने वाला प्रति यूज़र औसत मासिक राजस्व (ARPU) भी वित्त वर्ष 2024 के 181.7 रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में 215.6 रुपये पर पहुंच गया है। इसके अलावा, तकनीकी नवाचार और भविष्य की तैयारियों के तहत कंपनी ने डिजिटल तकनीकों से जुड़े 7,220 पेटेंट आवेदन दाखिल किए हैं, जिनमें से 1,043 पेटेंट मंजूर भी हो चुके हैं। निवेशकों के लिए कंपनी का यह मेगा IPO 21 से 23 अक्टूबर, 2026 के दौरान खुलने वाला है, जिसके लिए ₹1,065 से ₹1,119 का प्राइस बैंड तय किया गया है।