By अंकित सिंह | Jan 06, 2026
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) प्रशासन ने मंगलवार को कहा कि सोमवार शाम को परिसर में हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्रों द्वारा नारे लगाते हुए सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो का उसने गंभीर संज्ञान लिया है। विश्वविद्यालय ने एक बयान में कहा कि जेएनयूएसयू से जुड़े छात्रों के एक समूह ने अत्यंत आपत्तिजनक, उत्तेजक और भड़काऊ नारे लगाए, जिसके चलते अधिकारियों ने तत्काल कार्रवाई की।
जेएनयू प्रशासन ने कहा कि सक्षम प्राधिकारी ने घटना का गंभीर संज्ञान लिया है और विश्वविद्यालय की सुरक्षा शाखा को चल रही जांच में पुलिस के साथ सहयोग करने का निर्देश दिया है। इसमें इस बात पर जोर दिया गया कि इस तरह की नारेबाजी लोकतांत्रिक असहमति के अनुरूप नहीं है, यह जेएनयू आचार संहिता का उल्लंघन करती है और इससे सार्वजनिक व्यवस्था, परिसर में सद्भाव और विश्वविद्यालय तथा राष्ट्र दोनों के सुरक्षा और संरक्षा वातावरण को गंभीर रूप से बाधित करने की क्षमता है।
बयान में कहा गया है कि यह कृत्य संवैधानिक संस्थाओं और नागरिक एवं लोकतांत्रिक संवाद के स्थापित मानदंडों के प्रति जानबूझकर की गई अवहेलना को दर्शाता है, और सार्वजनिक अव्यवस्था पैदा कर सकने वाली असहमति, गाली-गलौज और घृणास्पद भाषण के बीच अंतर करना आवश्यक है। प्रशासन ने सभी हितधारकों से ऐसी गतिविधियों से दूर रहने और परिसर में शांति और सद्भाव बनाए रखने में सहयोग करने का आग्रह किया, साथ ही चेतावनी दी कि आगे ऐसी किसी भी घटना की स्थिति में नियमों के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
जेएनयू के मुख्य सुरक्षा अधिकारी द्वारा प्रॉक्टर को सौंपी गई रिपोर्ट में यह निष्कर्ष निकाला गया है कि इस सप्ताह के प्रारंभ में परिसर में लगाए गए आपत्तिजनक नारे जानबूझकर और सोची-समझी साजिश के तहत लगाए गए थे, न कि किसी स्वतःस्फूर्त अभिव्यक्ति का परिणाम थे। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2020 के दिल्ली दंगों के मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा जेएनयू के पूर्व छात्रों उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद नारेबाजी शुरू हुई।