By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Aug 16, 2026
(इंट्रो में बदलाव के साथ) नयी दिल्ली, 16 अगस्त जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) की कुलपति शांतिश्री धूलिपुड़ी पंडित ने विश्वविद्यालय में शिक्षकों की भर्ती और पदोन्नति में अनियमितताओं को लेकर जेएनयू छात्र संघ (जेएनयूएसयू) और जेएनयू शिक्षक संघ (जेएनयूटीए) द्वारा लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए उन्हें ‘दुष्प्रचार’ करार दिया। जेएनयू कुलपति शांतिश्री धूलिपुड़ी पंडित ने एक बयान में कहा, “कुलपति के रूप में मेरे साढ़े चार साल के कार्यकाल में विश्वविद्यालय में विशेष रूप से अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए सबसे पारदर्शी एवं रिकॉर्ड संख्या में भर्तियां की गईं। इसके बावजूद जेएनयूएसयू और जेएनयूटीए ने मुझे एक दुर्भावनापूर्ण अभियान का निशाना बनाया है।
प्रशासन के मुताबिक, इन समितियों में तीन विषय विशेषज्ञ, विजिटर के एक नामित सदस्य, संबंधित डीन और कुलपति शामिल होते हैं। प्रशासन ने बताया कि इसके बाद अकादमिक परिषद चयन समिति द्वारा अंतिम रूप दिए गए नामों को मंजूरी देती है। विश्वविद्यालय ने बताया कि आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (आईक्यूएसी) स्क्रीनिंग प्रक्रिया के तहत अभ्यर्थियों की शैक्षणिक योग्यता और उनके प्रकाशनों से जुड़े दावों की जांच करता है हालांकि, साक्षात्कार के दौरान अंतिम चयन में इसकी कोई भूमिका नहीं होती।
जेएनयू छात्र संघ (जेएनयूएसयू) ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि हाल की मीडिया की खबरों में इस बात को लेकर चिंता जताई गई है कि अनिवार्य यूजीसी पात्रता मानदंडों को पूरा नहीं करने के कारण विषय विशेषज्ञों द्वारा खारिज किए गए कुछ अभ्यर्थियों को चयन प्रक्रिया में कथित तौर पर दोबारा शामिल किया गया। वहीं, जेएनयू शिक्षक संघ (जेएनयूटीए) ने बृहस्पतिवार को जारी अपनी मांगों के एक अलग दस्तावेज में दावा किया कि आरटीआई से मिले जवाबों, आधिकारिक रिकॉर्ड और कार्यकारी परिषद की असहमति संबंधी टिप्पणियों के आधार पर की गई जांच में पाया गया कि कम से कम सात शिक्षकों की नियुक्तियां यूजीसी के मानदंडों का उल्लंघन करके की गईं।