Longest Day Of The Year: 21 जून को होता है सबसे लंबा दिन, इस दिन आपकी परछाई भी छोड़ देती है साथ

By डा. अनीष व्यास | Jun 19, 2023

वैसे तो साल में 365 दिन होते हैं और हर दिन 24 घंटे का होता है। लेकिन साल में चार दिन ऐसे होतें हैं, जिनकी अलग ही खासियत है। इन चार दिनों में 21 मार्च, 21 जून, 23 सितंबर और 22 दिसंबर आते हैं। पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर जोधपुर के निदेशक ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि 21 जून को सबसे लंबा दिन होता है और रात छोटी होगी। यह पृथ्वी का सबसे लंबा दिन होता है। यानी 21 जून को पृथ्वी पर सबसे लंबा दिन और सबसे छोटी रात होती है। इस दिन उत्तरी गोलार्ध में मौजूद सभी देशों में दिन लंबा और रात छोटी होती है। अहम बात यह है कि इस दिन दोपहर में एक ऐसा पल भी आता है, जब परछाई भी मनुष्य और दूसरे जीवित प्राणियों का साथ छोड़ देती है। सामान्य दिनों तो 12 घंटे का दिन और 12 घंटे की रात होती है। वहीं 21 दिसंबर के बाद रात छोटी होने लगती है और दिन बड़े होने लगते हैं। जबकि 21 जून को दिन सबसे लंबा होता है। इस दिन 12 घंटे की जगह 14 घंटे का दिन होता है। इसके बाद दिन घटना शुरू हो जाएगा। वैसे अभी तक एक बार 1975 में 22 जून को साल का सबसे बड़ा दिन था। अब ऐसा 2203 में होगा।

परछाई भी छोड़ देती है साथ

भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि सालभर में 365 दिन होते है, जिसमें चार दिन को छोड़ दें तो बाकि के सभी दिन सामान्य ही होते हैं। इन चार दिनों में 21 मार्च, 21 जून, 23 सितंबर और 22 दिसंबर का दिन शामिल है। 21 जून को सबसे लंबा दिन होता है। खास बात ये है कि इस दिन दोपहर में एक ऐसा समय आता है जब परछाई भी मनुष्य और दूसरे जीवित प्राणियों का साथ छोड़ देती है।

मध्याह्न में कर्क रेखा के ऊपर होगा सूर्य

कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि 21 जून 2022 को सूरज मध्याह्न में कर्क रेखा के ऊपर होगा। इसका मतलब यह है कि इस दिन सूर्य का प्रकाश धरती पर सबसे लंबे समय तक रहेगा।  पृथ्वी पर दिन सुबह जल्दी होगा जबकि सूर्यास्त देर से होगा। जिसके कारण सबसे लंबा दिन और सबसे छोटी रात होगी। 21 जून को साल के सबसे बड़े दिन के साथ ही साल की सबसे छोटी रात भी होती है।

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क्यों होता है 21 जून सबसे बड़ा दिन

भविष्यवक्ता डा. अनीष व्यास ने बताया कि यह तो हम सभी जानते हैं कि पृथ्वी अपने अक्ष और सूर्य की कक्षा में परिक्रमा करती है। तो परिक्रमा के दौरान 21 जून  को दोपहर में ऐसी स्थिति बनती है, जब सूर्य  कर्क रेखा के ऊपर होता है। इसका मतलब यह है कि 21 जून को सूर्य का प्रकाश धरती पर सबसे लंबे समय तक रहता है। यानी पृथ्वी पर दिन सुबह जल्दी होता और सूर्यास्त देर से होता है। जिसके कारण 21 जून सबसे लंबा दिन और सबसे छोटी रात होती है। इस दिन सूर्य का प्रकाश धरती पर करीब 15-16 घंटे तक पड़ता हैं। जिसके कारण दिन की अवधि सबसे लंबी होती है। और जिस वक्त, सूर्य ठीक कर्क रेखा के ऊपर होता है, उस दौरान परछाई भी नहीं बनती है। 

इसके बाद दिन की अवधि घटने लगती है

कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि पृथ्वी की परिक्रमा के कारण 21 जून के बाद दिन की अवधि घटने लगती है और रात की अवधि बढ़ने लगती है। फिर 21 सितंबर को ऐसा समय आता है, जब दिन और रात की अवधि बराबर हो जाती है। और  इसके बाद 21 सितंबर से रात लंबी होने लगती है और दिन की अवधि घटने लगती है। 22 दिसंबर को एक उत्तरी गोलार्ध में रात सबसे लंबी हो जाती है और दिन सबसे छोटा हो जाता है। इसके बाद फिर 21 मार्च को सूर्य विषुवत रेखा के ऊपर होता है। और इस दिन फिर से दिन और रात की अवधि एक बराबर हो जाती है।

इसलिए होते हैं दिन और रात

भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि पृथ्वी के अपने अक्ष में घूमने के कारण दिन और रात होते हैं। साथ ही समय घटता बढ़ता रहता है। यदि धरती न होती तो सूर्य के तरफ वाला हिस्सा हमेशा सूर्य के प्रकाश में रहता और दूसरी तरफ का हिस्सा अंधेरे में डूबा रहता।

- डा. अनीष व्यास

भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक

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