By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Sep 09, 2026
कोलकाता, नौ सितंबर पश्चिम बंगाल के राज्यपाल आर. एन. रवि ने न्यायमूर्ति रवींद्र विठ्ठलराव घुगे को कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश पद की बुधवार को शपथ दिलाई। शपथ ग्रहण के बाद मुख्य न्यायाधीश ने अपने संबोधन में लंबित मामलों से निपटने और यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया कि ‘‘इस महान संस्थान में अंतिम हितधारक आम लोगों का विश्वास अडिग रहे।’’ अदालत कक्ष-एक में आयोजित इस शपथ ग्रहण समारोह में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र बोस सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे। मुख्य न्यायाधीश ने अदालतों को अधिक सुलभ बनाने और उनके कामकाज में पारदर्शिता लाने के लिए आधुनिक प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल का आह्वान करते हुए कहा, ‘‘जैसा कि हम भविष्य की ओर देख रहे हैं, हमें यह सुनिश्चित करने का प्रयास करना चाहिए कि समाज के सबसे हाशिए पर पड़े लोगों के लिए न्याय के दरवाजे खुले रहें।’’ मुख्य न्यायाधीश ने पीठ और बार को ‘‘न्याय रथ के दो पहिए बताते हुए कहा, ‘‘मैं अपनी बहन और भाई न्यायाधीशों तथा इस जीवंत बार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करने के लिए उत्सुक हूं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यह रथ सुचारू और निष्पक्ष रूप से आगे बढ़े।
उन्होंने कहा, ‘‘मुंबई उच्च न्यायालय जैसे एक अन्य ऐतिहासिक एवं प्रतिष्ठित संस्थान से यहां आने के बाद मैं निरंतरता, जिम्मेदारी और साझा संवैधानिक उद्देश्य की गहरी भावना महसूस कर रहा हूं।’’ न्यायमूर्ति घुगे को 21 जून 2013 को मुंबई उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया था और एक जून 2026 को उन्हें वहां कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया। उच्च न्यायालय की वेबसाइट के अनुसार, 1990 में कोल्हापुर स्थित शाहजी विधि महाविद्यालय और औरंगाबाद स्थित एमपी विधि महाविद्यालय से पांच वर्षीय विधि पाठ्यक्रम पूरा करने के बाद उन्होंने उसी वर्ष मुंबई उच्च न्यायालय में वकालत शुरू की थी। उन्होंने शुरूआत में लगभग 2,000 मामलों में श्रमिकों और यूनियनों का प्रतिनिधित्व किया और उच्च न्यायालय, श्रम और औद्योगिक अदालतों और न्यायाधिकरणों में कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों और निजी उद्योगों सहित लगभग 250 उद्योगों के लिए मामलों की पैरवी की।