By अभिनय आकाश | Oct 07, 2026
दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस शिव नारायण ढिंगरा ने बुधवार को विपक्षी 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन की आलोचना की। उन्होंने यह आलोचना 'स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न' (SIR) प्रक्रिया के खिलाफ सड़क पर किए गए विरोध प्रदर्शनों और भारत के चुनाव आयोग (ECI) के मुख्यालय तक निकाले गए मार्च को लेकर की। ANI से बात करते हुए, उन्होंने ECI की 'स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न' (SIR) प्रक्रिया के दौरान "बड़ी संख्या में वोटरों के नाम हटाने" के आरोपों का खंडन किया। जस्टिस ढिंगरा ने कहा कि यह विरोध प्रदर्शन वोटरों के अधिकारों को लेकर कोई असली चिंता नहीं, बल्कि राजनीतिक मकसद से किया गया मीडिया स्टंट था। विपक्ष के इन दावों को खारिज करते हुए कि SIR प्रक्रिया का मकसद असली वोटरों को वोट देने के अधिकार से वंचित करना है, जस्टिस ढिंगरा ने ज़ोर देकर कहा कि वोटर लिस्ट में बड़े पैमाने पर सुधार करना चुनाव आयोग की एक ज़रूरी कानूनी ज़िम्मेदारी है।
बाजवा ने कहा कि CBI ने जांच खुद शुरू नहीं की थी, बल्कि वह हाई कोर्ट के निर्देशों के आधार पर काम कर रही थी। उन्होंने कहा कि एक FIR दर्ज की गई है और CBI ने मामले में दखल दिया है—यह उसने अपनी मर्ज़ी से नहीं, बल्कि पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट और चीफ जस्टिस के निर्देशों पर किया है।" इस बीच, पंजाब सरकार ने 6 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में 'स्पेशल लीव पिटिशन' (SLP) दाखिल करके हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी। सुप्रीम कोर्ट राज्य की इस चुनौती पर सुनवाई करने के लिए सहमत हो गया है। बाजवा ने कहा कि जांच से आखिरकार यह पता चल जाएगा कि आरोपों के समर्थन में सबूत हैं या नहीं।