सनातन पर जस्टिस यादव का बयान, विपक्ष करना चाहती थी कुछ ऐसा, सरकार के कान हुए खड़े, खुल गया धनखड के अचानक इस्तीफ़े का रहस्य

By अभिनय आकाश | Jul 22, 2025

उपराष्ट्रपति धनखड़ के इस्तीफे की खबर ने सभी को हैरान कर दिया है। उनका इस्तीफा राष्ट्रपति द्वारा स्वीकार भी कर लिया गया व प्रधानमंत्री की तरफ से उनके बेहतर स्वास्थ्य की कामना वाला ट्वीट भी सामने आ गया है। लेकिन लगता है कि जगदीप धनखड़ ने अचानक इस्तीफा दे दिया लेकिन इसकी सुगबुगाहट पिछले कई दिनों से सुनाई व दिखाई दे रही थी। अभी दो दिन पहले 20 जुलाई को जगदीप धनखड़ ने पत्नी के जन्मदिन पर पार्टी दी जिसमें 800 लोग शामिल हुए थे। मानो ये एक तरह का फेयरवेल पार्टी हो। ग्रुप फोटो सेशन भी हुआ था। तीनों सालों में ऐसा पहली बार हुआ था कि राज्यसभा के सभी स्टॉफ को अपने यहां भोजन पर आमंत्रित किया। इसका मतलब उनके मन में कुछ चल रहा था। 

क्या था जस्टिस शेखर यादव का मामला?

पिछेल साल दिसंबर में विपक्षी सांसदों ने राज्यसभा में जस्टिस शेखर यादव के खिलाफ महाभियोग का नोटिस पेश किया था। दावा किया गया कि उन्होंने पिछले साल एक सभा में कथित तौर पर नफरत भरा भाषण दिया। विहिप के कानूनी प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में समान नागरिक संहिता पर बोलते हुए जस्टिस यादव ने विवादास्पद टिप्पणी करते हुए कहा कि भारत बहुसंख्यक आबादी की इच्छा के अनुसार काम करेगा। उन्होंने चरमपंथियों को “कठमुल्ला” कहा और सुझाव दिया कि देश को उनके प्रति सतर्क रहना चाहिए। जस्टिस यादव वर्तमान में इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज हैं। 16 अप्रैल, 1964 को उनका जन्म हुआ। कार्यक्रम में उनकी कही गई बातों के चलते राज्यसभा के 54 सांसदों ने जस्टिस यादव के खिलाफ महाभियोग का नोटिस दिया था। 

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जज के खिलाफ महाभियोग का नोटिस 

जस्टिस यादव के खिलाफ राज्यसभा में 54 सांसदों ने महाभियोग का नोटिस दिया था, इसे मंजूर करने के लिए 50 सांसदों के हस्ताक्षर सही होने चाहिए थे, लेकिन 44 सांसदों के हस्ताक्षरों का ही वेरिफिकेशन हुआ। न्यायाधीशों के विरुद्ध महाभियोग प्रस्ताव के लिए राज्यसभा सचिवालय के तय प्रोटोकॉल के मुताबिक इस प्रस्ताव के साथ जमा 55 सांसदों के हस्ताक्षरों की विस्तृत जांच शुरू गई।  

क्या करने वाले थे धनखड़?

जस्टिस शेखर यादव के जरिए विपक्ष एक नैरेटिव खड़ा करना चाहता था और सूत्रों की माने तो इसमें जगदीप धनखड़ मददगार बन रहे थे। सरकार को ये विश्वास हो गया था कि मंगलवार को दोपहर 1 बजे बिजनेस एडवाइजरी की मीटिंग के दौरान वो जस्टिस शेखर यादव के महाभियोग वाले नोटिस को स्वीकार करने वाले हैं। ऐसे में एक संवैधानिक संकट जैसी स्थिति पैदा हो जाती। सरकार जो मोशन नहीं चाहती वो मोशन आ जाता। विपक्ष की इस रणनीति में उपराष्ट्रपति का शामिल हो जाना सरकार के लिए बड़ी चिंता की बात थी। 

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