हिमालय-सा विराट व्यक्तित्व, रामभक्त नेता थे कल्याण सिंह

By डॉ. ब्रह्मानंद राजपूत | Jan 05, 2026

भारतीय राजनीति के युगपुरुष, श्रेष्ठ राजनीतिज्ञ, कोमल हृदय संवेदनशील मनुष्य, वज्रबाहु राष्ट्र प्रहरी, भारत माता के सच्चे सपूत तथा भारतीय राजनीति में भगवान श्री रामचंद्र जी के हनुमान कहे जाने वाले हिन्दू हृदय सम्राट कल्याण सिंह उन विरल नेताओं में थे, जिन्होंने भारतीय राजनीति में अनेक ऐतिहासिक मिसालें प्रस्तुत कीं। उनका राजनीतिक और व्यक्तिगत जीवन सदैव निष्कलंक, सिद्धांत निष्ठ और प्रेरणास्पद रहा। कुशल प्रशासन, दृढ़ निर्णय क्षमता और जनहित के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता की मिसालें तब तक दी जाती रहेंगी, जब तक यह संसार रहेगा। कल्याण सिंह ने राजनीति को सत्ता नहीं, बल्कि सेवा का माध्यम माना और जमीन से जुड़कर ‘जनता के नेता’ के रूप में जन-जन के हृदय में अपनी अमिट छवि स्थापित की। वे बच्चों, युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों—सभी वर्गों में समान रूप से लोकप्रिय थे। देश का प्रत्येक हिन्दू युवा और बालक उन्हें अपना आदर्श मानता था। उनका व्यक्तित्व हिमालय के समान विराट, अडिग और तेजस्वी था। भारतीय राजनीति में वे स्नेह और सम्मान के साथ ‘बाबूजी’ के नाम से विख्यात रहे। उनका संपूर्ण जीवन सादगी, राष्ट्रभक्ति और मूल्यों की राजनीति का अनुपम उदाहरण है। उन्होंने कभी भी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया और हर परिस्थिति में राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखा। भारतीय राजनीति और समाज के लिए उनका योगदान युगों-युगों तक प्रेरणास्रोत बना रहेगा। हिन्दू हृदय सम्राट कल्याण सिंह का नाम इतिहास के स्वर्णिम पृष्ठों में सदैव अमर रहेगा।

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1999 में भाजपा से मतभेद के कारण कल्याण सिंह ने भाजपा छोड़ दी। कल्याण सिंह ने राष्ट्रीय क्रांति पार्टी का गठन किया। 2002 का उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव अपने दम पर राष्ट्रीय क्रांति पार्टी से लड़ा और राष्ट्रीय क्रांति पार्टी के चार विधायक चुने गए और कल्याण सिंह ने बड़े स्तर पर पूरे प्रदेश में भाजपा को नुकसान पहुँचाया। इसके बाद उत्तर प्रदेश की जमीन पर भाजपा कई वर्षो तक कल्याण सिंह की उथल पुथल का और भाजपा के नकारा नेताओं की साजिश का शिकार बनी रही। लेकिन इसका फायदा न कल्याण सिंह को मिल पाया न भगवा पार्टी को।  भाजपा और कल्याण सिंह दोनों उत्तर प्रदेश  की राजनीति में हाशिये पर चले गए। 2004 में कल्याण सिंह ने पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी के आमंत्रण पर भाजपा में वापसी तो कर ली लेकिन, उनको वो पॉवर नहीं मिली जो मंदिर आन्दोलन के समय उनके पास थी। 2004 के आम चुनावों में उन्होंने बुलन्दशहर से भाजपा के उम्मीदवार के रूप में पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ा। और कल्याण सिंह पहली बार बुलंदशहर लोकसभा सीट से संसद पहुंचे। 2007 का उत्तर प्रदेश का विधानसभा चुनाव भाजपा ने कल्याण सिंह के नेतृत्व में लड़ा। कहने को भाजपा ने 2007 में कल्याण सिंह को भाजपा की तरफ से मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार तो बना दिया लेकिन नाम का, जिसके पास ना तो उम्मीदवार तय करने की पावर थी और ना ही उनके अंडर में उत्तर प्रदेश का चुनाव प्रबंधन था। इसलिए वो चुनाव में कुछ अच्छा नहीं कर सके। इसके बाद 2009 में पुनः अपनी उपेक्षा का आरोप लगाते हुए मतभेदों के कारण भाजपा का दामन छोड़कर सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव से नजदीकियां बढ़ा लीं। 2009 के लोकसभा चुनावों में एटा लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय सांसद चुने गये। फिर 2009 लोकसभा चुनाव खत्म होते ही मुलायम ने कल्याण से नाता तोड़ लिया। क्योंकि कल्याण सिंह की बजह से मुस्लिम समुदाय के लोग उनसे नाता तोड़ चुके थे। इसके बाद कल्याण सिंह ने राष्ट्रीय जनक्रान्ति पार्टी का गठन किया जो कि 2012 के विधानसभा चुनाव में कुछ विशेष नहीं कर सकी। लेकिन मुलायम के परम्परागत वोट उनके पास वापस आ गए। इसके बाद 2013 में कल्याण सिंह की भाजपा में पुनः वापसी हुई और कल्याण सिंह का परंपरागत लोधी-राजपूत वोट भी भाजपा से जुड़ गया। और 2014 के लोकसभा चुनावों में नरेंद्र मोदी के कहने पर कल्याण सिंह ने उत्तर प्रदेश में भाजपा का खूब प्रचार किया। भाजपा ने अकेले अपने दम पर 80 लोकसभा सीटों से 71 लोकसभा सीटें जीतीं। और नरेंद्र मोदी देश के यशस्वी प्रधानमंत्री बनें। इसके बाद किसी समय देश के भावी प्रधानमंत्री कहे जाने वाले कल्याण सिंह को राष्ट्रपति ने केंद्र सरकार की सिफारिश पर सितंबर 2014 में राजस्थान का राज्यपाल बनाया। इसके बाद कल्याण सिंह को जनवरी 2015 से अगस्त 2015 तक हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया। लेकिन राजस्थान का राज्यपाल रहते हुए भी कल्याण सिंह का दखल उत्तर प्रदेश की राजनीति में रहा। कल्याण सिंह ने राजस्थान के राज्यपाल के रूप में अपना 05 साल का कार्यकाल पूरा किया और 08 सितम्बर 2019 तक कल्याण सिंह राजस्थान के राज्यपाल रहे। इसके बाद कल्याण सिंह ने 09 सितम्बर 2019 को लखनऊ में भाजपा की पुनः सदस्यता ली और फिर से भाजपाई हो गए। 

उत्तर प्रदेश में 2017 के विधानसभा और 2019 के लोकसभा चुनावों में भी कल्याण सिंह का अप्रत्यक्ष रुप से प्रभावी दखल रहा। 2017 के विधानसभा और 2019 के लोकसभा चुनावों में पार्टी के अधिकतर प्रत्याशी कल्याण सिंह का जयपुर राजभवन में आशीर्वाद लेने जाते रहे। इसी से पता चलता है कि कल्याण सिंह जनमानस में कितने लोकप्रिय रहे है। लोग कल्याण सिंह सरकार की आज भी मिसालें देते हैं। क्योंकि कल्याण सिंह जब उत्तर प्रदेश के सीएम थे तब राज्य में काफी सुधार और विकास की चीजें हुई थीं। जिससे उनकी लोकप्रियता पिछड़ों सहित सर्वणों में भी है। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी अपने भाषणों में कल्याण सरकार के कुशल प्रशासन की मिसाल देते हैं। कल्याण सिंह अपने समय पर उत्तर प्रदेश के हिंदुत्ववादी सर्वमान्य नेता थे। उत्तर प्रदेश में अपनी राजनीति, कुशल प्रशासन और हिंदुत्ववादी छवि के लिए जाने वाले श्रीराम के भक्त कल्याण सिंह ने (21 अगस्त 2021) को 89 साल की उम्र में आखिरी सांस ली। 

श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के अग्रणी योद्धा, धर्म और राष्ट्र के लिए सत्ता का त्याग करने वाले उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री तथा राजस्थान एवं हिमाचल प्रदेश के पूर्व राज्यपाल, श्रद्धेय श्री कल्याण सिंह जी की आज 94वीं जन्म-जयंती है। उनका जीवन भारतीय राजनीति में त्याग, साहस और सिद्धांत निष्ठा का अनुपम उदाहरण है। जब-जब धर्म, आस्था और कर्तव्य के लिए किए गए त्याग की चर्चा होगी, तब-तब श्री कल्याण सिंह जी का नाम विशेष सम्मान और गौरव के साथ स्मरण किया जाएगा। अयोध्या में आज भव्य और दिव्य रामलला के मंदिर की जो ऐतिहासिक परिकल्पना साकार हुई है, उसमें स्वर्गीय श्री कल्याण सिंह जी का योगदान सदैव अविस्मरणीय रहेगा। उन्होंने अपने पद, सत्ता और राजनीतिक भविष्य की परवाह किए बिना धर्म और जनभावनाओं की रक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। उनका दृढ़ संकल्प, अडिग नेतृत्व और राष्ट्रहित के प्रति निष्ठा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बना रहेगा। श्रद्धेय बाबूजी का जीवन और कृतित्व भारतीय इतिहास के स्वर्णिम अध्यायों में सदैव अंकित रहेगा।

डॉ. ब्रह्मानंद राजपूत

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